रेखा सरकार का ऐतिहासिक फैसला, आपदा प्रबंधन कर्मियों के मानदेय में 100 प्रतिशत तक होगी वृद्धि

रेखा सरकार का ऐतिहासिक फैसला, आपदा प्रबंधन कर्मियों के मानदेय में 100 प्रतिशत तक होगी वृद्धि

नई दिल्ली, 2 अगस्त (आईएएनएस)। दिल्ली सरकार ने राजधानी की आपदा प्रबंधन व्यवस्था को अधिक सक्षम, आधुनिक और पेशेवर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए दिल्ली राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीएसडीएमए) के अंतर्गत कार्यरत स्टाफ जैसे प्रोजक्ट ऑफिसर (पीओ), डिस्ट्रिक्ट प्रोजक्ट ऑफिसर (डीपीओ) और प्रोजेक्ट कॉर्डिनेटर (पीसी) के मानदेय में वृद्धि करने का निर्णय लिया है।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि इस निर्णय से इन स्टाफ के मानदेय में 100 प्रतिशत तक की वृद्धि होगी। यह निर्णय उन कर्मियों को न्याय दिलाने की दिशा में उठाया गया है, जिन्होंने वर्ष 2009 से लगातार दिल्ली की आपदा प्रबंधन व्यवस्था की रीढ़ बनकर कार्य किया, लेकिन पिछले 16 वर्षों में उनके मानदेय में एक बार भी संशोधन नहीं हुआ।

उन्होंने जानकारी दी कि वर्ष 2009 में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) के सहयोग से शुरू हुए इन पदों पर नियुक्त कर्मियों, जैसे प्रोजक्ट ऑफिसर, डिस्ट्रिक्ट प्रोजक्ट ऑफिसर और प्रोजेक्ट कॉर्डिनेटर का मासिक मानदेय पिछले 16 वर्षों से अपरिवर्तित था। इस अवधि में महंगाई बढ़ी, आपदा प्रबंधन की चुनौतियां अधिक जटिल हुईं, जिम्मेदारियां लगातार बढ़ीं और उनकी भूमिका का दायरा भी विस्तृत हुआ, लेकिन कार्यरत इन स्टाफ प्रोजक्ट ऑफिसर/डिस्ट्रिक्ट प्रोजक्ट ऑफिसर का मानदेय 25,000 रुपए और प्रोजेक्ट कॉर्डिनेटर का 20,000 रुपए ही बना रहा।

उन्होंने कहा कि इन पदों को प्रारंभिक स्तर पर दिल्ली सरकार की किसी नियमित वेतन संरचना अथवा समकक्ष वेतन श्रेणी से नहीं जोड़ा गया था। परिणामस्वरूप इन स्टाफ को अन्य सरकारी कर्मचारियों की तरह समय-समय पर वेतन संशोधन अथवा महंगाई भत्ते (डीए) का लाभ भी नहीं मिल सका।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि सभी बातों को मद्देनजर मंजूर नई वेतन संरचना के तहत इन कर्मियों के मानदेय में 100 प्रतिशत तक की वृद्धि की अनुशंसा कर दी गई है। यह संशोधन किसी प्रकार की अनुग्रह राशि नहीं, बल्कि जिम्मेदारियों, अनुभव, तकनीकी विशेषज्ञता और वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप एक न्यायसंगत एवं प्रतिस्पर्धी वेतन संरचना सुनिश्चित करने की दिशा में उठाया गया कदम है।

उन्होंने कहा कि ये कर्मी केवल कार्यालय के कार्य नहीं करते, बल्कि आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत अत्यंत महत्वपूर्ण वैधानिक जिम्मेदारियां निभाते हैं। वे जिला स्तरीय आपदा प्रबंधन योजनाएं तैयार करते हैं, विभिन्न प्रकार के जोखिमों का वैज्ञानिक आकलन करते हैं, दिल्ली के संवेदनशील क्षेत्रों एवं कमजोर आबादी का जोखिम मूल्यांकन कर जोखिम कम करने की रणनीति तैयार करते हैं, विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित करते हैं और आपदा की स्थिति में इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर (ईओसी) का संचालन करते हुए एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, अग्निशमन सेवा, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और अन्य एजेंसियों के बीच वास्तविक समय में राहत एवं बचाव कार्यों का समन्वय करते हैं। इसके अतिरिक्त वे प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करते हैं, बड़े स्तर पर मॉक ड्रिल कराते हैं और विभिन्न हितधारकों की क्षमता निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि अन्य राज्यों और दिल्ली सरकार के विभिन्न विभागों की तुलना में भी डीएसडीएमए के इन पदों का मानदेय काफी कम था। जहां कर्नाटक, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में समान जिम्मेदारियां निभाने वाले अधिकारियों को लगभग 45,000 रुपए से 50,000 रुपए अथवा उससे अधिक का मानदेय दिया जा रहा है, वहीं दिल्ली सरकार के अन्य विभागों में भी समान स्तर के संविदा पदों का पारिश्रमिक कहीं अधिक है। राष्ट्रीय राजधानी जैसे उच्च जोखिम वाले महानगर के लिए यह स्थिति उचित नहीं थी।

उन्होंने आगे कहा कि सरकार भविष्य में इस संवर्ग को और अधिक मजबूत एवं पेशेवर बनाने के उद्देश्य से प्रदर्शन आधारित वार्षिक वेतन वृद्धि, कर्मचारियों एवं उनके परिवारों के लिए चिकित्सा सुरक्षा तथा प्रशिक्षण, कार्यशालाओं और क्षमता निर्माण जैसे कल्याणकारी उपायों पर भी विचार करेगी।

सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार का लक्ष्य केवल वेतन बढ़ाना नहीं, बल्कि राजधानी की आपदा प्रबंधन व्यवस्था को अधिक सक्षम, आधुनिक और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार बनाना है। वर्षों से सीमित मानदेय पर कार्य कर रहे हमारे आपदा प्रबंधन अधिकारियों ने दिल्ली की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उनके अनुभव, विशेषज्ञता और समर्पण का सम्मान करना हमारी जिम्मेदारी है। यह निर्णय न केवल उनके साथ न्याय करेगा, बल्कि लगभग 3.2 करोड़ दिल्लीवासियों की सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा।

--आईएएनएस

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