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एफसीआरए बिल जेपीसी को भेजने पर संसद में टकराव, सरकार ने कहा- व्यापक चर्चा होगी, विपक्ष ने उठाए सवाल

एफसीआरए

नई दिल्ली, 12 अगस्त (आईएएनएस)। लोकसभा में विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) बिल को संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास भेजे जाने के फैसले पर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं। सरकार ने कहा कि व्यापक चर्चा के लिए बिल जेपीसी को भेजा गया है, वहीं विपक्ष ने इसे जल्दबाजी और निशाना साधने वाला कदम बताया।

भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने कहा, "एफसीआरए एक अहम बिल है। जाहिर है इसे जेपीसी के पास भेजा गया है। इस पर व्यापक बातचीत हो सके और संबंधित लोगों की राय ली जा सके। मुझे यकीन है कि जेपीसी की प्रक्रिया से यह बिल और भी मजबूत और बेहतर बनेगा, क्योंकि इसमें संबंधित लोगों से बातचीत होगी, ज्यादा आम सहमति बनेगी और बिल को और व्यापक बनाने के लिए विशेषज्ञों से भी सलाह ली जाएगी।"

कांग्रेस सांसद केसी. वेणुगोपाल ने सरकार पर प्रक्रिया में पारदर्शिता न रखने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "यह बिल आखिरी समय में लाया गया है, गुरुवार को सत्र खत्म होने वाला है। बुधवार दोपहर 12 बजे हमें लोकसभा सचिवालय से संदेश मिला कि अमित शाह यह बिल पेश कर रहे हैं। लेकिन अमित शाह आज मौजूद भी नहीं हैं। राज्य मंत्री ने इसे जेपीसी को भेजने का प्रस्ताव रखा। हंगामे के बीच बिल को जेपीसी को भेज रहे हैं।"

टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा, "एफसीआरए बिल का सभी विपक्षी पार्टियां एकमत होकर विरोध कर रही हैं। यह बिल इसलिए लाया गया है ताकि भाजपा यह पक्का कर सके कि सारी फंडिंग सिर्फ आरएसएस को ही मिले। आरएसएस को एक एनजीओ माना जाता है, लेकिन यह रजिस्टर्ड नहीं है। आरएसएस के पास दिल्ली के हर जिले में हजारों करोड़ की प्रॉपर्टी है। इसका कोई ऑडिट नहीं होता। इसकी कोई जांच-पड़ताल नहीं होती।"

महुआ मोइत्रा ने आगे आरोप लगाया, "एफसीआरए का मकसद हर एनजीओ और हर चैरिटेबल ऑर्गनाइजेशन की फंडिंग रोकना है, खासकर उन संगठनों की जो अलग-अलग धर्मों, जैसे ईसाई या मुस्लिम धर्म से जुड़े हैं। जो भी संगठन आरएसएस से जुड़ा नहीं है, उसकी फंडिंग रोक दी जाएगी।"

बीजद सांसद सस्मित पात्रा ने सरकार के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा, "मैं सरकार के एफसीआरए बिल को संयुक्त संसदीय समिति को भेजने के फैसले का स्वागत करता हूं। दो दिन पहले, मैंने मांग की थी कि एफसीआरए बिल की खूबियों की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति ही सही मंच है। ईसाई समुदाय और अल्पसंख्यक समुदायों ने एफसीआरए बिल को जल्दबाजी में पास करने को लेकर चिंता जताई थी, और इसलिए, संयुक्त संसदीय समिति की लगातार मांग की जा रही थी।"

--आईएएनएस

एससीएच/एबीएम