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हादसों की बढ़ती दर ने खोली बांग्लादेश के 'ग्रीन' शिप-ब्रेकिंग यार्ड के दावे की पोल

हादसों

नई दिल्ली, 16 अगस्त (आईएएनएस)। हालांकि बांग्लादेश ने कागजों पर अपने 31 में से 23 शिप-ब्रेकिंग यार्ड को 'ग्रीन' घोषित किया है, लेकिन असलियत यह है कि वहां काम करने वाले मजदूरों को जानलेवा खतरों का सामना करना पड़ रहा है। बांग्लादेशी मीडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल हांगकांग कन्वेंशन लागू होने के बाद से अब तक 84 दुर्घटनाएं दर्ज की गई हैं।

'द डेली स्टार' की रिपोर्ट में बताया गया है कि 14 अगस्त को सीताकुंडा के भाटियारी में 'फिरदौस स्टील शिप रीसाइक्लिंग इंडस्ट्रीज' में एक कबाड़ हो चुके जहाज के अंदर जहरीली गैस के संपर्क में आने से नौ मजदूरों की मौत हो गई, जिससे सर्टिफिकेशन और असलियत के बीच का अंतर एक बार फिर सामने आ गया।

बांग्लादेश इंस्टीट्यूट ऑफ लेबर स्टडीज (बीआईएलएस) के आंकड़ों से पता चलता है कि 26 जून, 2025 और 14 अगस्त, 2026 के बीच 84 दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 15 लोगों की जान चली गई और 81 मजदूर घायल हो गए।

'द डेली स्टार' के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला कि ज्यादातर दुर्घटनाएं गर्डर और भारी चीजों के गिरने, क्रेन या तार के फेल होने और गैस विस्फोट के कारण हुईं।

शुक्रवार की घटना के बारे में, विस्फोटक विभाग के अधिकारियों ने कहा कि जहाज पर बने एक बंद टैंक के अंदर हाइड्रोजन सल्फाइड गैस जमा होने के कारण ये मौतें हुईं। कबाड़ हो चुका एलएनजी कैरियर, एमटी रासी, जुलाई 2025 में चट्टोग्राम एंकरेज पहुंचा था और उसी महीने के आखिर में उसे तोड़ने के लिए किनारे पर लाया गया था।

इस जानलेवा घटना ने उन आलोचनाओं को फिर से हवा दे दी है कि शिपयार्ड को हांगकांग कन्वेंशन के नियमों का पालन करने के लिए दिए गए 'ग्रीन लाइसेंस' असल में सिर्फ 'ग्रीनवाशिंग' हैं। ग्रीनवाशिंग का मतलब है किसी उत्पाद, सेवा या कंपनी के काम-काज के पर्यावरणीय फायदों के बारे में झूठे, बढ़ा-चढ़ाकर या गुमराह करने वाले दावे करना।

'जहाजों की सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल रीसाइक्लिंग के लिए हांगकांग अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन' एक वैश्विक संधि है जिसे मई 2009 में अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन ने अपनाया था और यह 26 जून, 2025 को लागू हुई थी। यह सुनिश्चित करती है कि जहाजों को तोड़ने से इंसानी सेहत, मजदूरों की सुरक्षा या पर्यावरण को कोई नुकसान न पहुंचे। हालांकि, बांग्लादेश एनवायरनमेंटल लॉयर्स एसोसिएशन (बीईएलए) जैसे एक्सपर्ट ग्रुप का तर्क है कि यह काफी नहीं है और शिपयार्ड को ज्यादा सख्त 'बेसल कन्वेंशन' का भी पालन करना चाहिए।

--आईएएनएस

एमएस/