उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन 9 जुलाई को ओडिशा दौरे पर, डीप सी फिशिंग मिशन का करेंगे शुभारंभ

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन 9 जुलाई को ओडिशा दौरे पर, डीप सी फिशिंग मिशन का करेंगे शुभारंभ

नई दिल्ली, 8 जुलाई (आईएएनएस)। उपराष्ट्रपति सीपी. राधाकृष्णन 9 जुलाई को एक दिवसीय दौरे पर ओडिशा जाएंगे। इस दौरान वह भुवनेश्वर में आयोजित कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। उनकी यात्रा का मुख्य उद्देश्य समुद्री मत्स्य क्षेत्र को बढ़ावा देना और विज्ञान एवं उच्च शिक्षा से जुड़े कार्यक्रमों में भागीदारी करना है।

आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार, उपराष्ट्रपति सबसे पहले भुवनेश्वर स्थित ओडिशा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (ओयूएटी) पहुंचेंगे। यहां वह खुले समुद्र में मत्स्य पालन के सतत दोहन के लिए 'प्राधिकरण पत्र (लेटर ऑफ ऑथराइजेशन-एलओए)' जारी करने के राष्ट्रीय शुभारंभ कार्यक्रम में शामिल होंगे। इस पहल का उद्देश्य गहरे समुद्र में मत्स्य संसाधनों के वैज्ञानिक, सुरक्षित और टिकाऊ उपयोग को बढ़ावा देना है, ताकि मत्स्य क्षेत्र के विकास के साथ समुद्री जैव विविधता का संरक्षण भी सुनिश्चित किया जा सके।

इसी कार्यक्रम के दौरान उपराष्ट्रपति 'ओडिशा डीप सी फिशिंग मिशन' दस्तावेज का भी औपचारिक शुभारंभ करेंगे। यह मिशन राज्य में गहरे समुद्र में मत्स्य पालन की संभावनाओं को बढ़ाने, आधुनिक तकनीक के उपयोग को प्रोत्साहित करने, मछुआरों की आय में वृद्धि करने और मत्स्य क्षेत्र को अधिक संगठित एवं टिकाऊ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

अपने दौरे के दूसरे चरण में उपराष्ट्रपति भुवनेश्वर के खुर्दा स्थित 'राष्ट्रीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (एनआईएसईआर)' पहुंचेंगे। यहां वह संस्थान के 15वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। इस अवसर पर वह स्नातक और शोध की पढ़ाई पूरी करने वाले विद्यार्थियों को डिग्रियां एवं पदक प्रदान करेंगे और उन्हें वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचार और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित करेंगे।

उम्मीद है कि उपराष्ट्रपति अपने संबोधन में विज्ञान, अनुसंधान, नवाचार और तकनीकी शिक्षा की भूमिका पर भी प्रकाश डालेंगे। साथ ही देश में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने, अनुसंधान को प्रोत्साहन देने और युवा वैज्ञानिकों को नई चुनौतियों के लिए तैयार करने पर भी अपने विचार रख सकते हैं।

उपराष्ट्रपति का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब केंद्र और राज्य सरकारें समुद्री अर्थव्यवस्था, ब्लू इकोनॉमी और मत्स्य क्षेत्र के आधुनिकीकरण पर विशेष जोर दे रही हैं। वहीं, एनआईएसईआर जैसे प्रमुख संस्थानों के माध्यम से विज्ञान और अनुसंधान को नई दिशा देने के प्रयास भी लगातार किए जा रहे हैं। ऐसे में उपराष्ट्रपति की यह यात्रा मत्स्य क्षेत्र और वैज्ञानिक शिक्षा, दोनों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

--आईएएनएस

एससीएच/एबीएम