वॉशिंगटन, 21 अगस्त (आईएएनएस)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका ईरान से जुड़े रणनीतिक जलमार्गों पर 'लगभग नियंत्रण' रखे हुए है और जल्द ही उन पर पूरी तरह नियंत्रण कर लेगा। उन्होंने एक बार फिर दोहराया कि ईरान को कभी भी परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
अपने पूर्व निजी वकील माइकल कोहेन को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अपनी सैन्य कार्रवाई का बचाव किया। उन्होंने माना कि इस संघर्ष की वजह से अमेरिकी लोगों को पेट्रोल और ऊर्जा की बढ़ी हुई कीमतों का सामना करना पड़ सकता है।
77 डब्ल्यूएबीसी रेडियो पर प्रसारित इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा, "अब ईरान के मामले में, उनके पास कभी भी परमाणु हथियार नहीं होगा। हम इन जलमार्गों पर लगभग नियंत्रण रख रहे हैं और जल्द ही पूरी तरह नियंत्रण में होंगे। ईरान के मामले में हम बहुत अच्छा काम कर रहे हैं।"
जारी इंटरव्यू में ट्रंप ने किसी विशेष जलमार्ग का नाम नहीं लिया। उन्होंने कहा कि ईरान की नौसेना, वायुसेना और नेतृत्व को काफी कमजोर कर दिया गया है, जिससे किसी समझौते तक पहुंचना मुश्किल हो गया है।
ट्रंप ने कहा, "समस्या का एक हिस्सा यह है कि उनके कई नेता अब नहीं रहे। ऐसे में कोई समझौता करना आसान नहीं है। किसी को ठीक से पता ही नहीं है कि नेतृत्व कौन कर रहा है।"
उन्होंने तर्क दिया कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना इतना जरूरी है कि इसके लिए अमेरिकी उपभोक्ताओं को कुछ अतिरिक्त खर्च भी उठाना पड़े तो वह उचित है।
उन्होंने कहा, "मैं लोगों से कहता हूं कि आपकी ऊर्जा की लागत थोड़ी बढ़ सकती है, पेट्रोल भी थोड़ा महंगा हो सकता है। हमें मध्य पूर्व में कदम उठाने होंगे, क्योंकि हम ईरान को परमाणु हथियार रखने की अनुमति नहीं दे सकते।"
राष्ट्रपति ने दावा किया कि ईरान की सैन्य क्षमता 'पूरी तरह नष्ट' हो चुकी है और उसने मिसाइल तथा ड्रोन बनाने की अपनी काफी क्षमता खो दी है। उन्होंने बढ़ती महंगाई, कमजोर होती मुद्रा और सैन्य कर्मियों को वेतन न मिलने को भी तेहरान पर बढ़ते दबाव के संकेत बताया।
ट्रंप ने कहा, "मैंने यह कदम इसलिए उठाया क्योंकि हमारे पास कोई और विकल्प नहीं था। अगर जरूरत पड़ती तो मैं इसे सौ बार फिर करता। वे परमाणु हथियार नहीं रख सकते और उनके पास परमाणु हथियार नहीं होंगे।"
ट्रंप ने ईरान की परमाणु सुविधाओं पर बी-2 बॉम्बर के इस्तेमाल का भी बचाव किया। उन्होंने कहा कि यह अभियान देर रात चलाया गया था और हर बम अपने लक्ष्य पर सटीक तरीके से लगा।
उन्होंने कहा, "जब हमने बी-2 बॉम्बर से हमला किया, तब वे परमाणु हथियार हासिल करने से सिर्फ दो हफ्ते दूर थे। यही वजह थी कि मुझे यह कदम उठाना पड़ा क्योंकि आप उन्हें इस तरह का हथियार नहीं रखने दे सकते।"
राष्ट्रपति ने दावा किया कि अगर ईरान के पास परमाणु हथियार आ जाते, तो वह इजरायल और मध्य पूर्व के अन्य देशों पर हमला कर सकता था। उन्होंने सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), कुवैत और बहरीन का नाम लेते हुए कहा कि ये देश ईरानी मिसाइलों के निशाने पर थे।
उन्होंने कहा, "अगर डोनाल्ड ट्रंप नहीं होते, तो इजरायल भी नहीं होता।" उन्होंने कहा, "मेरा मानना है कि पूरा मध्य पूर्व तबाह हो गया होता और इजरायल तो निश्चित रूप से खत्म हो गया होता।"
ट्रंप ने इंटरव्यू में वेनेजुएला, आव्रजन, टैरिफ और अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर भी बात की। उन्होंने दावा किया कि टैरिफ की वजह से ऑटोमोबाइल, सेमीकंडक्टर, दवा और मेडिकल उपकरणों का उत्पादन फिर से अमेरिका लौट रहा है।उन्होंने निवेश और निर्माण गतिविधियों को 'पुनर्जागरण' बताया।
माइकल कोहेन कई वर्षों तक ट्रंप के निजी वकील और करीबी सहयोगी रहे थे। हालांकि बाद में दोनों के रिश्तों में सार्वजनिक रूप से गंभीर मतभेद हो गए। कोहेन ने बाद में ट्रंप के खिलाफ गवाही भी दी और उनके प्रमुख आलोचकों में शामिल हो गए।
--आईएएनएस
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