पटना, 1 अगस्त (आईएएनएस)। जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जेन-जी को दिए संदेश पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने हमेशा धैर्य और सकारात्मक सोच के साथ चुनौतियों का सामना किया है और यही उनकी सबसे बड़ी ताकत रही है।
राजीव रंजन ने कहा कि प्रधानमंत्री का व्यक्तित्व एक दिन में नहीं बना है। सार्वजनिक जीवन में उन्हें कई बार आलोचना, अपमान और राजनीतिक हमलों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने कभी अपना संयम नहीं खोया। उन्होंने कहा कि हाल ही में कुछ बच्चों की ओर से ऐसी बातें कही गईं जो प्रधानमंत्री की गरिमा के अनुरूप नहीं थीं, लेकिन देश के अभिभावक के रूप में प्रधानमंत्री ने उन बातों को विवाद का विषय नहीं बनाया और बच्चों को क्षमा कर दिया। यही एक बड़े नेता की पहचान होती है।
कमर्शियल एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमतों में कमी पर उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में पैदा हुए संकट की वजह से पूरी दुनिया में पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें तेजी से बढ़ी थीं। इसके बावजूद भारत सरकार ने आम लोगों पर बोझ कम करने की हरसंभव कोशिश की। उन्होंने कहा कि पहले व्यावसायिक गैस सिलेंडर महंगे हुए थे लेकिन अब करीब 200 रुपये की कमी का फैसला कारोबारियों और छोटे व्यापारियों के लिए बड़ी राहत है।
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, लेकिन वैश्विक हालात अब धीरे-धीरे सामान्य होने की दिशा में बढ़ रहे हैं।
राजीव रंजन ने कुलगाम आतंकी हमले की निंदा की और कहा कि भारतीय सेना, केंद्रीय सुरक्षा बलों और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने मिलकर आतंकवाद की जड़ों पर लगातार कड़ा प्रहार किया है। आतंकवाद अब कमजोर पड़ चुका है, लेकिन बीच-बीच में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की कोशिश करता है।
उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस नजदीक है, इसलिए सुरक्षा एजेंसियों को पूरी तरह सतर्क रहने की जरूरत है। साथ ही आम नागरिकों से भी अपील की कि वे सुरक्षा से जुड़े सभी दिशा-निर्देशों और प्रोटोकॉल का पालन करें, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना से बचा जा सके।
प्रस्तावित एफसीआरए संशोधन विधेयक पर जेडीयू प्रवक्ता ने कहा कि किसी भी कानून में समय-समय पर बदलाव करना लोकतांत्रिक व्यवस्था का सामान्य हिस्सा है। एफसीआरए कानून को लेकर लंबे समय से चर्चा होती रही है और यदि सरकार इसमें संशोधन कर रही है तो उसका उद्देश्य व्यवस्था को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाना है।
उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि जिन वर्गों तक सहायता पहुंचनी चाहिए, उन्हें उसका वास्तविक लाभ मिले। इसलिए इस संशोधन को केवल राजनीतिक नजरिए से नहीं, बल्कि बेहतर प्रशासन और प्रभावी नियमन के दृष्टिकोण से भी देखा जाना चाहिए।
--आईएएनएस
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