नई दिल्ली, 12 अगस्त (आईएएनएस)। समाजवादी पार्टी के सांसद रामजीलाल सुमन ने संसद के मानसून सत्र के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के 24 घंटे लगातार चर्चा के प्रस्ताव, एफसीआरए संशोधन बिल को संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास भेजे जाने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'हर घर तिरंगा' अभियान को लेकर की गई अपील पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने संसद मार्च के दौरान हुए तनाव और पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की ओर से संसद में 24 घंटे लगातार चर्चा के प्रस्ताव पर सपा सांसद रामजीलाल सुमन ने कहा कि मानसून सत्र शुरू होने के बाद से विपक्ष लगातार जंतर-मंतर पर हुई हिंसा और वहां हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाता रहा है। छात्रों पर आंसू गैस के गोले छोड़े गए और पैलेट गन का इस्तेमाल हुआ, इसलिए इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। विपक्ष लगातार मांग करता रहा है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इस मामले पर अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करें और संसद में बयान दें।
रामजीलाल सुमन ने आरोप लगाया कि सरकार अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि एक तरफ सरकार की ओर से कहा जाता है कि कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में स्थानीय प्रशासन और संबंधित मजिस्ट्रेट की भूमिका होती है, जबकि दूसरी ओर पुराने मामलों में अलग राजनीतिक मानदंड अपनाए गए थे।
विवादित ढांचे के विध्वंस के बाद की परिस्थितियों का जिक्र करते हुए उन्होंने उस समय की उत्तर प्रदेश के सरकार और मुलायम सिंह यादव को लेकर लगाए गए आरोपों की तुलना मौजूदा स्थिति से की। सुमन ने कहा कि सरकार को अलग-अलग परिस्थितियों में अलग-अलग मापदंड नहीं अपनाने चाहिए और जंतर-मंतर की घटना पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
एफसीआरए संशोधन बिल को संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजे जाने के फैसले पर भी रामजीलाल सुमन ने कहा कि यह केवल विपक्ष का सवाल नहीं था, बल्कि देशभर में इस मुद्दे को लेकर लोगों में असंतोष और चिंता थी। इस मुद्दे को लेकर समाज में विभाजन की स्थिति और लोगों में गुस्सा दिखाई दे रहा था। ऐसे में बिल को जेपीससी के पास भेजना उचित कदम है। मौजूदा परिस्थितियों में सरकार के पास इस विधेयक को व्यापक विचार-विमर्श के लिए समिति के पास भेजने के अलावा कोई बेहतर विकल्प नहीं था। उन्होंने उम्मीद जताई कि संयुक्त संसदीय समिति सभी पक्षों की राय सुनेगी और विधेयक के प्रावधानों पर विस्तार से विचार करेगी।
'हर घर तिरंगा' अभियान को लेकर रामजीलाल सुमन ने सवाल उठाया कि जिन लोगों का स्वतंत्रता आंदोलन से कोई संबंध नहीं रहा, वे आज तिरंगे और राष्ट्रवाद की बात क्यों कर रहे हैं। देश की आजादी के बाद लंबे समय तक नागपुर में तिरंगा नहीं फहराया गया और भगवा ध्वज को प्राथमिकता दी गई। संबंधित संगठन का राष्ट्रीय आंदोलन से कोई सीधा संबंध नहीं रहा और अब तिरंगे को लेकर किए जा रहे अभियानों को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
उन्होंने वंदे मातरम के मुद्दे पर कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान यह गीत राष्ट्रीय चेतना का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा, लेकिन इसके सभी छंदों को लेकर अलग-अलग समुदायों की अलग-अलग धारणाएं रही हैं। उन्होंने कहा कि संविधान सभा के दौर में इस बात पर विचार किया गया था कि ऐसे अंशों को ही सार्वजनिक रूप से गाया जाए जिन पर व्यापक सहमति हो। गीत के कुछ हिस्सों को लेकर धार्मिक मान्यताओं से जुड़े मतभेद थे, इसलिए सभी समुदायों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए संतुलित दृष्टिकोण अपनाया गया।
सुमन ने महात्मा गांधी का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान गांधी ने विभिन्न समुदायों और विचारधाराओं के लोगों को एक साथ लाने का प्रयास किया था। उनके मुताबिक, उस दौर में कोशिश की गई कि किसी भी समुदाय की धार्मिक या सामाजिक भावनाओं को ठेस न पहुंचे। सपा सांसद ने आरोप लगाया कि मौजूदा समय में धार्मिक और सांस्कृतिक मुद्दों के जरिए समाज में तनाव पैदा करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि हिंदू-मुसलमान के मुद्दे के अलावा सरकार के पास कोई दूसरा कार्यक्रम नहीं है।
--आईएएनएस
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