भारत और स्लोवाकिया ने संबंधों को व्यापक साझेदारी तक बढ़ाया: विदेश मंत्रालय

भारत और स्लोवाकिया ने संबंधों को व्यापक साझेदारी तक बढ़ाया: विदेश मंत्रालय

ब्रातिस्लावा, 16 जून (आईएएनएस)। भारत और स्लोवाकिया ने अपने आपसी संबधों को 'व्यापक साझेदारी' का दर्जा दिया। विदेश मंत्रालय ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ब्रातिस्लावा का ऐतिहासिक दौरा अलग-अलग क्षेत्रों में सहयोग को नई रफ्तार देगा।

वर्ष 1993 में स्लोवाकिया की स्वतंत्रता के बाद से किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली ऐतिहासिक यात्रा है, जिसके दौरान दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को एक नई ऊंचाई मिली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐतिहासिक ब्रातिस्लावा कैसल में अपने स्लोवाक समकक्ष प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की व्यापक वार्ता की। इसके बाद, दोनों नेताओं की उपस्थिति में 11 समझौतों और समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान हुआ।

ब्रातिस्लावा में मीडिया को जानकारी देते हुए विदेश सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने बेहतर संबंधों की बदलाव लाने की क्षमता पर जोर देते हुए कहा कि यह दौरा यूरोपीय देश के साथ संबंधों को मजबूत करने की भारत की प्रतिबद्धता को सुनिश्चित करता है।

सिबी जॉर्ज ने मीडिया से कहा, "यह दौरा स्लोवाकिया के साथ संबंधों को मजबूत करने के भारत की प्रतिबद्धता को सुनिश्चित करता है और अलग-अलग क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को नई रफ्तार देगा। संबंधों को एक व्यापक साझेदारी तक ले जाने से द्विपक्षीय संबंध एक नए स्तर पर पहुंचेंगे, मौजूदा सहयोग सिस्टम मजबूत होंगे और द्विपक्षीय और बहुपक्षीय, दोनों तरह से सहयोग को गहरा करने के नए रास्ते तलाशेंगे।"

विदेश सचिव पश्चिम ने कई उच्च-स्तरीय बैठकों के बाद मीडिया से बातचीत के दौरान बताया कि इन बैठकों में प्रधानमंत्री मोदी की स्लोवाक राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी के साथ प्रेसिडेंशियल पैलेस में मीटिंग भी शामिल थी। यहां प्रधानमंत्री मोदी को स्लोवाकिया का सबसे बड़ा नागरिक सम्मान, ऑर्डर ऑफ द व्हाइट डबल क्रॉस (फर्स्ट क्लास) दिया गया।

प्रधानमंत्री मोदी और उनके समकक्ष ने भारत और स्लोवाक रिपब्लिक के बीच संबंध को एक व्यापक साझेदारी तक बढ़ाने पर सहमति जताई। व्यापक साझेदारी का मकसद दोनों देशों के संबंधों को एक नए स्तर पर ले जाना, मौजूदा सहयोग के तरीकों को मजबूत करना और दोनों देशों के बीच सहयोग को गहरा करने के नए रास्ते तलाशना है।

हिंद-प्रशांत के बढ़ते भू-राजनीतिक, आर्थिक और तकनीकी महत्व को पहचानते हुए, दोनों नेताओं ने आपसी फायदे वाले सहयोग, क्षेत्रीय जुड़ाव, खुले अंतरराष्ट्रीय व्यापार, नेविगेशन की आजादी, विवादों के शांतिपूर्ण समाधान और नियमों पर आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के समर्थन में भारत और स्लोवाकिया के बीच एक मजबूत साझेदारी की अहमियत को माना।

दोनों नेताओं ने लगातार उच्च-स्तरीय और राजनीतिक बातचीत की अहमियत पर जोर दिया और सभी स्तर पर प्रतिनिधिमंडल के लेन-देन को बढ़ाने पर सहमत हुए।

इसके अलावा, दोनों पक्ष आपसी समझ को बढ़ाने और लेजिस्लेटिव अनुभवों और बेस्ट प्रैक्टिस को शेयर करने के मकसद से पार्लियामेंट्री एक्सचेंज, जुड़ाव और सहयोग बढ़ाने पर भी सहमत हुए।

उन्होंने संयुक्त राष्ट्र को केंद्र में रखकर बहुपक्षवाद और नियमों पर आधारित अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। साथ ही, उन्होंने संयुक्त राष्ट्र, खासकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद समेत बहुपक्षीय संस्थाओं में बड़े सुधारों का समर्थन किया, ताकि उन्हें आज की भू-राजनीतिक सच्चाइयों को अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण, समावेशी, प्रभावी और वर्तमान भू-राजनीतिक वास्तविकताओं के अनुरूप बनाया जा सके।

दोनों देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को स्थायी और अस्थायी, दोनों श्रेणी में सदस्यता बढ़ाने की तुरंत जरूरत पर जोर दिया। इस मामले में, भारत ने सुधारी हुई और बढ़ाई गई यूएनएससी में भारत की स्थायी सदस्यता के लिए स्लोवाकिया के लगातार समर्थन की सराहना की।

दोनों नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय संगठन में अपनी-अपनी उम्मीदवारी पर कंसल्टेशन और कोआर्डिनेशन जारी रखने और यूएन समेत ग्लोबल फोरम पर विचारों का आदान-प्रदान करने और करीब से सहयोग करने पर भी सहमति जताई। इसके अलावा, ग्लोबल नॉनप्रोलिफरेशन आर्किटेक्चर को बनाए रखने के महत्व पर भी चर्चा की।

स्लोवाकिया ने न्यूक्लियर सप्लायर्स समूह में भारत की सदस्यता के लिए अपने कंस्ट्रक्टिव अप्रोच की फिर से पुष्टि की।

--आईएएनएस

केके/एएस