फेमा और आरबीआई नियमों के उल्लंघन मामले में ईडी का एक्शन, दिल्ली समेत तीन शहरों में कई ठिकानों पर तलाशी

फेमा और आरबीआई नियमों के उल्लंघन मामले में ईडी का एक्शन, दिल्ली समेत तीन शहरों में कई ठिकानों पर तलाशी

देहरादून, 8 जुलाई (आईएएनएस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के देहरादून सब-जोनल ऑफिस ने फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (एफईएमए), 1999 और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के मास्टर निर्देशों, जो मनी एक्सचेंज गतिविधियों को नियंत्रित करते हैं, के कथित उल्लंघन से जुड़े एक मामले में ऋषिकेश, दिल्ली और देहरादून में कई जगहों पर तलाशी अभियान चलाया।

इस मामले को लेकर ईडी को जानकारी मिली थी कि कुछ लाइसेंस प्राप्त 'फुल-फ्लेज्ड मनी चेंजर्स' (एफएफएमसी), उनके फ्रेंचाइजी और उनसे जुड़ी संस्थाएं फेमा और आरबीआई के मास्टर निर्देशों के तहत तय नियमों का उल्लंघन करके अनधिकृत विदेशी मुद्रा लेनदेन में शामिल थीं।

आरोप था कि विदेशी मुद्रा का आदान-प्रदान लाइसेंस प्राप्त ढांचे के बाहर किया जा रहा था, जिसमें अनिवार्य 'नो योर कस्टमर' (केवाईसी) आवश्यकताओं, तय दस्तावेजीकरण और इनवॉइसिंग प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया जा रहा था।

ईडी की ओर से यह तलाशी अभियान गंगा फॉरेक्स प्राइवेट लिमिटेड, जेपीजेएन फाइनेंशियल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड, अल्पाइन फॉरेक्स प्राइवेट लिमिटेड, और जय जीन फॉरेक्स प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ी व्यावसायिक संस्थाओं (जैसे जेपीजेएन - जेम्स यूनिट और विंटेज इंडिया) और इन संस्थाओं को चलाने वाले तथा अनधिकृत विदेशी मुद्रा लेनदेन में शामिल होने के संदेह वाले मुख्य व्यक्तियों के आवासीय परिसरों में चलाया गया।

तलाशी अभियान के दौरान कई देशों/क्षेत्रों (यूएसडी, यूरो, एयूडी, थाईएचबी आदि) की बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा प्राप्त हुई, जो मंगलवार की विनिमय दरों के अनुसार 54.58 लाख रुपए मूल्य की है। 33.98 लाख रुपए मूल्य की बिना हिसाब-किताब वाली भारतीय मुद्रा, आपत्तिजनक दस्तावेज, मोबाइल फोन और विदेशी मुद्रा लेनदेन से संबंधित अन्य रिकॉर्ड बरामद और जब्त किए गए।

ईडी की ओर से जब्त किए गए दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की जांच की जा रही है, ताकि कथित उल्लंघनों की पूरी सीमा का पता लगाया जा सके। तलाशी के दौरान इकट्ठा किए गए सबूतों से संस्थाओं और व्यक्तियों के एक ऐसे नेटवर्क का पता चला है, जो घरेलू सहयोगियों और विदेशी संपर्कों के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय हवाला लेनदेन को सुविधाजनक बना रहा था।

इसके अलावा, कुछ परिसरों में तलाशी की कार्यवाही के दौरान, रिकॉर्ड किए गए बैलेंस की तुलना में विदेशी मुद्रा के भौतिक स्टॉक में कमी/अधिकता पाई गई। ये अंदर पहली नजर में यह बताती हैं कि अकाउंट की किताबें और स्टॉक रजिस्टर कंपनियों द्वारा किए गए असल विदेशी मुद्रा लेन-देन के हिसाब से नहीं रखे जा रहे थे।

बिना हिसाब-किताब वाली नकदी और विदेशी मुद्रा की मौजूदगी से पता चलता है कि तय नियमों का उल्लंघन करते हुए अकाउंट की नियमित किताबों से बाहर बिना मंजूरी वाले विदेशी मुद्रा लेन-देन किए गए हो सकते हैं।

ईडी को फ्रेंचाइजी के बिजनेस ठिकानों पर तलाशी के दौरान, कोई खरीद रजिस्टर, ग्राहक-वार रिकॉर्ड, केवाईसी दस्तावेज, नकदीकरण प्रमाणपत्र या विदेशी मुद्रा की खरीद से जुड़े अन्य रिकॉर्ड नहीं मिले।

बता दें कि आरबीआई के मनी चेंजिंग गतिविधियों से जुड़े मास्टर निर्देशों के अनुसार, एक फ्रेंचाइजी को केवल अपने फ्रेंचाइजी की ओर से विदेशी मुद्रा खरीदने की अनुमति है। हालांकि, उसे ऐसे लेन-देन का रिकॉर्ड रखना जरूरी है।

वहीं, ईडी की ओर से पूरे वित्तीय लेन-देन के रास्ते का पता लगाने, इसमें शामिल सभी लोगों और कंपनियों की भूमिका जानने, लेन-देन से फायदा उठाने वालों की पहचान करने और फेमा, 1999 तथा अन्य लागू कानूनों के प्रावधानों के तहत उल्लंघनों की जांच करने के लिए आगे की जांच ​​जारी है।

--आईएएनएस

डीके/डीकेपी