एफटीए से भारत-यूके के बीच नए व्यापार युग की शुरुआत, 'जीरो टैरिफ' से निर्यातकों को फायदा

एफटीए से भारत-यूके के बीच नए व्यापार युग की शुरुआत, 'जीरो टैरिफ' से निर्यातकों को फायदा

नई द‍िल्‍ली, 15 जुलाई (आईएएनएस)। भारत-यूके व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता (एफटीए) को दोनों देशों के कारोबारी रिश्तों में एक अहम बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। इस समझौते से कपड़ा, आयुर्वेद, कृषि, प्रोसेस्ड फूड, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा, रत्न-आभूषण और हस्तशिल्प जैसे कई क्षेत्रों को बड़ी उम्मीदें हैं।

उद्योग जगत और विशेषज्ञों का मानना है कि इस समझौते से भारतीय निर्यातकों को ब्रिटेन के बाजार में बेहतर मौके मिलेंगे। कई उत्पादों पर टैरिफ में कमी या पूरी छूट मिलने से भारतीय सामान ज्यादा किफायती और प्रतिस्पर्धी बनेंगे।

भारत-यूके एफटीए (फ्री ट्रेड एग्रीमेंट) से जुड़ी उम्मीदों पर वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा, "कोई भी व्यापार समझौता सिर्फ व्यापार बढ़ाने का जरिया नहीं होता। जब ऐसा समझौता होता है, तो दोनों देशों के बीच टैरिफ और नियमों को लेकर पहले से साफ और भरोसेमंद व्यवस्था बन जाती है। हमारा मानना है कि ऐसे व्यापार समझौते दोनों देशों में निवेश बढ़ाने में भी मदद करेंगे। इससे न सिर्फ दोनों देशों के बीच सप्लाई चेन मजबूत होगी, बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन में भी नए मौके बनेंगे। साथ ही, भारतीय कारोबारों के लिए दुनिया के दूसरे हिस्सों तक पहुंचने के नए रास्ते भी खुलेंगे।"

भारत में ब्रिटेन की उच्चायुक्त लिंडी कैमरून ने कहा क‍ि हमारा महत्वपूर्ण एफटीए, जिसे सीईटीए भी कहा जाता है, आज से लागू हो गया है। इससे ब्रिटेन और भारत के बीच पहले से ही लगभग 48 अरब पाउंड के व्यापारिक रिश्ते को मजबूती मिलेगी। इस समझौते से दोनों देशों के बीच रोजमर्रा का व्यापार सस्ता, तेज और आसान हो जाएगा। इस समझौते से भारत और ब्रिटेन दोनों की जीडीपी में करीब पांच अरब पाउंड तक की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।

लिंडी कैमरून ने कहा क‍ि आज से हमारी अर्थव्यवस्थाओं, हमारे कारोबारों और सबसे बढ़कर हमारे लोगों को इस व्यापार समझौते का फायदा मिलना शुरू हो जाएगा। भारत से ब्रिटेन जाने वाले 99 प्रत‍िशत सामान पर अब कोई आयात शुल्क नहीं लगेगा, जबकि ब्रिटेन से भारत आने वाले 90 प्रत‍िशत उत्पाद या तो पूरी तरह शुल्क-मुक्त होंगे या उन पर पहले के मुकाबले कम आयात शुल्क लगेगा।

भारत-यूके एफटीए पर कॉन्टिनेंटल कैरियर्स ग्रुप ऑफ कंपनीज के चेयरमैन विपिन वोहरा ने कहा, "यह भारत-ब्रिटेन के बीच निर्यात और आयात के पूरे माहौल को बदलने वाला है। इससे कपड़ा, हस्तशिल्प, फार्मा, रत्न और आभूषण जैसे क्षेत्रों को फायदा होगा। सभी को उम्मीद है कि इससे निर्यात में कई गुना बढ़ोतरी होगी। दोनों देशों के बीच आने-जाने वाली फ्लाइट्स की संख्या भी बढ़नी चाहिए। सरकारों को दोनों देशों के बीच ज्यादा लैंडिंग राइट्स देने पर ध्यान देना चाहिए, ताकि ज्यादा से ज्यादा उड़ानें चल सकें और भारत-ब्रिटेन के बीच सीधे ज्यादा जहाज भी आ-जा सकें।"

भारत-यूके एफटीए पर सहस्रा ग्रुप के सीएमडी अमृत मनवानी ने कहा, "मेरा मानना है कि यह दोनों देशों के लिए फायदे वाला समझौता है। अब तक भारत, ब्रिटेन को बड़े स्तर पर निर्यात नहीं कर पाया है। भारत-यूके व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते (सीईटीए) के लागू होने से हमें उम्मीद है कि ब्रिटेन को इलेक्ट्रॉनिक हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर, दोनों के निर्यात में काफी बढ़ोतरी होगी।"

भारत-यूके एफटीए पर अपैरल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (एईपीसी) के महासचिव मिथिलेश्वर ठाकुर ने कहा, "यह भारत और ब्रिटेन, दोनों के लिए फायदे वाला समझौता है। 9.6 प्रत‍िशत टैरिफ की बाधा हटने से, जो लंबे समय से भारत के कपड़ा निर्यात को प्रभावित कर रही थी, भारतीय कपड़ा उद्योग की प्रतिस्पर्धा क्षमता काफी बढ़ने की उम्मीद है। हमें पूरा भरोसा है कि आने वाले कुछ सालों में ब्रिटेन को भारत से होने वाला कपड़ों का निर्यात दोगुना हो जाएगा।"

भारत-यूके एफटीए पर आईओपीईपीसी के चेयरमैन संदीप भूरा ने कहा, "हमारे क्षेत्र के लिए भारत-यूके व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता (सीईटीए) एक बहुत ही सकारात्मक कदम है। ब्रिटेन का बाजार करीब 500 मिलियन अमेरिकी डॉलर का है और हमें उम्मीद है कि अगले चार से पांच वर्षों में भारत की बाजार हिस्सेदारी मौजूदा 5-7 प्रत‍िशत से बढ़कर 10-15 प्रत‍िशत तक पहुंच जाएगी।"

भारत सरकार के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. तरुण बजाज ने कहा, "भारत-यूके व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते (सीईटीए) से भारत के कृषि और प्रोसेस्ड फूड (प्रसंस्कृत खाद्य) क्षेत्र को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है। कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य से जुड़े करीब 95 प्रत‍िशत उत्पादों को ब्रिटेन के बाजार में जीरो-ड्यूटी (कोई शुल्क नहीं) की सुविधा मिलेगी, जिससे भारतीय उत्पादों को प्रतिस्पर्धा में बड़ा फायदा मिलेगा।"

भारत-यूके एफटीए पर अपैरल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के चेयरमैन डॉ.ए शक्तिवेल ने कहा, "यह हमारे लिए एक ऐतिहासिक पल है। ब्रिटेन के खरीदारों के साथ हमारे लंबे समय से अच्छे संबंध रहे हैं, लेकिन वे भारत से बड़ी मात्रा में खरीदारी नहीं कर पा रहे थे, क्योंकि कम विकसित देश (एलडीसी) का दर्जा रखने वाले प्रतिस्पर्धी देशों को बिना शुल्क के निर्यात की सुविधा मिलती थी, जिससे वे ज्यादा प्रतिस्पर्धी बन जाते थे।"

भारत-यूके एफटीए को लेकर दीपक कुमार बडाया ने कहा क‍ि भारत-यूके व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते (सीईटीए) से आयुर्वेदिक क्षेत्र को काफी फायदा मिलने की उम्मीद है। दुनियाभर में भारतीय आयुर्वेदिक दवाओं की मांग लगातार बढ़ रही है, और इस क्षेत्र में सबसे बड़ी प्रतिस्पर्धा चीन से है। इस मुक्त व्यापार समझौते के लागू होने के बाद, टैरिफ में मिलने वाले फायदे और भारतीय उत्पादों की गुणवत्ता पर लोगों के भरोसे के कारण खरीदार भारतीय निर्माताओं और सप्लायर्स को ज्यादा पसंद कर सकते हैं।

भारत-यूके एफटीए पर ड‍िंपल लांबा ने कहा क‍ि मेरा मानना है कि यह भारत सरकार और यूनाइटेड किंगडम, दोनों के लिए गर्व का पल है। भारत-यूके व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते के लागू होने से भारतीय निर्यातकों के लिए बड़े बदलाव की उम्मीद है। इस समझौते के तहत योग्य निर्यात पर जीरो टैरिफ की सुविधा मिलने से भारतीय उत्पाद ब्रिटेन के बाजार में ज्यादा किफायती और प्रतिस्पर्धी बन जाएंगे। इससे कारोबार के लिए कई नए और बड़े अवसर पैदा होंगे।

--आईएएनएस

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