फीफा वर्ल्ड कप: डीआर कांगे के खिलाफ 'राउंड ऑफ 32' में बदलाव के साथ उतर सकती है इंग्लैंड की टीम

फीफा वर्ल्ड कप: डीआर कांगे के खिलाफ 'राउंड ऑफ 32' में बदलाव के साथ उतर सकती है इंग्लैंड की टीम

न्यूयॉर्क, 30 जून (आईएएनएस)। फीफा वर्ल्ड कप 2026 के राउंड ऑफ 32 में इंग्लैंड बुधवार को डीआर कांगो का सामना करेगी। टीम के हेड कोच थॉमस ट्यूशेल अपनी शुरुआती प्लेइंग इलेवन में कुछ बदलाव कर सकते हैं।

'ग्रुप-एल' की विजेता ने घाना के खिलाफ गोलरहित ड्रॉ खेलने के बाद, पनामा को 2-0 से हराकर ग्रुप में टॉप स्थान हासिल किया, लेकिन मजबूत डिफेंस वाली टीमों को तोड़ने की उनकी क्षमता पर सवाल बने हुए हैं। इंग्लैंड के डिफेंस में कुछ कमियां जरूर नजर आई हैं, जिसका फायदा मजबूत विरोधी टीम उठा सकती है।

पनामा के खिलाफ इंग्लैंड को जीत दिलाने के लिए जूड बेलिंगहैम ने अपनी शानदार प्रतिभा का प्रदर्शन किया। मिडफील्डर ने पहले कॉर्नर से मिले मौके को शानदार तरीके से गोल में बदलकर टीम का खाता खोला, फिर हैरी केन के लिए दूसरा गोल तैयार कर इंग्लैंड की जीत सुनिश्चित कर दी।

उम्मीद है कि ट्यूशेल मिडफील्डर डेक्लान राइस का टीम में स्वागत करेंगे, जो हल्की काफ (पिंडली) की समस्या के कारण पनामा के खिलाफ मैच नहीं खेल पाए थे। राइस के मिडफील्ड में इलियट एंडरसन के साथ वापसी करने की संभावना है, जबकि मॉर्गन रोजर्स को बाहर बैठना पड़ सकता है।

इंग्लैंड की टीम में हैमस्ट्रिंग की चोट से उबर रहे रीस जेम्स नहीं होंगे, जबकि शनिवार को टखने में चोट लगने के बाद जैरेल क्वांसाह का खेलना संदिग्ध है। उम्मीद है कि जेड स्पेंस राइट-बैक के तौर पर शुरुआत करेंगे और निको ओ'राइली लेफ्ट-बैक होंगे। स्पेंस के अटैकिंग रन से टीम को ज्यादा मजबूती मिल सकती है, जबकि ट्यूशेल को यह भी तय करना होगा कि राइट विंग पर बुकायो साका खेलेंगे या नोनी माडुके के साथ उतरेंगे। पनामा के खिलाफ साका पूरी तरह से मैच-फिट नहीं दिखे, जबकि माडुके कोई खास असर नहीं डाल पाए।

पनामा के खिलाफ इंग्लैंड के सबसे अच्छे खिलाड़ियों में से एक मार्कस रैशफोर्ड के एंथनी गॉर्डन से आगे लेफ्ट फ्लैंक पर अपनी जगह बनाए रखने की उम्मीद है।

डीआर कांगो इस टूर्नामेंट की सबसे बड़ी चौंकाने वाली टीमों में से एक बनकर उभरी है। टीम ने ग्रुप चरण में उज्बेकिस्तान को हराया, पुर्तगाल के खिलाफ ड्रॉ खेला और कोलंबिया से 1-0 की करीबी हार झेलने के बावजूद राउंड ऑफ 32 में अपनी जगह पक्की कर ली।

जैरे के नाम से खेलते हुए डीआर कांगो 1974 में फीफा वर्ल्ड कप में हिस्सा लेने वाला उप-सहारा अफ्रीका का पहला देश बना था। हालांकि, उस अभियान में उसे तीनों मैचों में हार का सामना करना पड़ा था, जिसमें यूगोस्लाविया के खिलाफ 9-0 की बड़ी शिकस्त भी शामिल थी, लेकिन मौजूदा डीआर कांगो की टीम को उस समय की टीम की तुलना में कहीं अधिक मजबूत और प्रतिस्पर्धी माना जा रहा है।

सेड्रिक बाकम्बु, नोआ सादिकी, योएन विसा, एक्सल तुआनजेबे और इंग्लैंड के पूर्व अंडर-21 डिफेंडर आरोन वान-बिसाका जैसे अनुभवी खिलाड़ियों के साथ-साथ फ्रांस में खेलने वाले कई खिलाड़ियों की मौजूदगी के कारण, डीआर कांगो एक बहुत बड़ी चुनौती पेश करता है। राउंड ऑफ 16 में जगह बनाने की कोशिश कर रही इंग्लैंड की टीम उन्हें कम आंकने की गलती नहीं करेगी।

--आईएएनएस

आरएसजी