सोनीपत, 20 अगस्त (आईएएनएस)। ईरान की महिला कबड्डी टीम ने आगामी एशियन गेम्स 2026 से पहले स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (साई) सोनीपत सेंटर में भारतीय टीम के साथ कई प्रैक्टिस मैच खेले।
छह दिन के इस प्रैक्टिस कैंप का मकसद दोनों देशों के लिए एक-दूसरे से सीखने का मौका देना था, ताकि वे आइची-नागोया में होने वाले खेलों में अच्छा प्रदर्शन कर सकें। ईरानी टीम 13 अगस्त को सोनीपत पहुंची और साई कैंपस में भारतीय महिला कबड्डी टीम के साथ-साथ स्थानीय टीमों के खिलाफ भी प्रैक्टिस मैच खेले।
इन प्रैक्टिस मैचों का मुख्य मकसद ईरान को एशियाई खेलों के लिए तैयार करना था, लेकिन इससे भारतीय खिलाड़ियों को भी एक अंतरराष्ट्रीय टीम के खिलाफ खुद को परखने और अलग-अलग खेलने के तरीकों और रणनीतियों का अनुभव हासिल करने का मौका मिला। ईरान की महिला टीम के हेड कोच घोलमरेजा मजंदरानी ने कहा कि यह कैंप उनकी युवा टीम के लिए बहुत फायदेमंद रहा, क्योंकि पिछले एशियन गेम्स के बाद से टीम में 80 प्रतिशत से ज्यादा बदलाव हुए हैं।
मजंदरानी ने साई मीडिया से कहा, "हमारे लिए फ्रेंडली मैच खेलने, खिलाड़ियों को बेहतर बनाने और अपनी टीम की रणनीतियों को सुधारने का यह बहुत अच्छा मौका है। हम एशियन गेम्स में एक बेहतर टीम के तौर पर उतरना चाहते हैं। हमारी टीम के लिए यह एक अच्छा अनुभव रहा है, क्योंकि हमारी टीम अभी बहुत युवा है और हमने पिछले एशियन गेम्स के बाद से शायद 80 प्रतिशत से ज्यादा टीम बदल दी है।"
मजंदरानी ने आगे कहा कि भारत के कबड्डी इकोसिस्टम की गहराई भारतीय खिलाड़ियों को बहुत बड़ा फायदा देती है, क्योंकि उन्हें साल भर अपने ईरानी साथियों की तुलना में कहीं अधिक प्रतिस्पर्धी मैच खेलने को मिलते हैं। उन्होंने कहा, "ईरान में हमारे पास पुरुष और महिला मिलाकर लगभग 3,000 से 4,000 कबड्डी खिलाड़ी हैं। हालांकि, यहां मुझे लगता है कि उसके मुकाबले यहां कई गुना आपके पास शायद 10 मिलियन (1 करोड़) से ज्यादा कबड्डी खिलाड़ी हैं। यह बहुत बड़ी संख्या है।"
मजंदरानी ने आगे कहा, "भारत में एक कबड्डी खिलाड़ी, चाहे वह किशोर हो, जूनियर हो या सीनियर, शायद साल में 50-60 से अधिक मैच खेलता है। यह उनके लिए एक बड़ी बात है। वे मैचों के दौरान अपने कौशल को बेहतर बना सकते हैं।" भारतीय महिला कबड्डी टीम के कोच नवीन कुमार ने कहा कि ईरान के खिलाफ प्रैक्टिस मैच खेलने का अनुभव लड़कियों के लिए बहुत फायदेमंद साबित होगा।
भारतीय कोच ने साई मीडिया को बताया, "हमारी ज्यादातर नई खिलाड़ी जूनियर लेवल की हैं और उन्हें ईरानी टीम के खिलाफ खेलकर बहुत कुछ सीखने का मौका मिला। उन्हें यह समझने का मौका मिला कि ईरान कैसे खेलता है, और इससे हमें यह भी अंदाजा हुआ कि हमारी युवा टीम को भविष्य के लिए कैसे तैयारी करनी चाहिए। मैच बहुत अच्छे रहे और हम इस अनुभव से बहुत खुश हैं।"
उन्होंने आगे कहा, "ईरानी टीम में ऐसी खिलाड़ी भी थीं, जिन्होंने तीन एशियन गेम्स में हिस्सा लिया है, इसलिए उनके पास बहुत अनुभव है। उनकी फिटनेस, ताकत और जबरदस्त पावर बहुत अच्छी है, और हमारे युवा खिलाड़ी उनसे बहुत कुछ सीख सकते हैं। जिस लगन और ऊर्जा के साथ ये खिलाड़ी खेलते हैं, उससे भी हमारे युवा खिलाड़ी सीख सकते हैं। कुल मिलाकर यह हमारी टीम के लिए बहुत उपयोगी अनुभव था।"
ईरान के लिए इस कैंप ने उन्हें अपने देश से अलग माहौल में ढलने का मौका भी दिया। तीसरी बार भारत आईं ईरान की खिलाड़ी जहरा करीमी ने भी इस अनुभव के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने साई मीडिया से कहा, "ईरान और भारत के बीच सबसे बड़े अंतर में से एक यह है कि ईरान में हमारे पास इतने खिलाड़ी नहीं हैं और हम अलग-अलग खिलाड़ियों के साथ मुकाबला नहीं कर पाते। भारत अलग-अलग खिलाड़ियों और अलग-अलग टीमों के साथ खेल सकता है। भारत में अपने देश में ही नेशनल गेम्स भी होते हैं, जो उनके लिए बहुत अच्छा है, लेकिन हमारे यहां ऐसा नहीं है।"
उन्होंने आगे कहा, "मुझे लगता है कि साई अकादमी एथलीटों के लिए बहुत अच्छी जगह है। मैंने दूसरे खेलों के एथलीटों को यहां रहते, प्रैक्टिस करते और समय बिताते देखा। यह बहुत अच्छा है क्योंकि वे सिर्फ अपने खेल के बारे में सोच सकते हैं। मैंने यहां बहुत अच्छे उपकरण भी देखे।"
वहीं, कोच मजंदरानी ने उम्मीद जताई कि इस तरह के आदान-प्रदान कबड्डी के अंतरराष्ट्रीय विकास का लंबे समय तक चलने वाला हिस्सा बन सकते हैं। उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि कबड्डी का आधार भारत में है। जो भी कोच और खिलाड़ी बेहतर बनना चाहते हैं और टॉप लेवल पर पहुंचना चाहते हैं, उन्हें भारत आना होगा।"
उन्होंने आगे कहा, "शायद लंबे समय में, यानी दो-तीन महीनों में, हम इसे जारी रख सकते हैं, ईरान की टीम के साथ मिलकर रणनीति बना सकते हैं, खिलाड़ियों को बेहतर बना सकते हैं और स्थानीय टीमों व बेहतरीन खिलाड़ियों के साथ फ्रेंडली मैच खेल सकते हैं। इससे दुनिया के हर कोने में कबड्डी को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।"
--आईएएनएस
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