मुंबई, 8 जुलाई (आईएएनएस)। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने शिवसेना के एक कॉर्पोरेटर द्वारा महिला डॉक्टर के साथ कथित मारपीट, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तीन देशों की यात्रा, राम मंदिर चंदे से जुड़े विवाद और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के वक्फ संबंधी बयान पर तल्ख टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि कानून का पालन सभी के लिए समान होना चाहिए और किसी भी मामले में दोषियों के खिलाफ निष्पक्ष एवं कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
शिवसेना कॉर्पोरेटर पर महिला डॉक्टर के साथ कथित मारपीट के आरोपों पर वारिस पठान ने कहा कि सत्ता का अहंकार और दंभ लोगों को कानून अपने हाथ में लेने के लिए प्रेरित करता है। कुछ जनप्रतिनिधियों को यह विश्वास हो जाता है कि सत्ता में होने के कारण उनके खिलाफ कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं होगी। यदि अस्पताल में किसी प्रकार की शिकायत थी तो उसका समाधान कानूनी तरीके से किया जाना चाहिए था। पुलिस में शिकायत दर्ज कराई जा सकती थी, लेकिन अस्पताल में जाकर डॉक्टरों और नर्सों के साथ कथित मारपीट करना पूरी तरह अनुचित है। कोविड-19 महामारी के दौरान इन्हीं डॉक्टरों और नर्सों ने अपनी जान जोखिम में डालकर लोगों की सेवा की थी, ऐसे सम्मानित पेशे के लोगों के साथ इस तरह का व्यवहार स्वीकार्य नहीं हो सकता।
वारिस पठान ने सरकार से मांग की कि यदि इस मामले में एफआईआर दर्ज की गई है तो संबंधित आरोपी को तत्काल गिरफ्तार कर जेल भेजा जाए। यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो संबंधित कॉर्पोरेटर की सदस्यता समाप्त करने पर भी विचार किया जाना चाहिए। कानून का इस्तेमाल सभी नागरिकों के लिए समान रूप से होना चाहिए और किसी भी व्यक्ति के साथ धर्म या राजनीतिक पहचान के आधार पर अलग-अलग व्यवहार नहीं होना चाहिए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तीन देशों की यात्रा पर वारिस पठान ने कहा कि विदेश यात्राएं महत्वपूर्ण हैं और भारत के वैश्विक संबंधों को मजबूत करने के लिए आवश्यक भी हैं, लेकिन देश के भीतर उत्पन्न गंभीर मुद्दों पर भी सरकार को अपनी स्पष्ट प्रतिक्रिया देनी चाहिए। महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में भारी बारिश के कारण जनहानि हुई है और लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे समय में प्रधानमंत्री को इन मुद्दों पर भी संवेदना और चिंता व्यक्त करनी चाहिए।
राम मंदिर चंदे से जुड़े कथित विवाद का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इस मामले में भी सरकार को स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए। चूंकि राम मंदिर निर्माण को लेकर सरकार ने बड़ी उपलब्धि का दावा किया था, इसलिए मंदिर ट्रस्ट से जुड़े विवादों पर भी जवाबदेही तय होनी चाहिए। मंदिर ट्रस्ट से जुड़े विवाद और चंपत राय के बयान पर वारिस पठान ने कहा कि प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में कई कथित अनियमितताओं का उल्लेख सामने आने की बातें कही जा रही हैं। यदि जांच में किसी प्रकार की गड़बड़ी सामने आती है तो केवल इस्तीफा देने से जवाबदेही समाप्त नहीं हो जाती। पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यह पता लगाया जाना चाहिए कि कथित अनियमितताओं में कौन-कौन लोग शामिल थे।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रकार के विवाद करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े होते हैं और यदि किसी ने चंदे का दुरुपयोग किया है तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। दोषियों की पहचान कर कानून के अनुसार कार्रवाई करना आवश्यक है ताकि लोगों का विश्वास बना रहे।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस बयान पर, जिसमें उन्होंने कहा था कि विपक्ष चंदा चोरी के मुद्दे पर बोलता है लेकिन वक्फ के मामलों में चुप रहता है, वारिस पठान ने कहा कि राम मंदिर चंदा विवाद पर उठ रहे सवाल किसी आड़ में नहीं उठाए जा रहे हैं, बल्कि जांच और एफआईआर की प्रक्रिया पहले से चल रही है। यदि वक्फ से जुड़े किसी मामले में भी जांच की आवश्यकता है तो सरकार स्वतंत्र रूप से जांच कर सकती है और किसी ने उसे ऐसा करने से नहीं रोका है। किसी भी धार्मिक संस्था से जुड़े विवाद में दोषियों के खिलाफ बिना भेदभाव के कार्रवाई होनी चाहिए। यदि किसी ने श्रद्धालुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ किया है तो उसके खिलाफ कानून के तहत सख्त कार्रवाई होना आवश्यक है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि धार्मिक और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से ऊपर उठकर जांच एजेंसियों को निष्पक्ष तरीके से अपना काम करने दिया जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों को कानून के अनुसार दंड मिल सके।
--आईएएनएस
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