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परिसीमन बिल पर थलपति विजय के रुख पर सियासत, कांग्रेस बोली- कोई बदलाव नहीं

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भुवनेश्वर, 21 अगस्त (आईएएनएस)। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थलपति विजय की मुलाकात के बाद उनके परिसीमन बिल पर रुख बदलने की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया था। इस बीच कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि विजय के रुख में कोई बदलाव नहीं आया है।

भुवनेश्वर में आईएएनएस से बात करते हुए कांग्रेस नेता संतोष सिंह सलूजा ने कहा, "मुझे लगता है कि उनके रुख में कोई बदलाव नहीं आया है। वजह यह है कि उनकी पार्टी का कोई भी सदस्य लोकसभा या राज्यसभा में नहीं है। किसी भी राज्य की सीटें कम नहीं होनी चाहिए। सीटें कम न करने की बात कहकर वे वही मांग कर रहे हैं जो उन्होंने पहले की थी।"

सलूजा ने कहा कि कोई भी परिसीमन बिल का विरोध नहीं कर रहा है। सभी विपक्षी दलों ने महिला आरक्षण बिल के नाम पर गलत तरीके से परिसीमन बिल पास करने का विरोध किया था। महिला आरक्षण बिल सितंबर 2023 में ही, यानी 2024 से पहले, 33 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए पास हो चुका था। कांग्रेस और सभी विपक्षी दलों ने कहा था कि इसे 2024 में ही लागू किया जाना चाहिए। लेकिन सरकार ने इसे परिसीमन से जोड़ दिया, जिसके कारण इसका लागू होना टल गया।"

दूसरी तरफ, जेडीयू ने इस मुलाकात को सकारात्मक बताया है। पटना में जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "तमिलनाडु के हितों से समझौता करने का कोई सवाल ही नहीं है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बार-बार कहा है कि दक्षिणी राज्यों को परिसीमन को लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं है। जो भी फैसला लिया जाएगा, उसमें सभी राज्यों के हितों का ध्यान रखा जाएगा।"

राजीव रंजन ने आगे कहा कि तमिलनाडु की कई पार्टियां अब यह बात समझती हुई दिख रही हैं। मुख्यमंत्री विजय का रुख भी साफ तौर पर नरम पड़ा है, जिससे पता चलता है कि वे केंद्र की कोशिशों को समझते हैं और उन्हें भरोसा है कि केंद्र सरकार तमिलनाडु के हितों से समझौता नहीं करेगी। परिसीमन की प्रक्रिया में तमिलनाडु को उसका उचित हिस्सा मिलेगा।

--आईएएनएस

पीआईएम/एएस