लखनऊ, 12 सितंबर (आईएएनएस)। ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना यासूब अब्बास का मानना है कि नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन से भारत तमाम देशों को साथ लेकर एक नई ताकत बनकर उभरेगा।
लखनऊ में आईएएनएस से बातचीत के दौरान मौलाना यासूब अब्बास ने कहा कि ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन और पीएम मोदी की मुलाकात की तस्वीर से यह संदेश जाएगा कि ब्रिक्स सम्मेलन समाप्त नहीं होगा, बल्कि अमेरिका और इजरायल की चौधराहट और दादागिरी खत्म होगी। भारत तमाम देशों को साथ लेकर एक नई ताकत बनकर उभरेगा। हम दुआ करेंगे कि भारत और ईरान के संबंध और मजबूत हों। ईरान के लोग हिन्दुस्तानी लोगों से बहुत प्यार करते हैं। मैं बचपन से ईरान की यात्रा कर रहा हूं। एक खास बात यह है कि वहां कभी भी किसी भी भारतीय को कोई दिक्कत महसूस नहीं हुई।
उन्होंने कहा कि बहुत अच्छा लगता है जब हिंदुस्तान और ईरान के संबंधों की बात होती है। मैं ईरान में विभिन्न स्थानों पर जाता रहता हूं चाहे तेहरान हो, मशहद हो, इस्फहान हो, नैशापुर हो या किरमानशाह हो। इस तरह से मैं उनके खुसरवी बॉर्डर और कसर-ए-शीरीन/कजाची बॉर्डर से कई बार गुजरा हूं। ईरान के लोग हिंदुस्तानियों से बहुत मोहब्बत करते हैं।
इसी बीच, सहारनपुर मस्जिद को लेकर यासूब अब्बास ने कहा कि यह बड़े अफसोस की बात है कि जिस तरीके से सहारनपुर में कलेक्ट्रेट की दीवार से लगी मस्जिद गिरा दी गई। तकरीबन 18वीं शताब्दी की यह मस्जिद थी, उसके अंदर से कुआं भी निकला। पहले मस्जिदों में कुएं ही हुआ करते थे, हैंडपंप या पानी की अन्य व्यवस्थाएं नहीं होती थीं। सलमान खुर्शीद ने जो बयान दिया, उस पर क्या कहें। सलमान खुर्शीद से मेरे अच्छे संबंध हैं, अभी मेरे साथ ही एक फ्लाइट से वे ईरान गए थे। सलमान खुर्शीद साहब के बारे में अगर मैं कहूंगा तो बहुत ज्यादा हो जाएगा कि रमजान के महीने में जब वे मंत्री थे, तब लाइव चैनल चल रहे थे और वे मुसलमान होते हुए भी काजू खा रहे थे। जब कोई आदमी रोजे का एहतराम नहीं कर रहा है, तो वह मस्जिद का क्या एहतराम करेगा?
अब्बास ने कहा कि मस्जिद अल्लाह का घर है, चाहे कागज हो या न हो, भारत में कितनी चीजों का कागज है। 1947 के पहले की इबादतगाहों की हालत वैसी रहेगी, यह जानकारी सभी को है, लेकिन मस्जिद तोड़ दी गई। कांग्रेस, राहुल गांधी को खुलकर इस मुद्दे पर बात करनी चाहिए। मंदिर हो या मस्जिद इन पर सियासत नहीं होनी चाहिए। लेकिन, सियासत करने वाले लोग इसमें भी वोट बैंक तलाश रहे हैं। आस्था के केंद्रों से सियासत नहीं होनी चाहिए।
वहीं, कश्मीर के शिया धर्मगुरु आगा सैयद हसन मुसावी ने ईरान के राष्ट्रपति का जिक्र करते हुए कहा कि राष्ट्रपति डॉ. पेजेश्कियन के साथ बातचीत के दौरान, भारत के सभी धर्मों के विद्वानों, बुद्धिजीवियों, कारोबारी समुदाय के सदस्यों और प्रमुख हस्तियों ने हिस्सा लिया। सभी ने एकमत होकर ईरान के खिलाफ अमेरिका द्वारा किए गए अन्याय और बर्बरता की निंदा की। सभी ने वहां शहीद हुए बच्चों और सर्वोच्च नेता की शहादत पर दुख जताया और ईरान के साथ एकजुटता दिखाई। भारत और ईरान के संबंध वर्षों पुराने हैं और आगे भी इसे मजबूत ही रहना चाहिए।