नई दिल्ली, 22 सितंबर (आईएएनएस)। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने मंगलवार को कहा कि भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच साझेदारी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), क्वांटम टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर, जैव प्रौद्योगिकी और उन्नत अनुसंधान जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग के नए अवसर खोल रही है।
यह बयान यूरोपीय संसद की उद्योग, अनुसंधान एवं ऊर्जा समिति (आईटीआरई) के प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई बैठक के दौरान आया। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व ऑस्ट्रिया की एंजेलिका विनजिग और यूरोपीय संसद सदस्य राफेले स्टांकानेली ने किया।
बैठक में प्रस्तावित भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के कार्यान्वयन, वैज्ञानिक सहयोग को मजबूत करने और महत्वपूर्ण एवं उभरती प्रौद्योगिकियों में साझेदारी को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई।
इस दौरान, मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत और यूरोपीय संघ की रणनीतिक साझेदारी पारस्परिक हितों वाले क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की अपार संभावनाएं रखती है। उन्होंने कहा कि विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार दोनों पक्षों के संबंधों का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बन चुके हैं।
उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रस्तावित एफटीए पर शीघ्र हस्ताक्षर और उसका प्रभावी क्रियान्वयन दोनों पक्षों की साझा प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह समझौता व्यवसायों, उपभोक्ताओं और कुशल पेशेवरों के लिए नए अवसर पैदा करेगा तथा भारत-ईयू संबंधों को नई गति देगा।
यूरोपीय प्रतिनिधिमंडल की ओर से एंजेलिका विनजिग ने भारत को यूरोपीय संघ का एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार बताते हुए कहा कि इस यात्रा का उद्देश्य भारत की औद्योगिक और प्रौद्योगिकी नीतियों को बेहतर तरीके से समझना तथा सहयोग के नए क्षेत्रों की पहचान करना है।
उन्होंने औद्योगिक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने, मजबूत सप्लाई चेन विकसित करने और हरित तथा डिजिटल परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में दोनों पक्षों की साझा प्राथमिकताओं का उल्लेख किया।
भारत के नवाचार एजेंडे पर प्रकाश डालते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि अनुसंधान और नवाचार 'विकसित भारत 2047' की परिकल्पना के केंद्र में हैं। उन्होंने बताया कि भारत अब उच्च प्रभाव वाले अनुसंधान, तकनीक के व्यावसायीकरण और उद्योग की अधिक भागीदारी पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
मंत्री ने अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (एएनआरएफ) और प्रस्तावित 10 अरब यूरो के रिसर्च, डेवलपमेंट एंड इनोवेशन (आरडीआई) कार्यक्रम का भी उल्लेख किया, जिसका उद्देश्य उच्च जोखिम और उच्च प्रभाव वाले अनुसंधान को बढ़ावा देना तथा डीप-टेक स्टार्टअप्स को समर्थन देना है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने यूरोपीय संघ को एआई, क्वांटम कंप्यूटिंग, उन्नत सामग्री, बायोटेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर, हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग और अगली पीढ़ी की दूरसंचार तकनीकों, विशेषकर 6जी, में सहयोग बढ़ाने का आमंत्रण दिया।
उन्होंने कहा कि क्वांटम प्रौद्योगिकी संयुक्त अनुसंधान, कौशल विकास और तकनीकी इकोसिस्टम निर्माण के लिए बड़े अवसर प्रदान करती है। वहीं एआई के क्षेत्र में सहयोग विशेष रूप से स्वास्थ्य सेवा और वैज्ञानिक अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में केंद्रित हो सकता है, जहां जिम्मेदार और विश्वसनीय उपयोग सुनिश्चित करना बेहद महत्वपूर्ण है।
--आईएएनएस
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