रोहित टोकस: चुभी स्कूल में सहपाठी से मिली हार, इंजरी भी नहीं तोड़ सकी हौसला, कॉमनवेल्थ गेम्स में लगाया ब्रॉन्ज मेडल पर 'पंच'

रोहित टोकस: चुभी स्कूल में सहपाठी से मिली हार, इंजरी भी नहीं तोड़ सकी हौसला, कॉमनवेल्थ गेम्स में लगाया ब्रॉन्ज मेडल पर 'पंच'

नई दिल्ली, 31 जुलाई (आईएएनएस)। भारतीय बॉक्सर रोहित टोकस अब किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में ब्रॉन्ज मेडल पर 'पंच' लगाते हुए उन्होंने विश्व स्तर पर अपनी काबिलियत को साबित किया। हालांकि, रोहित ने बॉक्सिंग की रिंग में उतरने का फैसला स्कूल में सहपाठी के खिलाफ मिली हार के बाद किया।

रोहित टोकस का जन्म 1 अगस्त, 1993 को दिल्ली के मुनीरका में हुआ। रोहित बचपन में अपने भाइयों संग लड़ते-झगड़ते रहते थे। रोहित के घर के पास ही एक बॉक्सिंग अकादमी थी, जहां बिना कोई पैसा लिए ट्रेनिंग दी जाती थी। रोहित के पिता ने सभी भाइयों को इस अकादमी में ट्रेनिंग लेने के लिए प्रोत्साहित किया और उनकी यह पहल रंग भी लाई। रोहित ने अपने भाइयों के साथ अकादमी जाना शुरू कर दिया। हालांकि, एक से दो साल ट्रेनिंग करने के बाद उन्होंने बॉक्सिंग छोड़ तैराकी शुरू कर दी।

रोहित का स्कूल बदला, तो कक्षा में उनकी मुलाकात एक सहपाठी से हुई, जो बॉक्सिंग की प्रैक्टिस किया करता था। रोहित ने अपने सहपाठी को 'शैडो बॉक्सिंग' करते देखा चैलेंज कर दिया। हालांकि, रोहित को इस मुकाबले में करारी हार मिली और यह हार उनको अंदर तक चुभ गई। रोहित अगले कुछ दिन स्कूल नहीं गए और उन्होंने दोबारा से बॉक्सिंग कोचिंग शुरू कर दी। रोहित ने सहपाठी बॉक्सर को बॉक्सिंग रिंग में हराने की ठानी। रोहित दिन-रात प्रैक्टिस करने में जुट गए और उन्होंने दिल्ली राज्य चैंपियनशिप में हिस्सा लिया। दो महीने जबरदस्त ट्रेनिंग करने के बाद रोहित अपने स्कूल के उसी सहपाठी को रिंग में हराकर चैंपियन बने।

साल 2010 में भारत में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान रोहित ने बॉक्सिंग में अपने करियर बनाने का फैसला किया। 2011 में रोहित ने नेशनल बॉक्सिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल अपने नाम किया, जिसके बाद उन्हें नेशनल शिविर में जगह मिल गई। इसी साल रोहित ने क्यूबा युवा ओलंपिक में हिस्सा लिया और सिल्वर मेडल अपने नाम किया।

बुलंदियों की तरफ बढ़ते रोहित के करियर पर चोटों ने ग्रहण सा लगा दिया। साल 2018 में घुटने की चोट के कारण वह क्वालीफाई करने के बावजूद एआईबीए वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप में हिस्सा नहीं ले सके। रोहित सर्जरी से गुजरे, लेकिन इसके बाद वह एक संक्रमण की चपेट में आ गए, जिसके कारण उन्हें एक और सर्जरी से गुजरना पड़ा। पूरी तरह से इंजरी से उबरने के बाद रोहित ने टोक्यो ओलंपिक के लिए तैयारी शुरू की। नेशनल चैंपियनशिप में रोहित ने शानदार प्रदर्शन किया और क्वार्टर फाइनल मुकाबले में ओलंपिक टिकट के सबसे बड़े दावेदार नजर आ रहे आशीष कुमार को हराकर हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींचा। हालांकि, सेमीफाइनल में एक बार फिर उनका वही घुटना दोबारा से चोटिल हो गया। वह नेशनल चैंपियन तो बने, लेकिन चोट ने गंभीर रूप ले लिया।

ओलंपिक में खेलने का सपना टूटने के बाद रोहित कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में उतरे। हालांकि, टूर्नामेंट के पहले मुकाबले से पहले रोहित के उसी घुटने में एक बार फिर चोट लग गई, जिसके कारण वह लंबे समय तक बाहर रहे थे। रोहित हर हाल में खेलना चाहते थे और भारत का प्रतिनिधित्व करने का यह मौका जाने नहीं देना चाहते थे। रोहित के फिजियोथेरेपिस्ट ने उनके घुटने पर काम किया, लेकिन पैर पर टैप लगाने की वजह से गंभीर फोड़े निकल आए, जिनका दर्द असहनीय था। हालांकि, इन तमाम तरह के दर्द को नजरअंदाज करते हुए रोहित रिंग में उतरे और उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया।

--आईएएनएस

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