नई दिल्ली, 8 जुलाई (आईएएनएस)। दिल्ली की राजनीति में कथित 650 करोड़ रुपये के दवा खरीद घोटाले को लेकर आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। आम आदमी पार्टी (आप) ने बुधवार को लगातार तीसरे दिन राजधानी के सरकारी अस्पतालों के बाहर सांकेतिक प्रदर्शन किया। इस क्रम में दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने गुरु तेग बहादुर (जीटीबी) अस्पताल के बाहर प्रदर्शन कर सरकार को घेरा।
इस दौरान बुराड़ी विधायक संजीव झा और कोंडली विधायक कुलदीप कुमार भी मौजूद रहे। सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि दिल्ली सरकार की वजह से सरकारी अस्पतालों में मरीजों को आवश्यक दवाइयां नहीं मिल पा रही हैं।
उन्होंने दावा किया कि सरकार ने दवा और चिकित्सा उपकरणों की खरीद में 650 करोड़ रुपये का घोटाला किया है। उन्होंने कहा कि पार्टी पिछले तीन दिनों से अलग-अलग अस्पतालों के बाहर जनता को इस कथित घोटाले की जानकारी दे रही है और गुरुवार को बाबा साहब अंबेडकर अस्पताल के बाहर भी प्रदर्शन किया जाएगा।
'आप' नेता ने आरोप लगाया कि 100 करोड़ रुपए की दवाइयों की खरीद को 400 करोड़ रुपए दर्शाया गया, जिससे 300 करोड़ रुपए का कथित कमीशन लिया गया। इसके अलावा 10 लाख रुपए की एक्स-रे मशीन 33 लाख रुपए में खरीदी गई और 150 रुपए की चादर 450 रुपए में खरीदने का भी आरोप लगाया गया। उन्होंने दावा किया कि इन खरीद प्रक्रियाओं में भारी अनियमितताएं हुई हैं।
सौरभ भारद्वाज ने यह भी आरोप लगाया कि इस मामले के मुख्य आरोपी बताए जा रहे राजीव रंगीला को जांच शुरू होने से पहले ही देश से बाहर जर्मनी भेज दिया गया। उनका कहना था कि जब मुख्य आरोपी ही देश में नहीं है तो जांच निष्पक्ष कैसे हो सकती है। उन्होंने सरकार पर जांच के नाम पर जनता को गुमराह करने का आरोप भी लगाया।
वहीं, विधायक संजीव झा ने कहा कि सरकारी अस्पतालों की स्थिति बेहद खराब है। उन्होंने दावा किया कि जीटीबी अस्पताल में मरीजों को पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल रही हैं, बेड फटे हुए हैं और दवाइयों का अभाव है। उन्होंने कहा कि यदि भ्रष्टाचार के आरोप सही हैं तो संबंधित ठेकेदारों और जिम्मेदार अधिकारियों पर तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि एसीबी की एफआईआर दर्ज होने के बाद अब तक किसी बड़े आरोपी की गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई।
कोंडली विधायक कुलदीप कुमार ने भी सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि दवाओं और अन्य चिकित्सा सामग्री की खरीद बाजार मूल्य से कई गुना अधिक कीमत पर की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि विजिलेंस जांच लंबित होने के बावजूद डॉ. वत्सला अग्रवाल को डीजीएचएस का प्रमुख बनाया गया, जिसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
उन्होंने मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफे की मांग की। प्रदर्शन के दौरान 'आप' नेताओं ने केंद्रीय जांच एजेंसियों से भी मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। उनका कहना था कि यदि आरोप सही हैं तो पूरे मामले की सीबीआई और ईडी से जांच कराई जानी चाहिए ताकि कथित घोटाले की सच्चाई सामने आ सके।