नई दिल्ली, 13 सितंबर (आईएएनएस)। बांग्लादेश हाल के वर्षों के सबसे गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकटों में से एक का सामना कर रहा है। देश में खसरे के बड़े प्रकोप ने टीकाकरण और स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर कमजोरियों को उजागर किया है। एक रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है।
'द डेली स्टार' में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया है कि 15 मार्च 2026 से अब तक 1.89 लाख से अधिक लोग, जिनमें ज्यादातर बच्चे हैं, खसरे या खसरे जैसे लक्षणों से प्रभावित हुए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, इनमें से कम से कम 1.49 लाख मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरत पड़ी, जबकि पुष्ट और संदिग्ध मामलों को मिलाकर मौतों का आंकड़ा 1,012 तक पहुंच गया है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि पुष्ट और संदिग्ध संक्रमण तथा मौतों के आंकड़ों में अंतर है। हालांकि, रिपोर्ट के मुताबिक बड़ी संख्या में बच्चों की ऐसी बीमारी से मौत हो रही है, जिसे टीकाकरण के जरिए काफी हद तक रोका जा सकता है।
इस प्रकोप ने बांग्लादेश के टीकाकरण कार्यक्रम को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। कभी इस कार्यक्रम को विकासशील देशों के बीच बड़ी सफलता की कहानी माना जाता था।
रिपोर्ट में कहा गया कि सरकार के नेतृत्व, गैर-सरकारी संगठनों की भागीदारी और सामुदायिक स्तर पर जागरूकता के जरिए हासिल की गई उच्च टीकाकरण कवरेज ने पहले लाखों बच्चों को रोकी जा सकने वाली बीमारियों से सुरक्षित रखने में मदद की थी। हालांकि, मौजूदा संकट के पीछे कई कारण सामने आए हैं।
'द डेली स्टार' के मुताबिक, कोविड-19 महामारी ने नियमित टीकाकरण अभियान को प्रभावित किया और कई बच्चों को दोबारा टीकाकरण व्यवस्था से नहीं जोड़ा जा सका।
रिपोर्ट में कहा गया कि दुर्गम इलाकों में रहने वाली आबादी, शहरी झुग्गियों में रहने वाले लोग, प्रवासी और अन्य हाशिए पर रहने वाले समुदाय विशेष रूप से कमजोर बने रहे। नियमित फॉलो-अप और उन बच्चों की पहचान करने की प्रक्रिया भी पर्याप्त नहीं रही, जिन्हें कोई भी टीका नहीं मिला था। इन सभी कमजोरियों का असर धीरे-धीरे बढ़ता गया।
स्थिति को देखते हुए बांग्लादेश के अधिकारियों ने बड़े पैमाने पर आपातकालीन टीकाकरण अभियान शुरू किया और करीब 1.97 करोड़ बच्चों को टीका लगाए जाने की जानकारी दी। हालांकि, बाद में इसी आयु वर्ग के बच्चों के लिए चलाए गए विटामिन-ए अभियान में करीब 2.23 करोड़ बच्चों तक पहुंचने के बाद आबादी के अनुमान की सटीकता को लेकर सवाल उठने लगे।
रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों ने स्वीकार किया कि खसरा टीकाकरण के लिए लक्षित बच्चों की मूल संख्या का अनुमान कम लगाया गया था।
जून और जुलाई में संक्रमण के मामलों में अस्थायी गिरावट देखने को मिली, लेकिन अगस्त में खसरे के मामलों में फिर तेजी आ गई।
रिपोर्ट ने मौजूदा स्थिति को ऐसी सार्वजनिक स्वास्थ्य विफलता बताया, जिसे काफी हद तक रोका जा सकता था और जिसे व्यापक तौर पर शासन व्यवस्था की विफलता के रूप में भी देखा जा सकता है। इसमें इस पूरे प्रकरण की गहन जांच कराने और टीकाकरण व्यवस्था को मजबूत करने के लिए नए सिरे से प्रयास करने की जरूरत बताई गई है, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा पैदा न हो।
--आईएएनएस
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