ग्लासगो, 26 जुलाई (आईएएनएस)। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में रविवार को पुरुषों के 60 किलोग्राम वेटलिफ्टिंग इवेंट में ऋषिकांत सिंह चनंबम ने भारत को सिल्वर मेडल जिताया। ऋषिकांत ने रिकॉर्ड-तोड़ प्रदर्शन करने के बाद अपना ऐतिहासिक मेडल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को समर्पित करते हुए भारतीय खेलों के लिए सरकार के समर्थन को इसका श्रेय दिया।
पोडियम पर जगह बनाने के बाद 'आईएएनएस' से खास बातचीत में ऋषिकांत ने कहा, "मैं यह सिल्वर मेडल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूरे देश को समर्पित करता हूं। मैंने बहुत कड़ी मेहनत की और आज सिल्वर मेडल जीता। मैं बहुत खुश हूं। आज जो मेडल मैंने जीता है, वह सिर्फ मेरा नहीं है; यह सभी का है, पूरे भारत का है। उन सभी का जिन्होंने मेरा साथ दिया—भारत सरकार, इंडियन वेटलिफ्टिंग फेडरेशन, सपोर्टिंग स्टाफ और मेरे दोस्तों का ग्रुप... यह सभी के लिए है।"
मणिपुर के ऋषिकांत ने पुरुषों के 60 किलोग्राम वेटलिफ्टिंग में कुल 264 किलोग्राम वजन उठाकर सिल्वर मेडल हासिल किया। मलेशिया के बिन कस्डन मोहम्मद अनिक ने कुल 273 किलोग्राम वजन उठाकर गोल्ड जीता, जबकि केन्या के जोशुआ अमूंगा मबोया (260 किलोग्राम) ने पोडियम पर तीसरा स्थान हासिल किया।
ऋषिकांत ने उन सभी लोगों का शुक्रिया अदा किया जिन्होंने उनके सफर में योगदान दिया, खासकर उनके कोच का। उन्होंने कहा, "मैं अपने गुरु विजय शर्मा का नाम लेना चाहूंगा। उन्होंने हमें सिखाया कि कैसे मुकाबला करना है और कैसे ट्रेनिंग करनी है। मुझे अपनी ट्रेनिंग को लेकर कोई शक नहीं था। मेरा पूरा ध्यान इसी पर था... सबसे पहले, मैं इसे भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को समर्पित करता हूं क्योंकि उन्होंने हमारे खेलों को बहुत बढ़ावा दिया है।"
वहीं, केन्या के वेटलिफ्टर जोशुआ अमूंगा म्बोया ने ब्रॉन्ज मेडल जीतने के बाद 'आईएएनएस' से कहा, "यह मेडल मेरे लिए बहुत अहम था, क्योंकि केन्या की वेटलिफ्टिंग टीम को कॉमनवेल्थ मेडल जीते हुए काफी समय हो गया था। इसलिए मैं इस पर पूरा ध्यान दे रहा था, क्योंकि यह मेरा पहला कॉमनवेल्थ कॉम्पिटिशन था। मैं इसे जीतने के लिए बहुत उत्साहित था। तमाम चुनौतियों और संघर्षों के बावजूद, यही मेरा मिशन था।"
उन्होंने इसे एक बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा, "यह एक बड़ी उपलब्धि है। असल में, केन्या में वेटलिफ्टिंग के लिहाज से यह एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। क्योंकि अभी तक यह केन्या का पहला मेडल है। केन्या की तरफ से मेडल जीतने वाला मैं पहला खिलाड़ी हूं। इसलिए यह मेरे और पूरे देश के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। मुकाबला बहुत कठिन था। यह आसान नहीं था। सच कहूं तो मुझे काफी संघर्ष करना पड़ा। लेकिन वह भारतीय खिलाड़ी, मुझे लगता है कि वह मुझसे सिर्फ चार किलोग्राम आगे थे, और अगली बार उन्हें हराने के लिए मुझे उस पर काम करना होगा। इसलिए मुझे ट्रेनिंग करनी होगी। हमारी सरकार और केन्या की नेशनल ओलंपिक कमिटी हमें बहुत सपोर्ट कर रही है। हालांकि, मुझे ओलंपिक स्कॉलरशिप मिली हुई है, लेकिन मैं केन्याई सरकार से बहुत खुश हूं क्योंकि वे एथलीट के तौर पर हमें बहुत सपोर्ट कर रहे हैं।"
--आईएएनएस
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