नई दिल्ली, 15 जुलाई (आईएएनएस)। भारत-यूरोपीय संघ (ईयू) व्यापार और प्रौद्योगिकी परिषद (टीटीसी) की तीसरी बैठक बुधवार को ब्रुसेल्स में आयोजित हुई। विदेश मंत्रालय (एमईए) के अनुसार, भारत की ओर से इस बैठक की सह-अध्यक्षता विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर, वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने की।
एमईए ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने अप्रैल 2022 में भारत-ईयू टीटीसी की शुरुआत की थी। इसका उद्देश्य व्यापार, भरोसेमंद तकनीक और सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों पर मिलकर काम करना और दोनों पक्षों के बीच सहयोग को और मजबूत करना था।
मंत्रालय ने बताया कि भारत और यूरोपीय संघ दुनिया के दो बड़े और मजबूत लोकतंत्र हैं। दोनों के पास खुले बाजार वाली अर्थव्यवस्थाएं, साझा मूल्य और विविध समाज हैं। इसी वजह से बदलते और जटिल वैश्विक माहौल में दोनों स्वाभाविक रणनीतिक साझेदार हैं। इस संदर्भ में दोनों पक्षों ने 27 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में हुए 16वें भारत-ईयू शिखर सम्मेलन को याद किया, जिसमें दोनों नेताओं ने अपनी रणनीतिक साझेदारी को और ऊंचे स्तर तक ले जाने की प्रतिबद्धता जताई थी।
बैठक के दौरान भारत और यूरोपीय संघ ने रणनीतिक तकनीक, डिजिटल प्रशासन और डिजिटल कनेक्टिविटी से जुड़े कार्य समूह-एक के तहत डिजिटल सहयोग को और मजबूत करने की अपनी साझा प्रतिबद्धता दोहराई है। दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए कि डिजिटल ट्रस्ट सर्विसेज को एक-दूसरे के साथ बेहतर तरीके से काम करने योग्य बनाने के लिए तकनीकी स्तर पर काम जारी रखा जाएगा। इसके साथ ही सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में व्यावहारिक सहयोग का ढांचा तैयार करने, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के उपयोग से जुड़ी बेहतर प्रक्रियाओं को साझा करने, हाई परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग (एचपीसी) और क्वांटम तकनीक के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने, कुशल आईसीटी कर्मचारियों की आवाजाही को आसान बनाने और अगली पीढ़ी की दूरसंचार तकनीक व 6जी मानकों पर मिलकर काम तेज करने पर सहमति बनी।
एमईए ने कहा कि आज के समय में जब व्यापार और तकनीक एक-दूसरे से तेजी से जुड़ रहे हैं, भारत और यूरोपीय संघ साझा मूल्यों और लक्ष्यों के आधार पर रचनात्मक बातचीत जारी रखे हुए हैं। दोनों पक्ष मानते हैं कि टीटीसी व्यापार, तकनीक और सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों पर बेहतर सहयोग के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बनता जा रहा है। इसका उद्देश्य वैश्विक स्थिरता और आर्थिक सुरक्षा को बढ़ावा देना और टिकाऊ, नए विचारों पर आधारित तथा सभी को साथ लेकर चलने वाली आर्थिक प्रगति को मजबूत करना है।
मंत्रालय के अनुसार, जनवरी 2026 में एडवांस इलेक्ट्रॉनिक सिग्नेचर और सील से जुड़े प्रशासनिक समझौते पर हस्ताक्षर के बाद भारत और यूरोपीय संघ ई-सिग्नेचर को एक-दूसरे की प्रणालियों के साथ बेहतर तरीके से जोड़ने और आपसी मान्यता देने के लिए तकनीकी बातचीत जारी रखेंगे। दोनों पक्ष डिजिटल वॉलेट की आपसी संगतता, जिसमें बिजनेस वॉलेट भी शामिल हैं, पर बातचीत आगे बढ़ाएंगे। साथ ही, नागरिकों और संस्थाओं के लिए ईयू डिजिटल आइडेंटिटी वॉलेट और भारत के डिजिलॉकर को जोड़ने की एक पायलट परियोजना की संभावनाओं पर भी विचार करेंगे। यह काम दोनों पक्षों द्वारा तय किए गए उपयोग के मामलों (यूज केस) के आधार पर किया जाएगा।
मंत्रालय ने कहा कि भारत और यूरोपीय संघ ने माना कि दोनों के बीच सहयोग को बढ़ाने में डीप-टेक स्टार्टअप, इनोवेशन इकोसिस्टम और व्यवसायों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। इसी को देखते हुए दोनों पक्षों ने टीटीसी के तहत एक विशेष मंच बनाने की संभावनाओं पर विचार करने का फैसला किया है, ताकि ‘ब्लू वैलीज’ पहल पर आगे चर्चा की जा सके।
दोनों पक्षों ने 16वें भारत-ईयू शिखर सम्मेलन के दौरान शुरू किए गए भारत-ईयू बिजनेस फोरम को हर साल आयोजित करने पर भी सहमति जताई है। इसके साथ ही प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करते हुए अलग-अलग उद्योगों के साथ नियमित बैठकें और बातचीत भी की जाएंगी। दोनों पक्षों ने सहमति जताई कि टीटीसी की अगली मंत्री स्तरीय बैठक 2027 में नई दिल्ली में आयोजित की जाएगी।
--आईएएनएस
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