कोलकाता, 21 सितंबर (आईएएनएस)। राज्य में फर्जी डॉक्टरों के मामले सामने आने के बाद पश्चिम बंगाल मेडिकल काउंसिल ने सोमवार को राज्य में प्रैक्टिस कर रहे डॉक्टरों के पिछले 17 वर्षों के पंजीकरण का ऑडिट शुरू किया है।
राज्य मेडिकल काउंसिल के सूत्रों ने बताया कि मेडिकल पंजीकरण ऑडिट सोमवार से शुरू हो गई है और इस प्रक्रिया के तहत, पिछले 17 वर्षों की पंजीकरण जानकारी की जांच की जाएगी ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस अवधि के दौरान फर्जी या अनियमित पंजीकरण के मामले तो नहीं हुए हैं।
एक सूत्र ने बताया कि यदि कोई फर्जी डॉक्टर पाया जाता है, तो उसका एमबीबीएस पंजीकरण रद्द कर दिया जाएगा और संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के लिए पुलिस में एफआईआर दर्ज की जाएगी। हमने संबंधित एजेंसियों से पिछले 17 वर्षों की जानकारी एक्सेल फॉर्मेट में भेजने का अनुरोध किया है।
संबंधित एजेंसियों को पिछले 17 वर्षों में हुए पंजीकरणों का विवरण देने को कहा गया है, जिसमें संबंधित डॉक्टरों के नाम, उन्हें आवंटित पंजीकरण संख्या, उनके पिता का नाम, लिंग विवरण, वर्तमान पता, प्राथमिक शैक्षणिक योग्यताएं और एमबीबीएस डिग्री प्रदान करने वाले विश्वविद्यालय का नाम शामिल है।
इसके अतिरिक्त, मेडिकल काउंसिल के सूत्रों ने बताया कि यदि किसी डॉक्टर के पास अतिरिक्त शैक्षणिक योग्यताएं हैं, तो उन योग्यताओं का विवरण और उन्हें प्रदान करने वाले विश्वविद्यालय का नाम भी देना होगा।
सूत्र ने बताया कि पंजीकरण संख्या या डॉक्टरों के नाम ही नहीं, बल्कि उनकी विस्तृत शैक्षणिक योग्यता और डिग्री प्रदान करने वाले संस्थानों की जानकारी की भी जांच की जा रही है।
15 सितंबर को, निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम संघ (एपीएचएन) के सचिव राजीव पांडे ने बिधाननगर पुलिस आयुक्त कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई और राज्य में फर्जी डॉक्टरों के पंजीकरण में कथित वृद्धि के संबंध में पश्चिम बंगाल चिकित्सा परिषद के वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ जांच की मांग की।
शिकायत में परिषद के अध्यक्ष सुदीप्ता रॉय, सचिव सुशांत रॉय, रजिस्ट्रार मानस चक्रवर्ती, परिषद सदस्य विधायक निर्मल माजी और अन्य के नाम शामिल हैं। रॉय और माजी दोनों तृणमूल कांग्रेस के पूर्व विधायक हैं।
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