नई दिल्ली/चेन्नई, 14 जुलाई (आईएएनएस)। दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून फिलहाल कमजोर बना हुआ है, जिसके कारण कई राज्यों में सामान्य से कम वर्षा दर्ज की जा रही है। मौसम विभाग के क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र (आरएमसी), चेन्नई के अनुसार, वर्तमान मौसमीय परिस्थितियों के चलते केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और आसपास के क्षेत्रों में मानसूनी गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। हालांकि, 17 जुलाई के बाद मानसून में धीरे-धीरे सुधार आने और बारिश की गतिविधियों के बढ़ने की संभावना जताई गई है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, मानसून के कमजोर पड़ने के पीछे मुख्य कारण भूमध्य रेखा को पार करने वाली दक्षिण-पश्चिमी हवाओं का कमजोर होना है। इसके चलते पश्चिमी अरब सागर के ऊपर बनने वाला 'लो-लेवल जेट' या 'सोमाली जेट' सामान्य से कमजोर बना हुआ है। इसके अलावा, प्रशांत महासागर में विकसित हो रही अल नीनो जैसी परिस्थितियां भी मानसून को प्रभावित कर रही हैं।
इन कारणों से अरब सागर से आने वाली नमी में कमी आई है, जिससे दक्षिण भारत के कई हिस्सों में अपेक्षित वर्षा नहीं हो रही। मानसून के कमजोर परिसंचरण और वायुमंडल में नीचे की ओर हवा के प्रवाह (सब्सिडेंस) के कारण बादलों का निर्माण भी कम हो रहा है। परिणामस्वरूप, अधिकांश क्षेत्रों में आसमान साफ रहने से सूर्य की किरणें सीधे धरातल तक पहुंच रही हैं, जिससे अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक दर्ज किया जा रहा है।
इसी स्थिति को देखते हुए क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र, चेन्नई ने तमिलनाडु के आंतरिक जिलों, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के कुछ हिस्सों के लिए लू (हीट वेव) की चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग का कहना है कि इन क्षेत्रों में लोगों को अत्यधिक गर्मी से बचने के लिए आवश्यक सावधानियां बरतनी चाहिए।
हालांकि, राहत की खबर यह है कि भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के जीएफएस (12 किलोमीटर) मॉडल के विश्लेषण के अनुसार 17 जुलाई के आसपास 'लो-लेवल जेट' के धीरे-धीरे मजबूत होने की संभावना है। इसके चलते अरब सागर से नमी का प्रवाह बढ़ेगा और दक्षिण-पश्चिम मानसून दोबारा सक्रिय होने लगेगा।
मौसम विभाग का अनुमान है कि 17 जुलाई के बाद केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु और आसपास के क्षेत्रों में वर्षा की गतिविधियों में तेजी आएगी। बारिश बढ़ने और बादल छाने से तापमान में भी गिरावट आएगी और लू की स्थिति धीरे-धीरे समाप्त होने लगेगी।