मानसून सत्र में हंगामे पर भाजपा का विपक्ष पर हमला, चर्चा से भागने का लगाया आरोप

मानसून सत्र में हंगामे पर भाजपा का विपक्ष पर हमला, चर्चा से भागने का लगाया आरोप

नई दिल्ली, 5 अगस्त (आईएएनएस)। मानसून सत्र में हंगामे के बीच भाजपा सांसदों ने विपक्ष पर सदन की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया। पार्टी नेताओं ने कहा कि विपक्ष चर्चा से भाग रहा है और बेतुकी मांगें रखकर सदन को चलने नहीं दे रहा।

भाजपा सांसद कमलजीत सहरावत ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "जब से मानसून सत्र शुरू हुआ है, सभी विपक्षी पार्टियां मिलकर हंगामा कर रही हैं और सदन में बिलों पर कोई चर्चा नहीं हुई है। यह बहुत चिंता की बात है क्योंकि हमारे चुनाव क्षेत्रों के लोगों को हमसे उम्मीदें हैं। जनता के मुद्दे उठाने के लिए सांसद दिल्ली आए हैं, लेकिन विपक्ष हर दिन नारेबाजी कर समय बर्बाद कर रहा है।"

भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने विपक्षी सांसदों पर निशाना साधते हुए कहा, "करीब 133 सदस्य 410 से ज्यादा सांसदों के अधिकारों का उल्लंघन कर रहे हैं। हम अपने संसदीय क्षेत्रों से जुड़े मुद्दे उठाना चाहते हैं ताकि मंत्री उन्हें सुन सकें। लेकिन वे रोज आते हैं, एक-दो मुद्दों पर हंगामा करते हैं, और जब उनसे उन पर चर्चा करने के लिए कहा जाता है, तो वे तैयार नहीं होते। चर्चा से भागना लोकतंत्र की भावना के खिलाफ है।"

भाजपा सांसद बसवराज बोम्मई ने भी विपक्ष की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, "विपक्ष अपनी जिम्मेदारी निभाने में नाकाम रहा है। उन्होंने नीट का मुद्दा उठाया, जिस पर तीन दिन तक चर्चा हुई और सरकार ने हर बात का, पॉइंट-दर-पॉइंट जवाब दिया, जिसमें पुलिसिंग से जुड़े मुद्दे भी शामिल थे। हर सवाल का जवाब दिया गया, लेकिन वे बार-बार अपनी मांगें बदलते रहते हैं। एक दिन वे जवाब मांगते हैं, तो अगले दिन जिद करते हैं कि गृह मंत्री ही जवाब दें। वे अपनी शर्तें थोपना और बेतुकी मांगें रखना चाहते हैं, जो सही नहीं है और विपक्ष को शोभा नहीं देता। उनके पास कोई असली मुद्दा नहीं है। वे सिर्फ राजनीति की कोशिश कर रहे हैं।"

भाजपा सांसद नरेश बंसल ने कहा, "छात्रों के विरोध-प्रदर्शन की बात करें तो उन्होंने अपनी मांगों को लेकर भूख हड़ताल की होगी। उनकी मांगें पारदर्शिता और नौकरियों की बिक्री के आरोपों से जुड़ी थीं और वे चाहते थे कि सरकार इन मुद्दों पर ध्यान दे। हो सकता है कि सरकार के साथ उनकी कुछ बातचीत हुई हो। मैं पक्के तौर पर नहीं कह सकता। अगर उन्होंने अपना विरोध-प्रदर्शन खत्म कर दिया है, तो मुझे लगता है कि यह अच्छी बात है।"

भाजपा सांसद सतीश पूनिया ने कांग्रेस पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "कांग्रेस पार्टी के दोहरे रवैये की वजह से ही उसका पतन हो रहा है। एक तरफ तो वह संविधान और लोकतंत्र की बात करती है, लेकिन दूसरी तरफ लोकतांत्रिक संस्थाओं का सम्मान नहीं करती। अगर वह सच में लोकतंत्र का सम्मान करती, तो सदन में बनी रहती और बहस-चर्चा के जरिए अपनी बात रखती। लेकिन, कांग्रेस बहस से भागती है, क्योंकि उसके पास अपनी बात के बचाव के लिए कोई तर्क नहीं होता।"

सतीश पूनिया ने कहा, "प्रधानमंत्री से मिलना हमेशा एक सुखद अनुभव होता है। उनके पास गुजरात और देश का इतना व्यापक अनुभव है, जिससे संसदीय लोकतंत्र का कोई भी बड़ा नेता सीख सकता है। उन्होंने अपना वह व्यापक अनुभव साझा किया: संसद में कैसा व्यवहार करना चाहिए, कैसे जिज्ञासु होना चाहिए और जमीनी स्तर पर लोगों से कैसे जुड़े रहना चाहिए।"

यूपी के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के बयान पर केंद्रीय राज्य मंत्री एस.पी. सिंह बघेल ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, "सभी आतंकवादी मदरसों से नहीं आते, लेकिन पकड़े गए ज्यादातर आतंकवादियों ने मदरसों में ही शिक्षा ली थी।"

बिहार के बांकीपुर उपचुनाव के नतीजों पर भाजपा सांसद प्रदीप कुमार सिंह ने कहा, "सबसे अहम बात यह है कि यह उपचुनाव था, और उपचुनाव के नतीजों से सरकार बनने या गिरने का फैसला नहीं होता। लोग यह बात समझते हैं। बस आठ महीने पहले ही बिहार विधानसभा चुनाव हुए थे, और प्रशांत किशोर की पार्टी अपना खाता भी नहीं खोल पाई थी।"

इस बीच केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती के खिलाफ लगे आरोपों पर कहा, "मेरा मानना है कि महबूबा मुफ्ती जम्मू-कश्मीर की नेता हैं और वह हमारे साथ सांसद भी रही हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने राष्ट्रीय ध्वज को गलत तरीके से पकड़ा था। हालांकि, इस बात की जांच करनी होगी कि उन्होंने ऐसा जानबूझकर किया या नहीं।"

--आईएएनएस

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