नई दिल्ली, 21 जून (आईएएनएस)। भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु रविवार को मध्य प्रदेश के जबलपुर में रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के 36वें दीक्षांत समारोह में शामिल हुईं। इस अवसर पर बोलते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षा किसी भी व्यक्ति या समुदाय के विकास का सबसे प्रभावी माध्यम है। इसलिए जनजातीय समुदाय के शैक्षिक विकास के लिए प्रयास करना बहुत महत्वपूर्ण है। हम सबको मिलकर यह प्रयास करना चाहिए कि जनजातीय युवाओं को आधुनिक विकास में भागीदारी करने का अवसर मिले और साथ ही, उनकी जनजातीय पहचान व अस्मिता अपने सहज रूप में बनी रहे। साथ ही, जनजातीय समुदाय के लोगों के पारम्परिक कौशल एवं ज्ञान को विभिन्न माध्यमों के जरिए प्रसारित भी करना चाहिए। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जैसे शिक्षण संस्थानों को इस संबंध में विशेष प्रयास करने चाहिए।
राष्ट्रपति ने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थान विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान करने के साथ-साथ नवाचार और अनुसंधान के प्रमुख केंद्र भी होते हैं। विद्यार्थियों में रचनात्मक सोच, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और उद्यमिता का विकास करना इन शिक्षण संस्थानों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। साथ ही, संस्थानों से यह अपेक्षा भी की जाती है कि वे विद्यार्थियों में भारतीय संस्कृति, परंपराओं और भाषाओं के प्रति गर्व के भाव को संचारित करें। आधुनिकता और परंपरा के समन्वय से देश का संतुलित विकास संभव होगा।
राष्ट्रपति ने कहा कि ऐसे अध्ययन एवं अनुसंधान पर बल देना चाहिए जो देश और समाज के लिए उपयोगी सिद्ध हों। पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तीकरण, वंचित वर्गों का विकास, स्वच्छता, सामाजिक समरसता आदि विषयों को अध्ययन एवं अनुसंधान में शामिल करने से समाज लाभान्वित होता है। ऐसे विषयों में अध्ययन और अनुसंधान से देश के विकास की योजनाएं बनाने में भी सहायता मिलती है।
राष्ट्रपति ने कहा कि आज पूरा विश्व तेजी से बदल रहा है। हमारी भाषा, रहन-सहन, जीवनशैली सब तेज गति से बदल रहे हैं। पर हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि हमारे कुछ मूल्य शाश्वत हैं जो हमें सदैव शक्ति प्रदान करते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को सलाह दी कि वे भारतीय संस्कृति के मूल्यों और आदर्शों को अपने जीवन का आधार बनाएं। उन्होंने कहा कि सत्य, अहिंसा, करुणा, सेवा और ईमानदारी जैसे मूल्य हर युग में मूल चेतना का हिस्सा रहे हैं। इन मूल्यों को अपनाकर वे कठिन परिस्थितियों का भी दृढ़ता से सामना कर सकते हैं, एक आदर्श नागरिक बन सकते हैं, राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
राष्ट्रपति ने छात्रों से कहा कि वे केवल अपने परिवार या विश्वविद्यालय के प्रतिनिधि नहीं हैं, बल्कि राष्ट्र की आकांक्षाओं और भविष्य के निर्माता हैं। उनके ज्ञान, ऊर्जा और संकल्प से ही विकसित भारत का सपना साकार होगा। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे अपनी शिक्षा और प्रतिभा का उपयोग केवल व्यक्तिगत सफलता के लिए नहीं, बल्कि समाज के व्यापक कल्याण के लिए करें। उन्होंने उन्हें सलाह दी कि वे अपने आसपास के वंचित और ग्रामीण समुदायों की समस्याओं को समझें। उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप समाधान विकसित करें, उन्हें सशक्त बनाएं और विकास की मुख्यधारा से जोड़ने में अपनी भूमिका निभाएं।
राष्ट्रपति ने कहा कि आज देश डिजिटल प्रौद्योगिकी, स्टार्टअप्स, हरित ऊर्जा, अंतरिक्ष अनुसंधान और आधुनिक अवसंरचना के क्षेत्रों में नई ऊंचाइयां प्राप्त कर रहा है। उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि वे इन अवसरों का लाभ उठाएं और वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाएं। परंतु इस प्रगति के साथ पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी को भी निभाइए। उन्होंने विद्यार्थियों को यह सलाह भी दी कि वे पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाएं। उन्होंने कहा कि जल, जंगल और जमीन का संरक्षण, स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग, जैव-विविधता की रक्षा तथा सतत विकास के लिए प्रतिबद्धता उनकी जीवन-यात्रा का अभिन्न हिस्सा होना चाहिए।