अहमदाबाद, 22 जुलाई (आईएएनएस)। गुजरात सरकार ने बुधवार को 80,000 से अधिक स्कूली शिक्षा छोड़ने वाले बच्चों को वापस कक्षाओं में लाने के लिए राज्यव्यापी अभियान शुरू किया। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य 'जीरो ड्रॉपआउट' हासिल करना और यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी बच्चा शिक्षा प्रणाली में पीछे न रह जाए।
मुख्यमंत्री पटेल ने अहमदाबाद से 'समरस विद्या सेतु' मेगा अभियान का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में गुजरात में स्कूली शिक्षा छोड़ने की दर घटकर दो प्रतिशत हो गई है। इस दौरान राज्य ने अब तक 80,000 से अधिक ऐसे बच्चों की पहचान की है, जिन्होंने स्कूल छोड़ दिया था।
सरकार की योजना उन्हें कक्षा 1 से 12 तक उनकी आयु के अनुसार कक्षाओं में पुनः दाखिला दिलाने और शैक्षणिक सहायता प्रदान करने की है ताकि वे सीखने की कमियों को दूर कर सकें।
पटेल ने कहा कि गुजरात भर में स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की जिलावार सूचियां तैयार कर ली गई हैं और शिक्षक, स्थानीय जन प्रतिनिधि और सामुदायिक नेता संयुक्त रूप से अभिभावकों से संपर्क करेंगे ताकि उन्हें अपने बच्चों को वापस स्कूल भेजने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे को उसकी उम्र के अनुसार उचित कक्षा में प्रवेश दिया जाएगा, जबकि पढ़ाई में पिछड़ चुके बच्चों के लिए विशेष शैक्षणिक सहायता और अंतरिम शिक्षा की व्यवस्था की गई है।
स्कूलों और परिवारों के बीच सहयोग की आवश्यकता पर जोर देते हुए पटेल ने कहा कि गुजरात व्यापार और रोजगार के लिए देश के प्रमुख केंद्रों में से एक बनकर उभरा है और युवाओं को इन अवसरों का लाभ उठाने के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा आवश्यक है।
उन्होंने अभिभावकों से नियमित रूप से स्कूल जाने को सुनिश्चित करने का आग्रह किया और कहा कि 'जीरो ड्रॉपआउट' का लक्ष्य केवल सरकार, अभिभावकों, शिक्षकों और समाज के संयुक्त प्रयासों से ही प्राप्त किया जा सकता है।
पटेल ने छात्रों को स्कूल छोड़ने से रोकने में शिक्षकों की भूमिका पर भी प्रकाश डाला और कहा कि वे उपस्थिति पर कड़ी निगरानी रखते हैं और आवश्यकता पड़ने पर व्यक्तिगत रूप से फॉलो-अप करते हैं।