नई दिल्ली, 12 सितंबर (आईएएनएस)। बहरीन के विदेश मंत्री अब्दुल्लातिफ बिन राशिद अल जायानी शनिवार को 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए नई दिल्ली पहुंचे। विदेश मंत्रालय में खाड़ी मामलों के अतिरिक्त सचिव असीम महाजन ने हवाई अड्डे पर उनका स्वागत किया।
विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा, "बहरीन के विदेश मंत्री और वर्तमान में खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के अध्यक्ष डॉ. अब्दुल्लातिफ बिन राशिद अल जायानी का 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए नई दिल्ली पहुंचने पर हार्दिक स्वागत है। उनकी यात्रा से भारत-जीसीसी सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।"
भारत शनिवार से नई दिल्ली के भारत मंडपम में दो दिवसीय 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। इसमें सदस्य और साझेदार देशों के नेताओं के साथ-साथ आउटरीच के लिए आमंत्रित देशों के प्रतिनिधि भी हिस्सा ले रहे हैं।
भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता की थीम लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘ह्यूमैनिटी फर्स्ट’ की भावना पर आधारित जन-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाती है।
ब्रिक्स में ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। इसके साझेदार देशों में बेलारूस, क्यूबा, बोलीविया, कजाकिस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम शामिल हैं।
इससे पहले शनिवार को ब्रिक्स सदस्य देशों के नेताओं ने भारत मंडपम में ‘समावेशी वैश्विक शासन और बहुपक्षवाद को मजबूत करने’ विषय पर आयोजित सत्र में हिस्सा लिया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान ‘नई दिल्ली घोषणा 2026’ को सर्वसम्मति से अपनाए जाने की घोषणा की। इसके साथ ही ब्रिक्स के 20 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में दो डाक टिकट भी जारी किए गए।
सत्र के समापन संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि नई दिल्ली घोषणा साझा संकल्प को स्पष्ट दिशा देती है और अब इन प्रस्तावों को ठोस परिणामों में बदलने की जिम्मेदारी सभी देशों की है।
उन्होंने कहा कि ब्रिक्स नेताओं के बीच चर्चा में महत्वपूर्ण क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों के साथ-साथ ब्रिक्स सहयोग को और मजबूत करने की प्राथमिकताओं पर विचार-विमर्श हुआ। प्रधानमंत्री ने चर्चाओं को सार्थक और रचनात्मक बताया।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि बदलती विश्व व्यवस्था को पुरानी संस्थाओं के जरिए नहीं संभाला जा सकता। उन्होंने प्रतिनिधित्व, जवाबदेही और नियम बनाने की व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि ग्लोबल साउथ की भविष्य की तकनीकों और उनसे जुड़े नियमों के निर्माण में समान भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी के साथ रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी, अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन, इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद अली और ब्राजील के विदेश मंत्री माउरो विएरा ने नई दिल्ली में पौधारोपण कार्यक्रम में हिस्सा लिया।