पश्चिम बंगाल: सीएम सुवेंदु अधिकारी ने बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन को सम्मानित किया

पश्चिम बंगाल: सीएम सुवेंदु अधिकारी ने बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन को सम्मानित किया

कोलकाता, 1 अगस्त (आईएएनएस)। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने 19 साल बाद पश्चिम बंगाल लौटीं निर्वासित बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन को सम्मानित किया।

इस दौरान मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि इस पश्चिम बंगाल में सभी को आने का अवसर है और सभी को बोलने की स्वतंत्रता है। प्रख्यात लेखिका तस्लीमा नसरीन कल पश्चिम बंगाल पहुंचीं और आज कार्यक्रम में शामिल हो रही हैं। इससे यह सिद्ध होता है कि नई सरकार के हाथों में बंगाल का लोकतंत्र, संविधान, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मौलिक अधिकार सुरक्षित हैं।

बांग्लादेशी मूल की चर्चित लेखिका तसलीमा नसरीन शनिवार को लगभग दो दशक बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से कोलकाता पहुंचीं।

तसलीमा नसरीन की कोलकाता वापसी की उम्मीद मार्च 2025 में तब जगी थी, जब पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद समिक भट्टाचार्य ने संसद के उच्च सदन में उन्हें कोलकाता लौटने की अनुमति देने की मांग उठाई थी।

यह मांग उस विवाद के बाद सामने आई थी, जब तत्कालीन तृणमूल कांग्रेस सरकार पर उनकी चर्चित पुस्तक 'लज्जा' पर आधारित नाटक के मंचन को रोकने का आरोप लगा था। वर्ष 1993 में प्रकाशित 'लज्जा' में बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद बांग्लादेश में एक हिंदू परिवार पर हुए अत्याचारों का चित्रण किया गया था, जिसके चलते उन्हें अपने देश में तीव्र विरोध का सामना करना पड़ा।

धार्मिक कट्टरता की आलोचना, महिलाओं के अधिकारों की मुखर वकालत और धर्म के नाम पर होने वाले भेदभाव के विरोध के कारण तसलीमा नसरीन को लगातार धमकियां मिलीं। कट्टरपंथियों ने उनके सिर पर इनाम घोषित कर दिया, जिसके बाद उन्हें 1994 में बांग्लादेश छोड़ना पड़ा और तब से वह निर्वासन का जीवन जी रही हैं।

वर्ष 2004 में उन्होंने कोलकाता को अपना ठिकाना बनाया, लेकिन 2007 में उनकी आत्मकथात्मक पुस्तक 'द्विखंडित' को लेकर हुए उग्र विरोध प्रदर्शनों के बाद तत्कालीन वाम मोर्चा सरकार ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए उन्हें राज्य छोड़ने पर मजबूर कर दिया।

हालांकि उनकी वापसी पर कभी कोई औपचारिक प्रतिबंध नहीं लगाया गया, लेकिन तृणमूल कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में भी उनके लिए कोलकाता के दरवाजे प्रभावी रूप से बंद ही रहे। इसके बाद उन्होंने नई दिल्ली को अपना निवास बना लिया।

तसलीमा नसरीन का जन्म कोलकाता में नहीं हुआ, लेकिन वह इस शहर को हमेशा अपनी 'सिटी ऑफ जॉय' मानती रही हैं। उनके लिए यह शहर भाषा, साहित्य, संस्कृति और आत्मीय संबंधों का केंद्र रहा है, जहां उन्होंने अपने लिए एक दूसरा घर बनाया था।

--आईएएनएस

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