नई दिल्ली, 18 अगस्त (आईएएनएस)। आसियान का डिजिटल इकोनॉमी फ्रेमवर्क एग्रीमेंट (डेफा) भारत के लिए दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ डिजिटल क्षेत्र में व्यापक और गहरे जुड़ाव का एक मॉडल पेश करता है। एक नई रिपोर्ट में यह बात कही गई है।
‘द जकार्ता पोस्ट’ की रिपोर्ट के मुताबिक, इस समझौते ने अलग-अलग देशों में समान घरेलू कानून लागू करने की जरूरत के बजाय साझा व्यावसायिक परिणामों और एक-दूसरे के अनुरूप प्रणालियों के जरिए “प्रबंधित अंतर-संचालन” (मैनेज्ड इंटरऑपरेबिलिटी) का रास्ता तैयार किया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि डेफा डिजिटल व्यापार और सेवाओं के लिए क्षेत्रव्यापी ढांचा तैयार करता है, लेकिन इसे आसियान-भारत व्यापार वस्तु समझौते में शामिल करना प्रतिकूल हो सकता है। इससे वस्तु-केंद्रित बातचीत का दायरा बढ़ने के साथ डेटा गवर्नेंस, निजता, प्रतिस्पर्धा और ऑनलाइन नियमन जैसे अनसुलझे मुद्दे भी वार्ता में शामिल हो जाएंगे।
मई में मनीला में अंतिम रूप दिए गए डेफा में डिजिटल व्यापार, सीमा पार ई-कॉमर्स, भुगतान और ई-इनवॉयसिंग, डिजिटल पहचान, सीमा पार डेटा प्रवाह और डेटा संरक्षण, ऑनलाइन सुरक्षा, साइबर सुरक्षा तथा उभरती प्रौद्योगिकियों समेत नौ क्षेत्र शामिल हैं।
वहीं, एआईटीआईजीए अभी भी वस्तुओं के व्यापार से संबंधित समझौता है। इसकी समीक्षा में बाजार पहुंच, मूल के नियम, सीमा शुल्क एवं व्यापार सुविधा, मानक, स्वच्छता एवं पादप स्वच्छता संबंधी उपाय, व्यापार उपचार तथा कानूनी और संस्थागत प्रावधानों जैसे मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
आसियान और भारत ने 2026 में एआईटीआईजीए की समीक्षा पूरी करने का लक्ष्य रखा है। वार्ता में नई दिल्ली की वस्तु व्यापार घाटे को लेकर चिंता और आसियान की अधिक सरल एवं व्यापार-अनुकूल समझौते की मांग महत्वपूर्ण मुद्दे बने हुए हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि डेफा का बातचीत के जरिए तैयार किया गया पाठ अभी सार्वजनिक नहीं हुआ है। इसलिए समझौते की वास्तविक गहराई, अपवादों और प्रावधानों को लागू कराने की क्षमता हस्ताक्षर के बाद ही स्पष्ट होगी।
रिपोर्ट के मुताबिक, समान कानूनी व्यवस्था बनाने के बजाय आसियान ने “प्रबंधित अंतर-संचालन” का रास्ता अपनाया है। इससे अलग-अलग नियामक क्षमताओं वाले देश लचीलेपन, चरणबद्ध क्रियान्वयन और क्षमता निर्माण के जरिए सहयोग कर सकते हैं।
डेफा आसियान के पहले के डिजिटल प्रयासों पर आधारित है। इनमें 2019 का आसियान ई-कॉमर्स समझौता भी शामिल है, जो 2021 में लागू हुआ था। इस समझौते में सदस्य देशों ने इलेक्ट्रॉनिक लेनदेन को सुविधाजनक बनाने की प्रतिबद्धता जताई थी, साथ ही अलग-अलग देशों के घरेलू कानूनों और नियामकीय विकास में अंतर को मान्यता दी गई थी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इसके बाद आसियान ने इंटरऑपरेबल भुगतान प्रणालियों, इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेजों, डिजिटल पहचान और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर स्वैच्छिक दिशानिर्देशों में प्रगति की है। डेफा इसी मौजूदा डिजिटल ढांचे को आगे बढ़ाता है, न कि इसे बिल्कुल नए सिरे से तैयार करता है।
--आईएएनएस
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