दीपक प्रकाश की मंत्री पद पर दोबारा नियुक्ति मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नोटिस

दीपक प्रकाश की मंत्री पद पर दोबारा नियुक्ति मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नोटिस

नई दिल्ली/पटना, 15 जून (आईएएनएस)। सुप्रीम कोर्ट ने बिहार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश की मंत्री पद पर दोबारा नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किए हैं। ये नोटिस बिहार सरकार, दीपक प्रकाश और चुनाव आयोग को भेजे गए हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक रिट याचिका पर नोटिस जारी किए। इस याचिका में दीपक प्रकाश को बिना विधायक चुने बिहार का पंचायती राज मंत्री दोबारा बनाए जाने को चुनौती दी गई है।

याचिकाकर्ता राकेश कुमार सिंह का तर्क है कि दीपक प्रकाश विधानसभा या विधान परिषद के सदस्य नहीं हैं, इसलिए राज्य सरकार के मंत्रालय में कोई पद नहीं संभाल सकते। याचिका में कहा गया है कि संविधान के अनुच्छेद 164(4) के अनुसार, कोई व्यक्ति जो विधायक नहीं है, वह लगातार छह महीने तक मंत्री रह सकता है, लेकिन इस दौरान उसे राज्य विधानमंडल की सदस्यता हासिल करनी होगी। यह छूट सिर्फ एक बार मिलने वाला मौका है और सरकार बदलने पर इसे दोबारा इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

याचिका के अनुसार, प्रकाश को तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 20 नवंबर 2025 को मंत्री बनाया था, जबकि वे विधानसभा के सदस्य नहीं थे। 15 अप्रैल 2026 को नीतीश कुमार की सरकार गिर गई, जिससे मंत्रिपरिषद भंग हो गई। 22 दिनों के अंतराल के बाद 7 मई को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली नई सरकार ने प्रकाश को फिर से मंत्री नियुक्त किया। 20 नवंबर 2025 को पहली नियुक्ति से दोबारा चुने जाने के लिए 6 महीने का समय 20 मई 2026 को खत्म हो गया।

याचिकाकर्ता ने कहा कि ऐसे में दोबारा नियुक्ति करके उन्हें अतिरिक्त समय देने की कोशिश की गई है। उन्होंने यह भी तर्क है कि बिना चुने गए व्यक्तियों को बार-बार मंत्री पद पर नियुक्त करने की अनुमति देने से संसदीय लोकतंत्र, प्रतिनिधि सरकार, सामूहिक जिम्मेदारी और चुनावी जवाबदेही के सिद्धांतों को नुकसान पहुंचेगा।

सोमवार को सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की दलील सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार, दीपक प्रकाश और चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया।

--आईएएनएस

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