अमेरिकी हमलों में मारे गए भारतीय नाविकों के लिए एफएसयूआई ने ट्रंप और भारत सरकार से की मुआवजे की मांग

अमेरिकी हमलों में मारे गए भारतीय नाविकों के लिए एफएसयूआई ने ट्रंप और भारत सरकार से की मुआवजे की मांग

नई दिल्ली, 15 जून (आईएएनएस)। अमेरिका और ईरान में फरवरी से शुरू हुए तनाव का असर दुनिया के अन्य देशों पर भी देखने को मिला। होर्मुज स्ट्रेट दोनों देशों के बीच तनाव के अहम मुद्दों में से एक रहा। हालांकि, अमेरिका और ईरान के बीच अब शांति समझौते का ऐलान कर दिया गया है। ऐसे में अमेरिकी हमलों में मारे गए भारतीय नाविकों के लिए नाविकों के अधिकारों की बात करने वाले संगठन फॉरवर्ड सीमेन यूनियन ऑफ इंडिया (एफएसयूआई) के महासचिव मनोज यादव ने भारत और अमेरिकी सरकार से 1 करोड़ मुआवजे की मांग की है।

एफएसयूआई के जनरल सेक्रेटरी मनोज यादव ने न्यूज एजेंसी आईएएनएस से कहा, "हम नाविकों की तरफ से इस शांति समझौते का स्वागत करते हैं। आज सुबह मीडिया में इसकी जानकारी दी गई और ईरान के उप विदेश मंत्री ने इसका समर्थन किया। अगर यह समझौता सच होता है तो हम बधाई देना चाहेंगे, क्योंकि अभी हजारों भारतीय नाविक वहां फंसे हुए हैं। पिछले हफ्ते, कई ऐसी घटनाएं सामने आईं, जिनमें भारतीय नाविकों और जहाजों पर हमला किया गया है। बदकिस्मती से, इन घटनाओं में हमने अपने तीन नाविकों को भी खो दिया है।"

भारतीय नाविकों की मौत को लेकर उन्होंने कहा, "प्राकृतिक मौत एक बात है और एक्सीडेंटल मौत दूसरी। इन नाविकों की मौत बहुत अलग हालात में हुई और बयान के मुताबिक अमेरिका इसके लिए पूरी तरह से जिम्मेदार है। इन नाविकों ने लड़ाई में शामिल न होने के बावजूद अपनी जान गंवा दी।"

उन्होंने भारत सरकार से मारे गए नाविकों के परिवारों के लिए मुआवजे के तौर पर 1 करोड़ की मांग की। ट्वीट करके यह भी अपील की गई है कि हर प्रभावित परिवार को पांच मिलियन डॉलर का मुआवजा दिया जाए। इसमें अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी शामिल हैं।"

इससे पहले 35 वर्षीय निशांत उर्थनाथन की मौत की जानकारी देते हुए फॉरवर्ड सीमेन्स यूनियन ऑफ इंडिया (एफएसयूआई) ने कहा था, "नाविकों के लिए एक और दुखद घटना है। एमटी सेलेस्टियल के दूसरे अधिकारी की 11 तारीख को शाम 6 बजे समय पर मेडिकल मदद न मिलने की वजह से मौत हो गई। दो दिन बाद भी पार्थिव शरीर जहाज पर ही है। ओमान के पोर्ट दुकम ने वाई-फाई/कम्युनिकेशन बंद कर दिया है और अधिकारी कोई जवाब नहीं दे रहे हैं। नाविकों की परवाह कौन करता है? वे दुनियाभर का व्यापार चलाते हैं, लेकिन उन झगड़ों में मेडिकल देखभाल और वापसी में अनदेखी का सामना करते हैं जिनसे उनका कोई लेना-देना नहीं होता।"

एफएसयूआई, भारतीय नाविकों और मर्चेंट नेवी के कर्मचारियों के अधिकारों के लिए लड़ने वाला देश का सबसे बड़ा और पुराना व्यापार संघ है।

--आईएएनएस

केके/वीसी