नई दिल्ली, 3 अगस्त (आईएएनएस)। हिंदू धर्म में पंचांग का काफी महत्व होता है। कोई शुभ काम, यात्रा, निवेश या पूजा-पाठ करने से पहले पंचांग जरूर देखा जाता है। पंचांग हिंदू काल-गणना पद्धति है जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित है।
4 अगस्त 2026 को (मंगलवार) कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि रात 10:03 बजे तक है। इसके बाद सप्तमी लग जाएगी। माता गौरी (पार्वती) और भगवान शिव की पूजा करना अत्यंत शुभ है; इस दिन सावन मास का पहला मंगला गौरी व्रत है। सुहागिन महिलाएं अखंड सौभाग्य और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए यह व्रत रखती हैं।
मंगलवार को सुबह 6:02 बजे सूर्योदय और शाम 7:03 बजे सूर्यास्त होगा। वहीं, रात 10:35 बजे चंद्रोदय और सुबह 11:53 बजे चंद्रास्त होगा। पंचांग के अनुसार, 4 अगस्त 2026 को सूर्य अश्लेषा नक्षत्र में स्थित रहेगा, जबकि चंद्रमा रात 9:51 बजे तक रेवती नक्षत्र में रहेगा, इसके बाद अश्विनी नक्षत्र आरंभ होगा।
मंगलवार को हर्षण योग नहीं रहेगा, बल्कि इस दिन धृति योग रहेगा। इस दिन अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:07 से 12:59 तक रहेगा। यह दिन का सबसे शुभ समय माना जाता है। अमृत काल रात 7:29 से 9:04 तक रहेगा।
वहीं, राहुकाल शाम 3:48 बजे से 5:25 बजे और गुलिक काल दोपहर 12:33 से दोपहर 2:10 बजे तक रहेगा। इसके अलावा यमगंड काल सुबह 9:17 से 10:55 बजे तक रहेगा। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, इन समयों में नए कार्य शुरू करने से बचना चाहिए, क्योंकि इन्हें अशुभ समय माना जाता है।
मंगलवार को इस दिन सूर्य कर्क राशि में स्थित रहेगा, जबकि चंद्रमा मीन राशि में स्थित रहेगा। उत्तर दिशा में दिशाशूल रहेगा। ज्योतिष और वास्तु के मुताबिक, इस दिशा में यात्रा करने से बचना चाहिए। यदि यात्रा करना अनिवार्य हो, तो कुछ विशेष ज्योतिषीय उपायों को अपनाकर प्रस्थान किया जा सकता है।