अमृतसर, 25 अगस्त (आईएएनएस)। डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को बार-बार पैरोल दिए जाने के मुद्दे पर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के सदस्य भाई मंजीत सिंह ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि देश में कानून के इस्तेमाल को लेकर अलग-अलग मापदंड दिखाई देते हैं। एक तरफ राम रहीम को लगातार पैरोल मिल रही है, वहीं लंबे समय से जेल में बंद सिख कैदियों की रिहाई के मामलों में सरकारें गंभीरता नहीं दिखा रही हैं।
भाई मंजीत सिंह ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि उन्होंने पहले भी कई मंचों पर इस मुद्दे को उठाया है। देश में बहुसंख्यक और अल्पसंख्यक समुदायों के लिए कानून के इस्तेमाल को लेकर अलग-अलग रवैया है। सिख समुदाय ने देश की आजादी के लिए बड़ी संख्या में कुर्बानियां दीं और शहादतें दीं, लेकिन आजादी के बाद भी सिखों से किए गए कई वादे पूरे नहीं हुए। देश की आजादी के बाद सिखों के साथ किए गए वादों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उस समय सिखों को एक अलग क्षेत्र दिए जाने की बात कही गई थी, लेकिन बाद में परिस्थितियां बदलने की बात कहकर उस वादे को पूरा नहीं किया गया।
उन्होंने कहा कि कई सिख कैदी दशकों से जेलों में बंद हैं। उन्होंने जगतार सिंह हवारा, भाई बलवंत सिंह राजोआणा, प्रोफेसर देवेंद्र पाल सिंह भुल्लर और गुरदीप सिंह खेड़ा समेत अन्य बंदी सिखों का नाम लेते हुए कहा कि कई लोगों ने 32 से 33 साल तक जेल में रहने के अलावा अपनी उम्रकैद या निर्धारित सजा भी पूरी कर ली है, लेकिन इसके बावजूद उनकी रिहाई नहीं हो रही है। इन कैदियों के मामलों में सरकार को मानवीय और कानूनी दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति ने कानून के तहत निर्धारित सजा पूरी कर ली है, तो उसकी रिहाई के मामले पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
उन्होंने बलवंत सिंह राजोआणा की फांसी की सजा का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व के अवसर पर केंद्र सरकार की ओर से बंदी सिखों की रिहाई और भाई बलवंत सिंह की फांसी की सजा को उम्रकैद में बदलने की बात कही गई थी। प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री की ओर से भी इस संबंध में आश्वासन दिए जाने की बात कही गई थी, लेकिन इन वादों को अभी तक पूरी तरह अमल में नहीं लाया गया है।
गुरमीत राम रहीम को बार-बार पैरोल दिए जाने पर भाई मंजीत सिंह ने विशेष रूप से आपत्ति जताई। उन्होंने दावा किया कि राम रहीम को 17वीं बार पैरोल दी गई है और आरोप लगाया कि इसके पीछे राजनीतिक हित जुड़े हो सकते हैं। चुनावी राजनीति में वोटों को प्राथमिकता दी जा रही है और इसी वजह से राम रहीम को बार-बार राहत मिलती दिखाई दे रही है। उन्होंने आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए दावा किया कि वर्ष 2027 के चुनाव के दौरान भी राम रहीम को सुरक्षा के बीच पंजाब लाए जाने की संभावना हो सकती है।
उन्होंने जगतार सिंह हवारा की मां की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि वह गंभीर अवस्था में हैं। उन्होंने सवाल किया कि ऐसी परिस्थिति में उनकी मां से मिलने के लिए हवारा को पैरोल क्यों नहीं दी जा रही? परिवार को अपने सदस्य से मिलने का मानवीय अधिकार मिलना चाहिए। किसी को एक दिन, किसी को दो दिन और किसी को तीन दिन की राहत देने की बात करना उनके लिए मजाक जैसा है।
उन्होंने यह भी कहा कि उनका मुख्य सवाल किसी एक व्यक्ति की पैरोल तक सीमित नहीं है, बल्कि कानून के समान इस्तेमाल का है। उन्होंने मांग की कि देश में सभी नागरिकों के लिए कानून समान रूप से लागू होना चाहिए और किसी भी समुदाय के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए। पंजाब और सिख समुदाय ने देश के लिए बड़े स्तर पर योगदान दिया है। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों से बंदी सिखों के मामलों पर पुनर्विचार करने की अपील करते हुए कहा कि जिन कैदियों ने अपनी सजा पूरी कर ली है, उनके मामलों में कानून के अनुसार उचित फैसला लिया जाना चाहिए।
--आईएएनएस
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