नई दिल्ली, 21 जून (आईएएनएस)। एक रिपोर्ट के मुताबिक, अफ्रीका के कुछ देशों में फैले इबोला वायरस के कारण चौथा भारत-अफ्रीका फोरम शिखर सम्मेलन स्थगित कर दिया गया। इस स्थिति ने यह दिखाया कि अफ्रीका की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों, खासकर वैक्सीन बनाने और उनके उत्पादन के क्षेत्र में, को पूरा करने में भारत की भूमिका लगातार बढ़ रही है।
आईओएल के एक विश्लेषण के अनुसार, समिट को टालने से अफ्रीका में बंडिबुग्यो इबोला वायरस के प्रकोप (जो डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो और युगांडा में देखा गया था) से निपटने में मदद करने के लिए भारत की तेज कोशिशों पर ध्यान गया है।
भारत-अफ्रीका फोरम समिट, जो मूल रूप से 28-31 मई के बीच यहां होने वाली थी, को अफ्रीका में बदलती पब्लिक हेल्थ स्थिति को लेकर चिंताओं के बीच भारत और अफ्रीकी संघ के बीच बातचीत के बाद टाल दिया गया था।
भारत की भूमिका सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) की कोशिशों पर केंद्रित है, जिसमें कोएलिशन फॉर एपिडेमिक प्रिपेयर्डनेस इनोवेशन (सीईपीआई) और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी शामिल हैं, ताकि इबोला के बंडिबुग्यो स्ट्रेन के खिलाफ वैक्सीन के डेवलपमेंट को तेज किया जा सके।
रिपोर्ट में बताया गया है कि एसआईआई अपने साबित हो चुके चाडऑक्स1 वैक्सीन प्लेटफॉर्म, जिसका इस्तेमाल कोविड-19 महामारी के दौरान बड़े पैमाने पर किया गया था, का इस्तेमाल क्लिनिकल-ग्रेड डोज को तेजी से तैयार करने के लिए कर रहा है, जो कुछ ही महीनों में ट्रायल के लिए तैयार हो सकती हैं।
इसमें कहा गया है कि भारत का यह कदम कोविड-19 संकट के दौरान उसकी भूमिका की याद दिलाता है, जब देश, कई अफ्रीकी देशों सहित, विकासशील देशों को सस्ती वैक्सीन का एक बड़ा सप्लायर बनकर उभरा था।
इसने मानवीय सहायता के जरिए अफ्रीका के साथ भारत के व्यापक जुड़ाव पर भी प्रकाश डाला, जिसमें खाद्य असुरक्षा और विस्थापन की चुनौतियों का सामना कर रहे देशों के लिए हाल की खाद्य सहायता पहल शामिल हैं।
हालांकि, अफ्रीकी संघ और अफ्रीका सेंटर्स फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (अफ्रीका सीडीसी) जैसे अफ्रीकी संस्थान इबोला के प्रकोप से निपटने के लिए महाद्वीप के प्रयासों में तालमेल बिठा रहे हैं, लेकिन रिपोर्ट में यह भी देखा गया कि वैक्सीन रिसर्च और बड़े पैमाने पर मैन्युफैक्चरिंग की क्षमताएं अभी भी बाहरी भागीदारों पर बहुत ज्यादा निर्भर हैं।
इसके अलावा, टली हुई समिट ने पूरे महाद्वीप में लंबे समय की हेल्थ सिक्योरिटी को मबूत करने के लिए अफ्रीका के अपने बायोटेक्नोलॉजी और वैक्सीन मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम में ज्यादा निवेश की जरूरत पर जोर दिया है।