नई दिल्ली, 9 अगस्त (आईएएनएस)। पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है कि नीट परीक्षा के पेपर लीक मुद्दे पर हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान कुछ लोगों ने जेन जी को गुमराह करने की कोशिश की थी। धर्मेंद्र प्रधान के इस बयान पर विपक्ष के नेताओं ने प्रतिक्रियाएं दी हैं।
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा, "मुझे लगा था कि इस्तीफे के बाद धर्मेंद्र प्रधान कायदे की बात करेंगे, लेकिन ऐसा लगता है कि वे अभी भी किसी दूसरी ही दुनिया में जी रहे हैं। शिक्षा मंत्री के तौर पर उनके कार्यकाल में शिक्षा का व्यवसायीकरण हुआ। पैसे लेकर प्रश्न-पत्र लीक किए गए। धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा व्यवस्था की आजादी को पूरी तरह खत्म कर दिया और उसे आरएसएस के प्रभाव में ले आए। मैं बस इतना कहना चाहता हूं कि आपको (धर्मेंद्र प्रधान) बहुत पहले ही इस्तीफा दे देना चाहिए था।"
धर्मेंद्र प्रधान के बयान पर आरजेडी सांसद मनोज कुमार झा ने कहा, "अगर आपको लगता है कि आप अगली पीढ़ी को गुमराह कर सकते हैं, तो आप उस पीढ़ी को जानते नहीं हैं। हममें से कितने लोग, मैं सिर्फ धर्मेंद्र प्रधान का नाम नहीं ले रहा, सच में उनकी भाषा और उनकी भावनाओं को समझते थे? जब उनके पैरों तले जमीन हिलने लगी, तब हम सबको इसका एहसास हुआ, और सरकार को तो सबसे आखिर में पता चला। इस नजरिए से देखें तो लोगों को गुमराह करने वाली थ्योरी काम नहीं करती।"
कांग्रेस सांसद मनोज कुमार ने कहा, "मैं धर्मेंद्र प्रधान से पूछना चाहता हूं, क्या पेपर लीक की पुष्टि हुई या नहीं? क्या परीक्षा में शामिल होने वाले 20-22 लाख छात्रों को परेशानी हुई या नहीं? क्या दर्जनों छात्रों ने आत्महत्या की या नहीं? उन्हें गुमराह किसने किया? आपको यह समझना चाहिए कि ये छात्र हमारे बच्चे हैं और हमारा भविष्य हैं। युवा जागरूक हैं, इनके साथ अन्याय हुआ है। विरोध-प्रदर्शन करने वाले बच्चों को किसी ने नहीं गुमराह किया। सभी जाति, धर्म और संप्रदाय के बच्चे थे, जिन्होंने अपनी आवाज बुलंद की। इसके विपरीत छात्रों पर सरकार की ओर से लाठीचार्ज किया गया।"
सीपीआई (एम) के पूर्व सांसद हन्नान मोल्लाह ने कहा, "शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद करने के लिए धर्मेंद्र प्रधान जिम्मेदार हैं। केंद्र सरकार नई शिक्षा नीति के तहत शिक्षा को खत्म करने की साजिश कर रही है, जिसके धर्मेंद्र प्रधान सूत्रधार थे। छात्रों ने किसी के बहकावे में आकर आंदोलन नहीं किए थे। भाजपा के शासन काल में करीब 125 पेपर लीक हुए हैं। इसके बावजूद सरकार और धर्मेंद्र प्रधान अपनी गलती मानने की बजाय विपक्ष पर आरोप लगा रही है। युवाओं ने सरकार को मुंहतोड़ जवाब दिया है।"
झारखंड में छात्रों के विरोध-प्रदर्शन पर हन्नान मोल्लाह ने कहा, "झारखंड में भाजपा की सरकार नहीं है। वहां एक लोकतांत्रिक सरकार है, जिसे लोगों की चिंता और उनके प्रति सहानुभूति है। इसलिए, जब वहां यह घटना हुई, तो सरकार ने भाजपा की तरह इसे नजरअंदाज नहीं किया। उसने तुरंत दखल दिया। सरकार ने छात्रों से सम्मानपूर्वक बात की, और बातचीत के दो दौर हो चुके हैं। सरकार उनकी चिंताओं को मान रही है और इसका समाधान निकालेगी। भाजपा सरकार ऐसी चिंताओं को खारिज कर देती थी। वह एक फासीवादी, जन-विरोधी और छात्र-विरोधी सरकार है। इसलिए, झारखंड सरकार का नजरिया अलग है। हमारा मानना है कि इस मुद्दे का समाधान लोकतांत्रिक तरीके से होगा।"
सीपीआई (एम) सांसद वी. शिवदासन ने कहा, "धर्मेंद्र प्रधान ने भी नवीन बाबू के खिलाफ बयान दिया है। उनकी समझ पूरी तरह गलत है। छात्र समुदाय के संघर्ष की वजह से उन्हें अपना पद गंवाना पड़ा। छात्रों ने एक जायज मांग उठाई है। इस सरकार की नीतियों के कारण परीक्षा के प्रश्न-पत्र लीक हुए और 50 से ज़्यादा बार दोबारा परीक्षाएं करानी पड़ीं।"
--आईएएनएस
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