सीएम धामी ने लोगों से चमोली में स्थित रुद्रनाथ के दर्शन करना का आग्रह किया, लोकपर्व जागड़ा की दी बधाई

सीएम धामी ने लोगों से चमोली में स्थित रुद्रनाथ के दर्शन करना का आग्रह किया, लोकपर्व जागड़ा की दी बधाई

देहरादून, 13 सितंबर (आईएएनएस)। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर चमोली जिले में स्थित पंचकेदार में से एक श्री रुद्रनाथ मंदिर को लेकर एक पोस्ट किया गया है।

सीएम धामी की ओर से सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा गया, "जनपद चमोली में स्थित पंचकेदार में एक श्री रुद्रनाथ मंदिर भगवान शिव को समर्पित एक पवित्र तीर्थ स्थल है, जहां उनके मुख स्वरूप की पूजा की जाती है। यह मंदिर न केवल अनेक श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है, बल्कि इसकी प्राकृतिक सुंदरता भी भक्तों को मंत्रमुग्ध कर देती है। चमोली की यात्रा के दौरान रुद्रनाथ के दर्शन अवश्य करें।"

इस वर्ष 18 मई को श्री रुद्रनाथ मंदिर के कपाट विधि-विधान से खोले गए थे। कपाट खुलने के साथ ही छह महीने तक भगवान की नियमित पूजा-अर्चना एवं धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। इसके बाद रुद्रनाथ के कपाट 17 अक्तूबर को शीतकाल के लिए बंद हो जाएंगे। पौराणिक मान्यता के अनुसार, पंच केदार मंदिरों का निर्माण पांडवों ने कराया था। इस मंदिर तक पहुंचने के लिए 20-22 किलोमीटर की पैदल दूरी तय करना पड़ता है।

बता दें कि हिमालय की गोद में स्थित प्रसिद्ध रुद्रनाथ मंदिर पंच केदार तीर्थयात्रा मार्ग पर स्थित यह चौथा महत्वपूर्ण मंदिर है। रुद्रनाथ मंदिर तक पहुंचना आसान नहीं है। नंदा देवी, त्रिशूल और नंदा घुंटी जैसी हिमालय की चोटियां रुद्रनाथ की सुंदरता में चार चांद लगा देती हैं। यहां भगवान शिव की 'नीलकंठ महादेव' के रूप में पूजा की जाती है। रुद्रनाथ मंदिर एक सुंदर अल्पाइन घास के मैदान में स्थित है और इसके साथ ही सूर्य कुंड, चंद्र कुंड, तारा कुंड, मानस कुंड, वैतरणी, बैतरणी और रुद्रगंगा जैसी कई पवित्र जलधाराएं भी यहां से बहती हैं। रुद्रनाथ मंदिर से नंदा घुंटी, हाथी पर्वत, नंदा देवी और त्रिशूल पर्वत चोटियों के दृश्य आसानी से देखे जा सकते हैं।

वहीं, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक और सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, "समस्त प्रदेशवासियों को महासू देवता की आराधना के पावन लोकपर्व जागड़ा की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। जनजातीय क्षेत्र जौनसार-बावर में मनाया जाने वाला यह पारंपरिक पर्व हमारी समृद्ध लोक संस्कृति, आस्था और सामाजिक एकता का प्रतीक है। जागड़ा पर्व हमारी प्राचीन परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को संजोने के साथ ही आने वाली पीढ़ियों तक अपनी संस्कृति को पहुंचाने का संदेश देता है। महासू देवता से प्रार्थना है कि सभी प्रदेशवासियों के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि एवं खुशहाली का संचार हो।"

--आईएएनएस

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