नई दिल्ली, 22 सितंबर (आईएएनएस)। केंद्र सरकार द्वारा स्मार्टफोन स्क्रीन प्रोटेक्टर को अनिवार्य पंजीकरण आदेश (सीआरओ) के दायरे में लाने के फैसले का उद्योग संगठन इंडिया सेलुलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन (आईसीईए) ने स्वागत किया है। संगठन ने मंगलवार को कहा कि यह कदम घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के साथ-साथ रोजगार सृजन और गुणवत्ता सुधार में अहम भूमिका निभाएगा।
आईसीईए के अनुसार, सरकार ने आईएस 19348:2025 'ग्लास स्क्रीन प्रोटेक्टर-स्पेसिफिकेशन' मानक के तहत स्क्रीन प्रोटेक्टर को शामिल करने का फैसला किया है, जो 1 अप्रैल 2027 से लागू होगा।
नए नियम के तहत भारत में बिकने वाले सभी स्क्रीन प्रोटेक्टर, चाहे वे देश में बने हों या आयातित, उन्हें भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) का पंजीकरण प्राप्त करना अनिवार्य होगा। इससे उपभोक्ताओं को यह भरोसा मिलेगा कि वे जो उत्पाद खरीद रहे हैं, वह निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप है और केवल मार्केटिंग के दम पर बेचा जाने वाला निम्न गुणवत्ता वाला उत्पाद नहीं है।
उद्योग संगठन का अनुमान है कि इस मानक को लागू करने से भारत में 12,000 करोड़ रुपए से 16,000 करोड़ रुपए का गुणवत्तापूर्ण विनिर्माण उद्योग विकसित हो सकता है, जो घरेलू बाजार के साथ-साथ निर्यात को भी बढ़ावा देगा।
आईसीईए का कहना है कि इस कदम से सरकार को लगभग 2,000 करोड़ रुपए अतिरिक्त जीएसटी राजस्व प्राप्त हो सकता है। साथ ही प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करीब 60,000 रोजगार सृजित होने की संभावना है।
संगठन के अनुसार, इससे भारत वैश्विक स्तर पर गुणवत्तापूर्ण स्क्रीन प्रोटेक्टर विनिर्माण केंद्र के रूप में उभर सकता है।
उद्योग को नए नियमों के अनुरूप तैयार होने के लिए समय भी दिया गया है। अप्रैल 2027 से पहले घरेलू निर्माता अपनी उत्पादन इकाइयों को विकसित कर सकेंगे, प्रक्रियाओं को मानकों के अनुरूप बना सकेंगे और बीआईएस प्रमाणन हासिल कर सकेंगे।
आईसीईए ने कहा कि अब तक स्क्रीन प्रोटेक्टर बाजार में गुणवत्ता नियंत्रण की अनिवार्यता नहीं होने के कारण बड़े पैमाने पर अनियमितताएं थीं। कई उत्पादों को "टेम्पर्ड ग्लास" बताकर बेचा जाता था, जबकि वे वास्तव में निर्धारित गुणवत्ता और टेम्परिंग मानकों को पूरा नहीं करते थे।
संगठन के अनुसार, वर्तमान में स्क्रीन प्रोटेक्टर की कीमतें 50 रुपए से 2,500 रुपए तक हैं, लेकिन कीमत और वास्तविक गुणवत्ता के बीच अक्सर कोई स्पष्ट संबंध नहीं होता। इसके अलावा, अंडर-इनवॉइसिंग और गलत घोषणा जैसी अनुचित व्यापारिक प्रथाएं भी बड़े पैमाने पर मौजूद हैं।
उद्योग निकाय का मानना है कि इन प्रथाओं से सरकार को जीएसटी राजस्व का नुकसान होता है और घरेलू रोजगार के अवसर भी प्रभावित होते हैं।
आईसीईए के अनुमान के मुताबिक, भारत में हर वर्ष लगभग 50 करोड़ स्क्रीन प्रोटेक्टर की खपत होती है, जिनमें से 90 प्रतिशत से अधिक वर्तमान में आयात किए जाते हैं।
संगठन का कहना है कि अनिवार्य गुणवत्ता मानकों के लागू होने से यह कारोबार अधिक संगठित होगा, आयात पर निर्भरता कम होगी और नियमों का पालन करने वाले घरेलू निर्माताओं के लिए समान प्रतिस्पर्धी माहौल तैयार होगा।
--आईएएनएस
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