पश्चिम बंगाल की नई औद्योगिक नीति फिर टली, अब दुर्गा पूजा के बाद जारी होने की उम्मीद

पश्चिम बंगाल में नई औद्योगिक नीति की घोषणा में देरी
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कोलकाता, 21 सितंबर (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल में दो बार समयसीमा चूकने के बाद राज्य की नई औद्योगिक नीति के अक्टूबर से पहले घोषित होने की संभावना नहीं है। राज्य सचिवालय 'नबन्ना' के सूत्रों के मुताबिक अब इसके अगले महीने के मध्य में दुर्गा पूजा समाप्त होने के बाद ही जारी किए जाने की उम्मीद है।

नई औद्योगिक नीति को अंतिम रूप देकर घोषित करने की पहली समयसीमा स्वतंत्रता दिवस के मौके पर 15 अगस्त तय की गई थी, हालांकि यह समयसीमा निकल गई और इसके बाद नई नीति की घोषणा के लिए सितंबर के मध्य का समय तय किया गया।

प्रक्रिया से जुड़े सचिवालय के एक सूत्र ने बताया कि नई नीति को अंतिम रूप देने के लिए अभी कुछ काम बाकी है। इसलिए इसकी घोषणा अगले महीने और संभवतः दुर्गा पूजा के बाद की जाएगी।

सूत्र के मुताबिक, नीति से जुड़े बाकी पहलुओं पर काम पूरा हो चुका है, लेकिन उद्योगों के लिए जमीन खरीदने की नीति को अंतिम रूप देने में मुख्य समस्या आ रही है। सरकार ऐसी व्यवस्था तैयार करने की कोशिश कर रही है, जिसमें राज्य सरकार और जमीन मालिकों, दोनों के हितों की रक्षा हो सके।

उद्योगों के लिए कृषि भूमि खरीदने की स्थिति में जमीन मालिकों के साथ बटाईदारों और खेतिहर मजदूरों के हितों की भी रक्षा करनी होगी। इन सभी बातों को ध्यान में रखने के कारण उद्योगों के लिए जमीन खरीदने की नीति को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया थोड़ी जटिल हो गई है। पश्चिम बंगाल में जमीन हमेशा से एक संवेदनशील मुद्दा रहा है। राज्य में जमीन छोटे-छोटे हिस्सों में बंटी हुई है, जिसके कारण मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र के बड़े उद्योगों के लिए एक साथ जमीन का बड़ा हिस्सा हासिल करना अक्सर मुश्किल हो जाता है।

राज्य सरकार इस मुद्दे पर एक बात को लेकर स्पष्ट है। सरकार न तो जमीन लेने के लिए पुराने अधिग्रहण नियमों को लागू करेगी और न ही जमीन खरीदने की पूरी जिम्मेदारी निवेशकों या उद्योगपतियों पर छोड़ेगी।

सूत्र ने कहा, "पश्चिम बंगाल में जमीन छोटे-छोटे हिस्सों में बंटी हुई है। ऐसे में निवेशकों के लिए बड़ी संख्या में जमीन मालिकों से संपर्क करना और उनसे बातचीत करके जमीन हासिल करना बेहद मुश्किल है। इसलिए नई नीति के तहत राज्य सरकार जमीन मालिकों से बातचीत करेगी, उनसे सीधे जमीन खरीदेगी और बाद में खरीदी गई जमीन निवेशकों को सौंपेगी।"

इसके साथ ही राज्य सरकार एक ऐसा फॉर्मूला तैयार करने की भी कोशिश कर रही है, जिसके तहत जमीन देने वाले मालिकों को संबंधित औद्योगिक इकाइयों में भागीदार बनाया जा सके।

सरकारी अधिकारी के मुताबिक, इसके लिए दो विकल्प हो सकते हैं। पहला विकल्प यह है कि जमीन देने वाले परिवार के एक सदस्य को प्रस्तावित औद्योगिक इकाई में नौकरी दी जाए। दूसरा विकल्प जमीन मालिकों को ऐसे छोटे व्यवसाय शुरू करने का अवसर देना है, जो मुख्य औद्योगिक इकाई को अप्रत्यक्ष रूप से जरूरी सेवाएं या सहायता उपलब्ध करा सकें।

--आईएएनएस

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