मुंबई, 1 अगस्त (आईएएनएस)। पूंजी बाजार नियामक सेबी ने जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (जीईईएल) और उसके शीर्ष अधिकारियों पुनीत गोयनका तथा सुभाष चंद्रा के खिलाफ बड़ा कदम उठाते हुए उन्हें प्रतिभूति बाजार में कारोबार करने से प्रतिबंधित कर दिया है। सेबी ने पाया कि कंपनी की हैदराबाद स्थित जमीन को आवश्यक कॉर्पोरेट मंजूरी के बिना एस्सेल ग्रुप की कंपनियों द्वारा लिए गए कर्ज के बदले गिरवी रखा गया था।
सेबी के अर्ध-न्यायिक प्राधिकारी द्वारा जारी अंतिम आदेश के अनुसार, जीईईएल को दो महीने तक प्रतिभूति बाजार में प्रवेश करने से रोक दिया गया है। वहीं, पुनीत गोयनका और सुभाष चंद्रा पर 12 महीने तक प्रतिभूति बाजार में कारोबार करने पर रोक लगा दी गई है।
इसके अलावा, सेबी ने तीनों पर कुल 1.48 करोड़ रुपए का जुर्माना भी लगाया है। इसमें जीईईएल पर 30 लाख रुपए, पुनीत गोयनका पर 58 लाख रुपए और सुभाष चंद्रा पर 60 लाख रुपए का जुर्माना शामिल है।
नियामक ने माना कि इन सभी ने लिस्टिंग ऑब्लिगेशंस एंड डिस्क्लोजर रिक्वायरमेंट्स (एलओडीआर) रेगुलेशंस, 2015 और प्रोहिबिशन ऑफ फ्रॉडुलेंट एंड अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिसेज (पीएफयूटीपी) रेगुलेशंस, 2003 का उल्लंघन किया है। सेबी ने निर्देश दिया है कि सभी संबंधित पक्ष 45 दिनों के भीतर जुर्माने की राशि जमा करें।
सेबी के अनुसार, इस मामले की शुरुआत वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान जीईईएल के वैधानिक ऑडिट से हुई थी। ऑडिट में कंपनी की कुछ अचल संपत्तियों के मूल स्वामित्व दस्तावेज (टाइटल डीड) उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई थी।
जांच में पता चला कि दिसंबर 2016 में एस्सेल ग्रुप की चार कंपनियों ने इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (आईएचएफएल) से 726 करोड़ रुपए का कर्ज लिया था, जिसमें एसेल होम प्राइवेट लिमिटेड सह-उधारकर्ता थी।
जांच में यह भी सामने आया कि इन कंपनियों पर कई कॉर्पोरेट स्तरों के माध्यम से पुनीत गोयनका, सुभाष चंद्रा और उनके परिवार का नियंत्रण था।
सेबी ने बताया कि जब उधार लेने वाली कंपनियां आवश्यक सुरक्षा बनाए रखने में विफल रहीं, तो नवंबर 2018 में आईएचएफएल ने अतिरिक्त संपार्श्विक (कोलेटरल) उपलब्ध कराने के लिए नोटिस जारी किया।
इसके बाद 27 दिसंबर 2018 को जीईईएल की ओर से एक डिक्लेरेशन एंड एक्नॉलेजमेंट पर हस्ताक्षर किए गए, जिसके तहत कंपनी की हैदराबाद स्थित जमीन के मूल दस्तावेज आईएचएफएल के पास जमा कराए गए, जिसका उद्देश्य इन कर्जों के लिए अतिरिक्त सुरक्षा के रूप में उस संपत्ति पर प्रथम श्रेणी का बंधक (फर्स्ट-रैंकिंग मॉर्टेज) बनाना था।
हालांकि, जीईईएल ने दावा किया कि इस बंधक के लिए सभी आवश्यक कॉर्पोरेट मंजूरियां ली गई थीं, लेकिन सेबी की जांच में ऑडिट कमेटी, निदेशक मंडल या शेयरधारकों की ओर से ऐसी कोई पूर्व मंजूरी नहीं मिली।
सेबी ने यह भी कहा कि बाद में जीईईएल ने नियामक को बताया था कि कंपनी का प्रबंधन और निदेशक मंडल इस बंधक से अनभिज्ञ था और उन्होंने इस लेनदेन को कभी मंजूरी नहीं दी थी।
नियामक के अनुसार, वित्त वर्ष 2018-19 और 2019-20 के वित्तीय विवरणों के आधार पर यह एक संबंधित पक्ष लेनदेन था, जिसके लिए लागू नियमों के तहत आवश्यक मंजूरियां और खुलासे किए जाना अनिवार्य था।