हेलसिंकी, 20 अगस्त (आईएएनएस)। जंगली सूअरों में अफ्रीकी स्वाइन फीवर के मामले बढ़ने से फिनलैंड के पोर्क निर्यात पर असर पड़ा है। फिनलैंड की कृषि और वानिकी मंत्री सारी एसायाह ने कहा कि देश अपने दक्षिण-पूर्वी इलाके में अफ्रीकी स्वाइन फीवर (एएसएफ) वाले प्रतिबंधित क्षेत्र के कुछ हिस्सों में बाड़ लगाने की योजना बना रहा है। जंगली सूअरों में संक्रमण के मामले बढ़कर 19 होने के बाद यह कदम उठाया जा रहा है।
एसायाह ने बुधवार (स्थानीय समय) को कहा कि जिस इलाके में बाड़ लगाई जानी है, उसे अभी तय किया जाना बाकी है। उन्होंने कहा कि बीमारी को फैलने से रोकने के लिए आने वाले महीनों में बाड़ लगाने का काम किया जाएगा। फिनिश फूड अथॉरिटी की ओर से दक्षिण-पूर्वी फिनलैंड में लगभग 1,500 वर्ग किलोमीटर का एक प्रतिबंध क्षेत्र बनाया गया है। सिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, जैसे-जैसे और संक्रमण का पता चला है, इस क्षेत्र में बदलाव किए गए हैं।
अथॉरिटी की ओर से बताया गया कि बुधवार तक 19 जंगली सूअरों में एएसएफ की पुष्टि हुई है, जबकि पालतू सूअरों में कोई संक्रमण नहीं पाया गया है। जुलाई के आखिर में जब रूसी सीमा के पास विरोलाहटी की दक्षिण-पूर्वी नगरपालिका के वालिमा में तीन जंगली सूअर के बच्चे मरे हुए मिले थे, तब सबसे पहले इस बिमारी का पता चला था।
इसके बाद अधिकारियों ने प्रभावित इलाकों में सूअरों की आवाजाही पर रोक और शिकार व कुछ वानिकी गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा दिए थे। इस बीमारी ने फिनलैंड के पोर्क (सूअर के मांस) के निर्यात पर असर डाला है। फिनिश मीडिया की ओर से बुधवार को रिपोर्ट दी गई कि कई देशों ने फिनिश पोर्क के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया है या उसे रोक दिया है।
फिनिश फूड एंड ड्रिंक इंडस्ट्रीज फेडरेशन (ईटीएल) की विशेषज्ञ रीटा राहकिला ने कहा कि एएसएफ-मुक्त दर्जा विदेशी बाजारों में फिनिश पोर्क के लिए एक बड़ा फायदा था। ईटीएल के अनुसार, देश ने पिछले साल लगभग 74 मिलियन यूरो (85 मिलियन अमेरिकी डॉलर) मूल्य का पोर्क निर्यात किया था। फिनिश फूड अथॉरिटी की निदेशक सिरपा किविरुसु ने कहा कि फिनलैंड को अपना एएसएफ-मुक्त दर्जा वापस पाने में कम से कम एक साल लगेगा, जबकि आयात प्रतिबंधों की अवधि अलग-अलग व्यापारिक साझेदारों पर निर्भर करेगी।
सरकार अब तक पशु स्वास्थ्य और खाद्य कानूनों के तहत जरूरी मुआवजे से ज्यादा मुआवजा देने में हिचकिचाती रही है। एएसएफ एक बहुत तेजी से फैलने वाली वायरल बीमारी है जो पालतू सूअरों और जंगली सूअरों को प्रभावित करती है। यह संक्रमित जानवरों के लिए अक्सर जानलेवा होती है, लेकिन इंसानों को संक्रमित नहीं करती है।
--आईएएनएस
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