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पश्चिम बंगाल के सरकारी अस्पताल में खून की कालाबाजारी का आरोप, तीन लैब सहायक गिरफ्तार

पश्चिम

कोलकाता, 25 अगस्त (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल पुलिस की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा ने मंगलवार को एक सरकारी अस्पताल के तीन लैब सहायकों को खून की कथित कालाबाजारी के आरोप में गिरफ्तार किया है।

गिरफ्तार किए गए तीनों लैब सहायक पूर्वी मिदनापुर जिले के पंसकुरा सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में कार्यरत हैं। हालांकि, पुलिस ने अभी तक उनकी पहचान सार्वजनिक नहीं की है।

पुलिस को शक है कि यह तीनों एक बड़े गिरोह का हिस्सा हैं। इसी वजह से भ्रष्टाचार निरोधक शाखा उनसे पूछताछ कर रही है ताकि मामले से जुड़े अन्य लोगों और नेटवर्क की जानकारी मिल सके।

पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपियों का काम करने का तरीका काफी अलग था।

एक पुलिस अधिकारी के अनुसार, जब भी उन्हें किसी क्लब या सामाजिक संगठन द्वारा आयोजित रक्तदान शिविर की जानकारी मिलती थी तो वे आयोजकों के पास पहुंचकर डोनर कार्ड बेहद कम कीमत पर खरीद लेते थे। एक कार्ड के लिए वे करीब 100 से 150 रुपए देते थे।

इसके बाद इन डोनर कार्डों के आधार पर सरकारी ब्लड बैंकों से मुफ्त में एक यूनिट खून प्राप्त कर लिया जाता था। बाद में यही खून उन मरीजों के परिजनों को ऊंची कीमत पर बेचा जाता था जिन्हें तत्काल रक्त की आवश्यकता होती थी।

पुलिस के मुताबिक, जितना दुर्लभ ब्लड ग्रुप होता था, उसकी कीमत उतनी ही अधिक वसूली जाती थी।

जांचकर्ताओं का कहना है कि खून बेचकर प्राप्त रकम तीनों आरोपी आपस में बांट लेते थे।

पुलिस को आशंका है कि इस पूरे मामले में एक बड़ा नेटवर्क सक्रिय है। इसी कारण जांच एजेंसियां रक्तदान शिविर आयोजित करने वाले विभिन्न क्लबों और संगठनों की गतिविधियों पर भी नजर रख रही हैं।

बता दें कि इसी महीने कलकत्ता हाईकोर्ट ने राज्य के स्वास्थ्य विभाग को उन 11 निजी ब्लड बैंकों के खिलाफ चल रही जांच जल्द पूरी करने का निर्देश दिया था, जिन पर खून और प्लाज्मा की अवैध बिक्री समेत कई गंभीर अनियमितताओं के आरोप हैं।

स्वास्थ्य विभाग ने इन 11 निजी ब्लड बैंकों को अगले आदेश तक राज्य में कहीं भी रक्तदान शिविर आयोजित करने से रोक दिया था।

इनमें से एक निजी ब्लड बैंक ने स्वास्थ्य विभाग के आदेश को चुनौती देते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति कृष्ण राव की पीठ ने की थी।

अदालत ने जांच में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए स्वास्थ्य विभाग को निर्धारित समय सीमा के भीतर जांच पूरी करने का निर्देश दिया था।

--आईएएनएस

एएमटी/डीकेपी