अनंतनाग, 2 अगस्त (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकी हमलों पर नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला की प्रतिक्रिया सामने आई। उन्होंने सरकार पर निशाना साधा है।
पत्रकारों से बातचीत करते हुए फारूक अब्दुल्ला ने कहा, "हाल ही में एक पुलिस कांस्टेबल को गोली मारी गई, और दो प्रवासी श्रमिकों को भी गोली मारी गई। मैं पूछना चाहता हूं, इन हत्याओं के लिए कौन जिम्मेदार है? आप कहते हैं कि आतंकवाद खत्म हो गया है, लेकिन अगर यह खत्म हो गया है, तो ये लोग कौन हैं जो ऐसे हमले कर रहे हैं? अगर पूरा बॉर्डर कंट्रोल में है, तो ये हमलावर कहां से आ रहे हैं?"
फारूक अब्दुल्ला ने आगे कहा, "2019 के बाद, हमें बताया गया था कि हालात बदल जाएंगे, लेकिन क्या आतंकवाद सच में खत्म हो गया है? हम सिर्फ अपने हक और इज्जत वापस पाने की मांग कर रहे हैं।" पीओके को लेकर उन्होंने कहा, "वे भी हमारे भाई हैं। अगर उन पर ज़ुल्म हो रहा है, तो हमने बार-बार कहा है कि इस मामले पर ध्यान देना चाहिए। यूनाइटेड नेशंस इतना बड़ा संगठन है और उसकी ह्यूमन राइट्स विंग भी बहुत बड़ी है। उन्हें जाकर देखना चाहिए कि उनकी हालत क्या है। लेकिन वहां सब चुप हैं; कोई भी देश कोई एक्शन नहीं ले रहा है।"
पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती को लेकर किए गए सवाल पर उन्होंने कहा, "मैं महबूबा जी को जवाब नहीं दूंगा। वह जो कहती हैं, कहती हैं।"
बता दें कि जम्मू-कश्मीर में 10 दिनों के भीतर दो आतंकी हमले हुए हैं। अधिकारियों को पता चला है कि अनंतनाग में हुआ पहला हमला और कुलगाम में हुआ दूसरा हमला, दोनों ही लश्कर-ए-तैयबा के सहयोगी संगठन 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' की साजिश हैं। एजेंसियों का मानना है कि लश्कर कश्मीर में नागरिकों को निशाना बनाने के लिए अपने सहयोगी संगठनों का इस्तेमाल करने की पुरानी रणनीति को फिर से अपना रहा है।
एजेंसियां इन हमलों में लश्कर-ए-तैयबा के एक सदस्य की भूमिका की जांच कर रही हैं। हमले में उसकी भूमिका से स्पष्ट रूप से संकेत मिलता है कि यह हमला लश्कर-ए-तैयबा की ओर से ही अंजाम दिया गया था। लतीफ ने लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर जाकिर गनई के साथ मिलकर काम किया है, जिसके दौरान उसने अनंतनाग, शोपियां और कुलगाम में हमले किए थे।
--आईएएनएस
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