भुज, 13 सितंबर (आईएएनएस)। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने रविवार को मैंग्रोव संरक्षण, पुनर्स्थापन और सतत प्रबंधन पर जोर देते हुए कहा कि तटीय जैव विविधता, मत्स्य संसाधनों और समुद्री तटों की सुरक्षा के लिए मैंग्रोव जैसे जीवंत पारिस्थितिकी तंत्र बेहद महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने वैज्ञानिक प्रबंधन, स्थानीय समुदायों की भागीदारी और तकनीक आधारित निगरानी की आवश्यकता पर बल दिया।
गुजरात के कच्छ जिले के भुज में आयोजित मैंग्रोव संरक्षण, पुनर्स्थापन और सतत प्रबंधन कार्यशाला को संबोधित करते हुए भूपेंद्र यादव ने कहा कि कच्छ की भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए क्षेत्र-विशिष्ट पुनर्स्थापन तकनीकों को अपनाया गया है। इसके साथ ही जैव विविधता संरक्षण, समुद्री शैवाल (सीवीड) की खेती और स्थानीय लोगों के लिए टिकाऊ आजीविका के अवसरों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
उन्होंने मिश्ती कार्यक्रम के तहत गुजरात में चल रहे मैंग्रोव संरक्षण कार्यों की समीक्षा करते हुए कहा कि राज्य ने इस दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की है। वर्ष 2023-27 के लक्ष्य 29,250 हेक्टेयर के मुकाबले अब तक 27,652 हेक्टेयर क्षेत्र में मैंग्रोव पुनर्स्थापन का कार्य किया जा चुका है। इसमें पारिस्थितिक रूप से चुनौतीपूर्ण कोरी क्रीक क्षेत्र के 12,450 हेक्टेयर क्षेत्र भी शामिल हैं।
इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री ने कच्छ मैंग्रोव कॉफी टेबल बुक, गुजरात मैंग्रोव एटलस का विमोचन किया और मैंग्रोव जीआईएस (एमजीआईएस) पोर्टल का शुभारंभ भी किया। उन्होंने कहा कि ये पहलें मैंग्रोव क्षेत्रों की वैज्ञानिक निगरानी और साक्ष्य आधारित निर्णय लेने की प्रक्रिया को और मजबूत करेंगी।
कार्यशाला को गुजरात सरकार के वन एवं पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री अर्जुन मोढवाडिया तथा उच्च एवं तकनीकी शिक्षा राज्य मंत्री त्रिकमभाई छांगा ने भी संबोधित किया। दोनों नेताओं ने मिश्ती कार्यक्रम के तहत मैंग्रोव संरक्षण और तटीय पारिस्थितिकी तंत्र के पुनर्स्थापन के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।
भूपेंद्र यादव ने इस दौरान गुनेरी इनलैंड मैंग्रोव विलेज बायोडायवर्सिटी मैनेजमेंट कमेटी को भी सम्मानित किया। उन्होंने समुदाय की अगुवाई में किए जा रहे संरक्षण प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि गुनेरी के आंतरिक मैंग्रोव तटीय क्षेत्र से दूर स्थित एक दुर्लभ पारिस्थितिकी तंत्र हैं। जनवरी 2025 में इसे गुजरात का पहला जैव विविधता विरासत स्थल (बायोडायवर्सिटी हेरिटेज साइट) घोषित किया गया था।
कार्यशाला में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और गुजरात वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा वैज्ञानिकों, पर्यावरण संरक्षण विशेषज्ञों तथा मैंग्रोव संरक्षण और तटीय आजीविका से जुड़े स्थानीय समुदायों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।