प्रिंस रहीम आगा खान-V ने गुजरात के सीएम भूपेंद्र पटेल से की मुलाकात, जमीनी स्तर पर विकास के लिए सहयोग पर चर्चा

प्रिंस रहीम आगा खान-V ने गुजरात के सीएम भूपेंद्र पटेल से की मुलाकात, जमीनी स्तर पर विकास के लिए सहयोग पर चर्चा

गांधीनगर, 12 सितंबर (आईएएनएस)। गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और आगा खान डेवलपमेंट नेटवर्क के चेयरमैन प्रिंस रहीम आगा खान V ने शनिवार को गांधीनगर में एक बैठक के दौरान कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की।

इन क्षेत्रों में जल संरक्षण, प्राकृतिक खेती, मोटे अनाज (मिलेट्स), सौर ऊर्जा, सहकारी समितियां और महिलाओं के नेतृत्व वाले उद्यम शामिल हैं।

शिया इस्माइली मुसलमानों के 50वें वंशानुगत इमाम और आगा खान डेवलपमेंट नेटवर्क (एकेडीएन) के चेयरमैन प्रिंस रहीम आगा खान V ने सीएम पटेल से शिष्टाचार भेंट की और टिकाऊ, समावेशी और जन-केंद्रित विकास के लिए जमीनी स्तर पर सहयोग के अवसरों पर चर्चा की।

सीएम पटेल ने गुजरात में प्रिंस रहीम का स्वागत करते हुए कहा कि टिकाऊ विकास, शिक्षा, कौशल विकास, उद्यम को बढ़ावा देने और वंचित व कमजोर समुदायों के सशक्तिकरण पर एकेडीएन का फोकस गुजरात के विकास के नजरिए के अनुरूप है।

चर्चा के मुख्य विषयों में जल संरक्षण भी शामिल था। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण और जल निकायों के पुनरुद्धार के लिए राज्य के प्रयासों पर प्रकाश डाला और कहा कि "जल संरक्षण पूरे गुजरात में एक जन-आंदोलन बन गया है।"

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने मोटे अनाज और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए राज्य की पहलों के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा, "गुजरात ने मोटे अनाज के उत्पादन, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन को बढ़ाने के लिए उपाय किए हैं।"

उन्होंने राज्य की 'मिलेट डेवलपमेंट स्कीम' (मोटे अनाज विकास योजना) पर भी प्रकाश डाला, जिसका उद्देश्य मोटे अनाज की खेती का विस्तार करना, इसके स्वास्थ्य लाभों के बारे में जागरूकता पैदा करना और किसानों को प्रसंस्करण के लिए प्रोत्साहित करना है।

सौर ऊर्जा और सोलर पंपों में सहयोग की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई। राज्य सरकार के अनुसार, गुजरात की स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता 34,880 मेगावाट तक पहुंच गई है।

'पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना' के तहत राज्य ने 10 लाख रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाने का लक्ष्य रखा है, जिनमें से अब तक 8.39 लाख से ज्‍यादा सिस्टम लगाए जा चुके हैं।

मुख्यमंत्री ने गुजरात के सहकारी क्षेत्र के बारे में भी बात की। राज्य में अभी 87,000 से ज्‍यादा सहकारी समितियां काम कर रही हैं। उन्होंने कहा, "'सहकार से समृद्धि' दृष्टिकोण के तहत सहकारी समितियों को और मजबूत करने के लिए पूरे देश में प्रयास किए जा रहे हैं।"

बातचीत में ग्रामीण समुदायों तक सहकारी व्यवस्था को पहुंचाने में प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (पीएसीएस) की भूमिका पर चर्चा हुई। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को और मजबूत करने और पीएसीएस को 'छोटी कॉर्पोरेट कंपनियों' के तौर पर विकसित करने की संभावनाओं पर भी विचार किया गया, जो गांव के स्तर पर कई तरह की सेवाएं दे सकें।

इस दौरान महिलाओं के सशक्तिकरण और उद्यमिता पर भी बातचीत हुई। मुख्यमंत्री पटेल ने राज्य में महिलाओं की आत्मनिर्भरता से जुड़े इकोसिस्टम का जिक्र किया, जिसके तहत हजारों महिलाओं को छोटे उद्योग शुरू करने और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के लिए जागरूकता और उद्यम विकास की ट्रेनिंग दी जाती है।

प्रिंस रहीम ने गुजरात सरकार के साथ जमीनी स्तर पर सहयोग को और मजबूत करने की इच्छा जताई, खासकर पानी के संरक्षण, प्राकृतिक खेती, मोटे अनाज (मिलेट) से बने खाद्य पदार्थों और महिलाओं के स्वयं-सहायता समूहों जैसे आपसी हित के क्षेत्रों में।

दोनों पक्षों ने टिकाऊ, समग्र और जन-केंद्रित विकास के लिए अपनी-अपनी खूबियों का इस्तेमाल करते हुए सहयोग को और गहरा करने के प्रति सकारात्मक रुख दिखाया।

प्रिंस रहीम ने पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन के असर को कम करने, शिक्षा, कौशल विकास, उद्यमिता और वंचित व कमजोर समुदायों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने से जुड़ी पहलों में योगदान दिया है। बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव (उद्योग विभाग) ममता वर्मा और मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव संजीव कुमार भी मौजूद थे।

--आईएएनएस

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