पुणे, 13 सितंबर (आईएएनएस)। महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) और राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं को ज्यादा पारदर्शी, सुरक्षित, स्थिर और उम्मीदवार-केंद्रित बनाने के लिए, राज्य सरकार की ओर से बनाई गई भर्ती परीक्षा से जुड़ी हाई-लेवल टास्कफोर्स ने छात्रों, शिक्षकों, अभिभावकों और अहम लोगों के साथ विस्तार से बातचीत की।
इस चर्चा में कई अहम मुद्दों पर बात हुई, जैसे परीक्षा का टाइम-टेबल, प्रश्न-पत्र की क्वालिटी, पेपर लीक रोकना, खाली पदों की घोषणा, आंसर-की, परीक्षा केंद्र की व्यवस्था, शिकायतों का समाधान और उम्मीदवारों के 'ऑप्ट-आउट' (परीक्षा से हटने) की पॉलिसी।
यह टास्क फोर्स जनरल एडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट की एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (सर्विसेज) वी. राधा की अध्यक्षता में काम करती है।
इस हाई-लेवल कमेटी में डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस सदानंद दाते; इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी और एआई सेक्रेटरी वीरेंद्र सिंह; पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन सेक्रेटरी एन. रामास्वामी; नासिक डिविजनल कमिश्नर प्रवीण गेदाम; एयर मार्शल अजीत शंकरराव भोसले (रिटायर्ड, यूपीएससी के पूर्व सदस्य); और आईआईटी बॉम्बे के श्यामप्रसाद करगुडे शामिल हैं।
राज्य सरकार ने एमपीएससी परीक्षा के पेपर लीक होने और उम्मीदवारों के विरोध-प्रदर्शन (जिसमें पारदर्शिता और एमपीएससी चेयरमैन विवेक भीमन्वार के इस्तीफे की मांग की जा रही थी) के बीच यह टास्क फोर्स बनाई।
एमपीएससी उम्मीदवारों ने टास्क फोर्स से सालाना परीक्षा कैलेंडर जारी करने और उसका सख्ती से पालन करने की अपील की। उन्होंने बार-बार पॉलिसी बदलने के बजाय लंबे समय तक प्रक्रिया में स्थिरता बनाए रखने पर जोर दिया।
अलग-अलग कैडर के लिए कम से कम खाली पदों की संख्या पहले से घोषित करने की भी पुरजोर सिफारिश की गई।
टास्क फोर्स की चेयरपर्सन वी. राधा ने घोषणा की कि अगले साल प्रतियोगी परीक्षाएं ऑनलाइन नहीं होंगी। इसके बजाय, ये परीक्षाएं ऑप्टिकल मार्क रिकग्निशन (ओएमआर) शीट पैटर्न पर होंगी, जिसके लिए अभी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग गाइडलाइंस तैयार की जा रही हैं।
पेपर लीक न होने वाला माहौल बनाने के लिए, कमेटी प्रश्न बनाने, प्रिंटिंग, ट्रांसपोर्ट और वितरण में एडवांस्ड टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने की योजना बना रही है।
टास्क फोर्स एक एन्क्रिप्टेड 'ई-क्वेश्चन बैंक' सिस्टम पर विचार कर रही है, जिसमें प्रश्न बनाने वालों को भी यह पता नहीं चलेगा कि उनके प्रश्न किस परीक्षा में आएंगे।
छात्रों ने प्रश्न-पत्रों और आंसर-की में गलतियों को खत्म करने के लिए सख्त क्वालिटी जांच की मांग की। साथ ही, उन्होंने मूल्यांकन के स्टैंडर्ड तरीके और आंसर स्क्रिप्ट की जांच के लिए रिव्यूअर ऑडिट की भी मांग की।
स्टेकहोल्डर्स ने उम्मीदवारों के सवालों और आपत्तियों के लिए एक ही ऑनलाइन पोर्टल, और राज्य की सभी परीक्षाओं के लिए वन-टाइम रजिस्ट्रेशन और फीस पेमेंट के लिए सिंगल-विंडो सिस्टम की मांग की।
परीक्षा केंद्रों पर साफ-सुथरे टॉयलेट, पीने का पानी और बैठने की सही व्यवस्था जैसी बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
भाग लेने वालों ने सिलेक्शन के बाद उम्मीदवारों के 'ऑप्ट-आउट' (परीक्षा से हटने) पर स्पष्ट पॉलिसी की वकालत की, ताकि जब कोई उम्मीदवार कई पदों के लिए क्वालिफाई करे तो सीट बर्बाद न हो। साथ ही, विकलांगता और स्पोर्ट्स कोटा सर्टिफिकेट के समय पर वेरिफिकेशन की भी मांग की गई। टास्कफ़ोर्स देश भर के पब्लिक सर्विस कमीशन के कामकाज के तरीकों का अध्ययन कर रही है, खासकर तमिलनाडु, गुजरात और यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (यूपीएससी) के सिस्टम का विश्लेषण कर रही है, ताकि महाराष्ट्र के लिए सबसे अच्छे और सफल तरीकों को अपनाया जा सके।
एमपीएससी पर बढ़ते काम के बोझ को देखते हुए, अधिकारियों ने कमीशन के प्रशासनिक कर्मचारियों, तकनीकी क्षमताओं और संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया।
पुलिस महानिदेशक सदानंद दाते ने कहा, "हमारा मकसद राज्य के लिए अधिकारियों के चयन की एक तेज, अधिक पारदर्शी और जवाबदेह प्रक्रिया बनाना है।"
इस चर्चा के दौरान डिविजनल कमिश्नर शीतल तेली-उगाले, डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर जितेंद्र दूदी, एडिशनल डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर सतीश राउत और रेजिडेंट डिप्टी कलेक्टर ज्योति कदम जैसे वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।
--आईएएनएस
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