रॉबिन सिंह: वेस्टइंडीज में हुआ जन्म, भारत को गांगुली संग मिलकर दिलाई पाकिस्तान पर ऐतिहासिक जीत

रॉबिन सिंह: वेस्टइंडीज में हुआ जन्म, भारत को गांगुली संग मिलकर दिलाई पाकिस्तान पर ऐतिहासिक जीत

नई दिल्ली, 13 सितंबर (आईएएनएस)। भारत के पूर्व क्रिकेटर रॉबिन सिंह का नाम जब भी आता है, तो सबसे पहले उनकी मैदान पर शानदार फील्डिंग की चर्चा होती है। वेस्टइंडीज के त्रिनिदाद में जन्मे रॉबिन सिंह 1984 में ही भारत आकर बस गए थे। उन्होंने टीम इंडिया की जर्सी में शानदार प्रदर्शन करते हुए कई मुकाबलों में अकेले दम पर जीत दिलाई।

रॉबिन सिंह का जन्म 14 सितंबर, 1963 को वेस्टइंडीज के त्रिनिदाद और टोबैगा में हुआ। वह 1984 में अपने माता-पिता के साथ भारत के चेन्नई शहर में आ गए। रॉबिन भारत आए तो पढ़ाई करने के मकसद से थे, लेकिन उनका क्रिकेट से लगाव यहां आकर और बढ़त गया। उन्होंने मद्रास विश्वविघालय से अपनी पढ़ाई पूरी की। कॉलेज के दिनों में उन्होंने कई लीग में हिस्सा लिया और क्लब क्रिकेट में धीरे-धीरे अपनी पहचान बनाई। घरेलू क्रिकेट में अच्छा प्रदर्शन करने के बाद रॉबिन को 1989 में पहली बार भारतीय टीम से बुलावा आया। वेस्टइंडीज के खिलाफ खेले गए इस वनडे मुकाबले में रॉबिन बल्ले से कुछ खास कमाल नहीं दिखा सके और 3 रन बनाकर आउट हुए। उन्होंने गेंदबाजी में भी सिर्फ 1.2 ओवर डाले।

इस सीरीज के बाद रॉबिन को भारतीय टीम से बाहर कर दिया गया और उन्हें वापसी करने में सात साल लगे। रॉबिन ने अपने वनडे करियर का तीसरा मुकाबला 1996 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेला। रॉबिन ने भारत के लिए कुल 136 वनडे मैच खेले। इस दौरान उन्होंने 25.95 की औसत से खेलते हुए 2,336 रन बनाए। अपने एकदिवसीय करियर में रॉबिन ने एक शतक लगाया। वहीं, गेंदबाजी में उन्होंने कुल 69 विकेट चटकाए। 1998 में पाकिस्तान के खिलाफ इंडिपेंडेंस कप के फाइनल मुकाबले में रॉबिन का प्रदर्शन दमदार रहा और उन्होंने 82 रनों की पारी खेलने के दौरान सौरव गांगुली संग मिलकर 179 रनों की साझेदारी निभाई। रॉबिन की इस पारी के बूते भारत 315 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए पाकिस्तान को हराने में सफल रहा।

रॉबिन ने अपनी फुर्ती भरी फील्डिंग से भी विश्व क्रिकेट में खास पहचान बनाई। 1999 विश्व कप में उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 75 रनों की जुझारू पारी खेली, जिसने खूब सुर्खियां बटोरी। हालांकि, रॉबिन क्रिकेट के सबसे लंबे फॉर्मेट में खुद को स्थापित नहीं कर सके। उन्हें भारत की सफेद जर्सी में खेलने का मौका सिर्फ एक बार मिला। इस टेस्ट मैच में वह 27 रन ही बना सके। 2007 से 2009 तक वह भारतीय टीम के फील्डिंग कोच भी रहे।

--आईएएनएस

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