मुंबई, 5 जुलाई (आईएएनएस)। केंद्र सरकार का ई20 प्रोग्राम पूरी तरह से नियोजित है और पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण कई वर्षों तक सभी पक्षकारों से चर्चा के बाद लागू किया गया है। इसमें ऑयल मार्केटिंग कंपनियां, एथेनॉल उत्पादक, ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री, वैज्ञानिक और ऑटोमोबाइल रिसर्च एसोसिएशन शामिल हैं। यह जानकारी पूर्व बीपीसीएल निदेशक (रिफाइनरी) आर. रामचंद्रन की ओर से दी गई।
समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में आर.रामचंद्रन ने कहा कि ई20 के कार्यान्वयन से पहले तकनीकी, परिचालन और नीतिगत पहलुओं सभी पर विचार किया गया है।
रामचंद्रन ने आईएएनएस को बताया, "ई20 एथेनॉल मिश्रण पहल एक अच्छी तरह से सोची-समझी और कई सालों तक चली प्रक्रिया रही है, जिसमें सभी पक्षकारों—तेल कंपनियां, एथेनॉल बनाने वाली कंपनियां, ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री, वैज्ञानिक और ऑटोमोबाइल रिसर्च एसोसिएशन—शामिल रहे हैं।"
ई85 के बारे में बात करते हुए रामचंद्रन ने स्पष्ट किया कि यह अभी किसी सरकारी पॉलिसी या लागू करने की योजना का हिस्सा नहीं है।
उन्होंने कहा, "ई85 अभी किसी सरकारी पॉलिसी या लागू करने की योजना का हिस्सा नहीं है। इसे भविष्य के एक संभावित विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है। यह सोच ब्राजील जैसे देशों से प्रेरित है, जहां ई100 को फ्लेक्स-फ्यूल इंजन टेक्नोलॉजी के साथ इस्तेमाल करने के लिए विकसित किया गया है।"
भविष्य में औद्योगिक विस्तार के दौरान पानी के इस्तेमाल को लेकर जताई जा रही चिंताओं पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि उद्योगों को उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ पानी बचाने को भी प्राथमिकता देनी चाहिए।
उन्होंने लगभग 100 प्रतिशत पानी की रीसाइक्लिंग करने, ट्रीट किए गए वेस्टवॉटर का अधिक से अधिक इस्तेमाल करने और इंडस्ट्रियल-ग्रेड पानी बनाने के लिए रिवर्स ऑस्मोसिस और डिमिनरलाइजेशन प्लांट जैसी टेक्नोलॉजी अपनाने पर जोर दिया।
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि उद्योग पानी की अधिक खपत वाली प्रक्रियाओं पर निर्भरता कम करने के लिए वैकल्पिक कूलिंग सिस्टम अपनाएं, जिनमें एयर-बेस्ड, कंप्रेस्ड-एयर और चिल्ड-एयर टेक्नोलॉजी शामिल हैं।
भारत की एनर्जी सिक्योरिटी के बारे में रामचंद्रन ने कहा कि देश की मजबूती कई वजहों से है, जिसमें पिछले पांच-छह सालों में कच्चे तेल के आयात बास्केट में लगातार विविधता लाना शामिल है।
उन्होंने कहा कि भारतीय तेल उद्योग ने पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के साथ मिलकर तेल खरीदने के विकल्पों को बढ़ाया है। इससे देश वैकल्पिक आपूर्तिकर्ताओं से कच्चा तेल हासिल करके सप्लाई चेन में आने वाली संभावित रुकावटों जैसे कि होर्मुज स्ट्रेट का बंद होना आदि को संभाल सकता है।