'योग नगरी' मुंगेर में उत्साह के साथ मनाया गया अंतरराष्ट्रीय योग दिवस, आश्रम से लेकर घर तक योगाभ्यास

'योग नगरी' मुंगेर में उत्साह के साथ मनाया गया अंतरराष्ट्रीय योग दिवस, आश्रम से लेकर घर तक योगाभ्यास

मुंगेर, 21 जून (आईएएनएस)। योग नगरी के रूप में चर्चित मुंगेर में 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस रविवार को पूरे उत्साह, श्रद्धा और सहभागिता के साथ मनाया गया। इस अवसर पर बिहार योग विद्यालय, मुंगेर द्वारा वर्षों से संचालित अनूठी पहल 'आश्रम के प्रांगण से लेकर घर के छत-आंगन तक योग' के तहत लोगों को अपने परिवार एवं समुदाय के साथ घरों, आंगनों और खुले स्थानों पर सामूहिक योगाभ्यास के लिए प्रेरित किया गया।

बिहार योग विद्यालय ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की घोषणा के साथ ही इस पहल की शुरुआत की थी, जिसके अंतर्गत प्रत्येक वर्ष एक विशेष योग कार्यक्रम तैयार कर लोगों को एक निर्धारित समय पर एकजुट होकर योग करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। आश्रम के संन्यासियों और योग प्रशिक्षकों ने योगाभ्यासियों को योग की सरलता, उपयोगिता तथा नियमित अभ्यास के महत्व से अवगत कराया।

योग दिवस के मुख्य कार्यक्रम का आयोजन बिहार योग विद्यालय के पादुका दर्शन परिसर में किया गया, जहां वरिष्ठ संन्यासी स्वामी कैवल्यानंद के मार्गदर्शन में बड़ी संख्या में साधकों ने योगाभ्यास किया। इस अवसर पर योग साधकों को दयालुता और सद्भावना को अपने जीवन, संबंधों और कार्यों का आधार बनाने का संदेश दिया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत महामृत्युंजय मंत्र, गायत्री मंत्र तथा देवी दुर्गा के 32 नामों के सामूहिक पाठ से हुई। इसके बाद प्रतिभागियों ने आकर्ण धनुरासन, समकोणासन, द्विकोणासन, एकपाद प्रणामासन, अर्द्ध उष्ट्रासन, शशांकासन, मार्जरी आसन, सर्पासन, कंधरासन, विपरीतकरणी आसन, मत्स्यासन और शवासन सहित विभिन्न योगासनों का अभ्यास किया। साथ ही नाड़ी शोधन एवं भ्रामरी प्राणायाम तथा प्रत्याहार की विधियों का भी अभ्यास कराया गया।

स्वामी कैवल्यानंद ने कहा, "योग केवल शरीर को स्वस्थ रखने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह जीवन को संतुलित, समरस और जागरूक बनाने वाली दिव्य साधना है। इन अभ्यासों से व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य का समग्र विकास होता है।"

कार्यक्रम में यौगिक जीवनशैली के मूल सिद्धांतों पर भी विशेष बल दिया गया। परमहंस स्वामी निरंजनानंद सरस्वती की प्रेरणा से इस वर्ष 'दयालुता' को यम और 'संतोष' को नियम के रूप में अपनाने का आह्वान किया गया। वक्ताओं ने कहा कि यदि इन सिद्धांतों का निष्ठापूर्वक पालन किया जाए तो न केवल व्यक्ति की मनोदशा में सकारात्मक परिवर्तन आता है, बल्कि आसपास का वातावरण भी बेहतर बनता है।

इस अवसर पर स्वामी सत्यानंद सरस्वती के उस दृष्टिकोण को भी याद किया गया, जिसमें उन्होंने छह दशक पहले ही भविष्यवाणी की थी कि योग एक वैश्विक संस्कृति के रूप में उभरेगा और विश्व की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। आज विश्वभर में योग को मिली व्यापक मान्यता उनकी दूरदृष्टि का प्रमाण है। बिहार योग विद्यालय ने 2013 के विश्व योग सम्मेलन के बाद शुरू हुए योग के दूसरे अध्याय का भी उल्लेख किया, जिसके तहत योग को केवल एक घंटे के अभ्यास तक सीमित न रखकर संपूर्ण "यौगिक जीवनशैली" के रूप में अपनाने पर जोर दिया जा रहा है।

कार्यक्रम के अंत में सभी के जीवन में योग की प्रेरणा निरंतर बनी रहे तथा विश्व में शांति, सद्भाव और स्वास्थ्य का विस्तार हो, इसके लिए सामूहिक प्रार्थना की गई।

--आईएएनएस

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