भवानीपुर, 20 जून (आईएएनएस)। 'पश्चिम बंग दिवस' के अवसर पर पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने कहा कि यह दिन पश्चिम बंगाल के लोगों, खासकर बंगाली हिंदुओं के लिए बेहद ऐतिहासिक और भावनात्मक है। उन्होंने इस अवसर का श्रेय भारतीय जनसंघ के संस्थापक और प्रख्यात नेता डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को दिया।
अग्निमित्रा पॉल ने पत्रकारों से कहा, "यह हम सभी के लिए बहुत भावुक पल है। पश्चिम बंगाल के बंगालियों के पूर्वज हमेशा एक स्वतंत्र बंगाल का सपना देखते थे और 'पश्चिम बंग दिवस' मनाना चाहते थे। यह केवल हमारी पार्टी के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की दूरदर्शिता, संघर्ष और पश्चिम बंगाल के बंगालियों के कल्याण के प्रति उनकी सोच के कारण संभव हो पाया।"
उन्होंने बताया कि तारकेश्वर में पहली बैठक हुई थी, जहां यह फैसला लिया गया था कि स्वतंत्रता के बाद बंगाल का विभाजन होना चाहिए। उस क्षेत्र को भारत में रखा जाए जहां हिंदू आबादी अधिक है और बाकी हिस्सा बांग्लादेश (तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान) में जाए।
अग्निमित्रा पॉल ने कहा, "अगर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी नहीं होते तो आज हम बांग्लादेश में होते। आज हम स्वतंत्र हैं और अपनी संस्कृति, विचारधारा तथा पहचान को बचा पाए हैं तो इसका श्रेय डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को जाता है।"
उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी ने कई बार पिछली राज्य सरकार से 20 जून को 'पश्चिम बंग दिवस' के रूप में मनाने की मांग की थी, क्योंकि इसी दिन पश्चिम बंगाल का गठन हुआ था। लेकिन उस समय की सरकार ने इसकी अनुमति नहीं दी। तत्कालीन सरकार चाहती थी कि बंगाली नववर्ष को ही 'पश्चिम बंग दिवस' के रूप में मनाया जाए और इतिहास को भुला दिया जाए।
राज्य सरकार की मंत्री ने कहा कि आखिरकार बंगाल की जनता की आवाज सुनी गई और आज यह ऐतिहासिक दिन मनाया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस अवसर पर कार्यक्रम में शामिल होने आ रहे हैं। उनके साथ मुख्यमंत्री भी मौजूद रहेंगी। उन्होंने कहा कि यह दिन डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के योगदान को याद करने और बंगाल के इतिहास को सम्मान देने का अवसर है, जिसे लेकर राज्य के लोग बेहद भावुक और गौरवान्वित हैं।