बलूच संगठनों ने की पीओके में प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई की निंदा, कहा- दमन से नहीं दबेगी आवाज

बलूच संगठनों ने की पीओके में प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई की निंदा, कहा- दमन से नहीं दबेगी आवाज

क्वेटा, 31 जुलाई (आईएएनएस)। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में बढ़ते अशांति के बीच दर्जनों नागरिकों के मारे जाने और घायल होने की खबरों पर कई बलूच मानवाधिकार संगठनों और कार्यकर्ताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की कथित बर्बर कार्रवाई की निंदा करते हुए इसे मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन बताया है।

बलूच मानवाधिकार संगठन बलोच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी) ने कहा कि पीओके में जन आंदोलन के खिलाफ बल प्रयोग, प्रत्यक्ष गोलीबारी, राजनीतिक कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी और नागरिकों को निशाना बनाए जाने की घटनाएं पाकिस्तान की दमनकारी व्यवस्था को उजागर करती हैं।

बीवाईसी ने कहा, "हम इन कार्रवाइयों को व्यापक राज्य नीति का हिस्सा मानते हैं, जिसके तहत जनता की आवाज और राजनीतिक प्रतिरोध को बलपूर्वक दबाने का प्रयास किया जाता है। राजनीतिक प्रक्रियाओं के बजाय जनता की मांगों का जवाब गोलियों, गिरफ्तारियों और दमन से देना इस बात को दर्शाता है कि पाकिस्तान राज्य असहमति को सहन करने की बजाय बल प्रयोग को प्राथमिकता देता है।"

मानवाधिकार संगठन ने ने चिंता जताते हुए कहा कि लोगों की मांगों को सुनने और राजनीतिक समाधान तलाशने के बजाय पाकिस्तानी अधिकारियों ने बल प्रयोग का रास्ता चुना है। क्षेत्र में प्रत्यक्ष गोलीबारी, हिंसा, गिरफ्तारियों और घेराबंदी के जरिए जन आंदोलन को दबाने की कोशिश की जा रही है।

बीवाईसी ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों, संयुक्त राष्ट्र की संबंधित संस्थाओं और वैश्विक समुदाय से पीओके में नागरिकों के खिलाफ बल प्रयोग, न्यायेतर कार्रवाइयों, अवैध गिरफ्तारियों, नागरिक स्वतंत्रताओं पर प्रतिबंध तथा शांतिपूर्ण विरोध के मौलिक अधिकार के उल्लंघन का गंभीर संज्ञान लेने की अपील की।

वहीं, बलूच वुमेन फोरम (बीडब्ल्यूएफ) की केंद्रीय आयोजक शाली बलूच ने भी पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा पीओके में प्रदर्शनकारियों पर की गई गोलीबारी और राज्य की आक्रामक कार्रवाई की कड़ी आलोचना की।

शाली बलूच ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “इतिहास गवाह है कि जब भी दबे-कुचले और वंचित लोग अपने हक के लिए उठे हैं तो उन्होंने हर तरह के जुल्म और हमले का सामना करने की काबिलियत भी विकसित की है। लोगों के संघर्ष को ताकत से दबाना मुमकिन नहीं है और आखिर में यही संघर्ष अपने मकसद को पाने की तरफ आगे बढ़ता है।”

पाकिस्तानी सेना की बेरहम कार्रवाई की निंदा करते हुए बलूच वॉयस फॉर जस्टिस (बीवीजे) ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सरकारी ताकत का बिना सोचे-समझे इस्तेमाल जुल्म, क्रूरता और अमानवीय व्यवहार का सबसे बुरा उदाहरण है।

पिछले तीन दिनों में पीओके में प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की चौंकाने वाली कार्रवाई में अब तक 40 से ज्यादा लोग मारे गए और दर्जनों घायल हुए हैं। विश्लेषकों का मानना ​​है कि विरोध प्रदर्शन शुरू होने के बाद से मरने वाले स्थानीय लोगों की संख्या 125 या उससे ज्यादा हो सकती है।

--आईएएनएस

केके/वीसी